दस राज्यों में तेजी से बढ रहा कोरोना संक्रमण, प्रदेश के लिए बहुत संभलकर चलने का वक्त: अनूप

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टेस्टिंग, वैक्सीनेशल और माइक्रो कंटेनमेंट क्लस्टरिंग पर ध्यान देने की जरूरत:  एसडीसी फाउंडेशन

देहरादून। देश के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से बढ़ रही कोविड-19 संक्रमण दर के बीच सोशल डेवलेपमेंट फाॅर कम्युनिटी (एसडीसी) फाउंडेशन ने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से आने वाले कुछ समय तक बेहद संभलकर चलने और हर संभवत एहतियाती कदम उठाने को कहा है।

फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने एक प्रेस नोट में कहा है कि देश के 10 राज्यों केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, उड़ीसा, असम, मिजोरम, मेघालय, आंध्र प्रदेश और मणिपुर में कोविड मामलों की संख्या बढ़ रही है। केन्द्र सरकार ने इन राज्यों को जरूरी सावधानियां बरतने के लिए भी कहा है। इसके अलावा देश के 46 जिलों में इन दिनों संक्रमण दर 10 प्रतिशत से ज्यादा और 53 जिलों में 5 से 10 प्रतिशत के बीच है।

अनूप ने कहा कि उत्तराखंड में बेशक फिलहाल स्थिति ऐसी नहीं है, लेकिन हमारे लिए भी यह चिन्ता की बात है और यह संकेत है कि हमें अभी और जरूरी कदम उठाने चाहिए। उत्तराखंड में हाल के दिनों में आये पाॅजिटिव केसेज के आंकड़ों को विश्लेषण करके उन्होंने कहा कि राज्य में कोविड संक्रमण के 72 हफ्ते 31 जुलाई को पूरे हो चुके हैं। 70 वें हफ्ते में राज्य में 296 नये कोविड केस आये थे। 71 वें हफ्ते में यह संख्या 240 थी, जबकि 72 वें हफ्ते में संख्या बढ़कर 466 हो गई। यानी कि 71वें हफ्ते की तुलना में 72वें हफ्ते में 94 प्रतिशत केस बढ़ गये। वे कहते हैं कि संख्या की दृष्टि से ये आंकड़े बेशक बहुत छोटे हैं, लेकिन यह एक तरह से खतरे की घंटी है और इसे देखते हुए हमें संभलने की जरूरत है।

एसडीसी फाउंडेशन ने नई परिस्थितियों में वैक्सीनेशन की रफ्तार को और तेज करने के साथ ही टेस्टिंग की संख्या बढ़ाने को भी कहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने हर दिन 40 हजार टेस्ट करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन कुल टेस्टिंग पिछ्ले डेढ महीने से साप्ताहिक आंकलन के आधार पर निर्धारित लक्ष्य से 35 से 43 प्रतिशत कम हो रही है। कोविड संक्रमण के 72वें हफ्ते का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्य के हिसाब से इस हफ्ते राज्य में 2 लाख 80 हजार लोगों का टेस्ट किया जाना था, लेकिन वास्तव में 1 लाख 83 हजार 310 टेस्ट ही किये जा सके जो लक्ष्य से 35 प्रतिशत कम है।

अनूप नौटियाल ने टेस्टिंग और वैक्सीनेशन के साथ ही माइक्रो कंटेनमेंट क्लस्टर की तरफ भी ध्यान देने को कहा है। यानी कि जहां एक मरीज भी कंफर्म होता है, वहां छोटे-छोटे एरिया को कंटेनमेंट जोन बनाया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार और संबंधित सभी विभाग इस दिशा मे और अधिक ध्यान लगातार प्रयास जारी रखेंगे।

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