भाजपा का कांग्रेस को बडा़ झटका, राहुल प्रियंका के करीबी पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने थामा भाजपा का दामन

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नई दिल्ली। कांग्रेस में उत्तर भारत के बड़े चेहरे और राहुल और प्रियंका गांधी के करीबी रहे जितिन प्रसाद ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। बीजेपी मुख्यालय में उन्होंने पीयूष गोयल और अनिल बलूनी की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। जितिन प्रसाद पिछले काफी समय से कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से नाराज चल रहे थे।

अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है. इस बड़े राजनीतिक परिवर्तन के पीछे बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोय़ल की अहम भूमिका रही है। हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल चुनाव में जितिन राज्य के प्रभारी थे और वहां पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी. बीते साल ही जितिन प्रसाद ने अपनी अगुवाई में एक ब्राह्मण चेतना परिषद नाम से संगठन स्थापित किया था।

बीजेपी का जितिन प्रसाद को पार्टी में लाने का मकसद है कि पार्टी के नाराज चल रहे ब्राह्मण समुदाय के लोगों को साधा जा सके. गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद से यह कहा जा रहा था कि वे ठाकुरों का पक्ष ज्यादा ले रहे हैं और प्रशासन में नियुक्ति तक पर योगी पर इस प्रकार के आरोप लगे.बताया जा रहा है कि वह कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व से नाराज चल रहे थे. बताया यह भी जा रहा है कि जितिन प्रसाद पहले ही बीजेपी में शामिल हो जाते लेकिन, प्रियंका गांधी के मान मनौव्वल के बाद वे मान गए थे।

बीजेपी के इस दांव को पार्टी की ओर से आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी की दिशा में एक कदम माना जा रहा है. कांग्रेस पार्टी यूपी में जमीन तलाश रही है और ऐसे में एक दिग्गज नेता का पार्टी से जाना उसे और कमजोर करेगा. इससे पहले 2019 में भी जितिन प्रसाद के कांग्रेस छोड़ने की खबरें सामने आई थी. हालांकि, कुछ दिन बाद खुद जितिन प्रसाद सामने आए थे और कहा था कि मैं काल्पनिक सवालों का जवाब नहीं देता हूं।

जितिन प्रसाद, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी हैं. इससे पहले राहुल के ही सबसे करीबी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीजेपी का दामन थाम लिया था।

कई और नेता हो सकते हैं बीजेपी में शामिल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी और भी कांग्रेस के कई नेता बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. बीजेपी की रणनीति हमेशा से ऐसी रही है कि चुनावों से पहले विपक्षी दलों को कमजोर किया जाए और उनके बड़े नेताओं को पार्टी में शामिल किया जाए. गौरतलब है कि अगले साल के आरंभ में ही यूपी में चुनाव होने वाले है. जितिन प्रसाद को भी इसी रणनीति के तहत पार्टी में शामिल किया गया है।

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