सुप्रीम कोर्ट की तीनों कृषि कानूनों पर अगले आदेश तक रोक, जानिए सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के महत्वपूर्ण अंश

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नई दिल्ली। कृषि कानूनों को समाप्त करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों एवं सरकार के बीच बातचीत के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी का गठन किया।

सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन की सुनवाई पर पल पल की उपडेट

याचिकाकर्ता ML शर्मा बोल रहे हैं- किसान किसी कमेटी के सामने नहीं जाना चाहते। सिर्फ कानूनों को रद्द करवाना चाहते हैं। किसानों को कॉरपोरेट हाथों में छोड़ देने की तैयारी। ज़मीन छीन ली जाएगी

CJI- हम अंतरिम आदेश में कहेंगे कि ज़मीन को लेकर कोई कांट्रेक्ट नहीं होगा
शर्मा- किसान कल मरने की बजाय आज मरने को तैयार

CJI- हम इसे जीवन-मौत के मामले की तरह नहीं देख रहे। हमारे सामने कानून की वैधता का सवाल है। क़ानूनों के अमल को स्थगित रखना हमारे हाथ में है। लोग बाकी मसले कमेटी के सामने उठा सकते हैं।

शर्मा- कोर्ट ही हम सबकी आखिरी उम्मीद है

CJI- जो वकील हैं, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि जब आदेश सही न लगे तो अस्वीकार करने लगें

शर्मा- मैंने पूर्व CJI खेहर समेत कुछ नाम सुझाए हैं

CJI- बाकी लोग भी सुझाएं। हम विचार करेंगे

CJI- सुनने में आ रहा है कि गणतंत्र दिवस कार्यक्रम को बाधित करने की तैयारी है। सवाल है कि लोग हल चाहते हैं या समस्या बनाए रखना चाहते हैं। अगर हल चाहते हैं तो यह नहीं कह सकते कि कमेटी के पास नहीं जाएंगे

शर्मा- किसान यह भी कह रहे हैं कि सब आ रहे हैं, पीएम बैठक में क्यों नहीं आते

CJI- हम पीएम को नहीं कहेंगे कि वह बैठक में आएं

सॉलिसीटर- कृषि मंत्री बात कर रहे हैं। उनका विभाग है

CJI- हम कानून का अमल स्थगित करेंगे। लेकिन अनिश्चित काल के लिए नहीं। हमारा मकसद सिर्फ सकारात्मक माहौल बनाना है। उस तरह की नकारात्मक बात नहीं होनी चाहिए जैसी एम एल शर्मा ने आज सुनवाई के शुरू में की

((शर्मा ने कहा था कि किसान कमेटी के पास नहीं जाएंगे। कानून रद्द हो))
भारतीय किसान यूनियन (भानू) के वकील ने कहा- बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं आंदोलन में हिस्सा नहीं लेंगे

CJI- हम आपके बयान को रिकॉर्ड पर ले रहे हैं
किसान संगठनों के वकील दुष्यंत दवे, भूषण, गोंजाल्विस स्क्रीन पर नज़र नहीं आ रहे हैं

CJI- कल दवे ने कहा था कि सुनवाई टाली जाए। वह किसानों से बात करेंगे। आज कहां गए?

साल्वे- दुर्भाग्य से लगता है कि लोग समाधान नहीं चाहते। आप कमेटी बना दीजिए। जो जाना चाहते हैं जाएंगे
साल्वे- आंदोलन में वैंकूवर के संगठन सिख फ़ॉर जस्टिस के बैनर भी लहरा रहे हैं। यह संगठन अलग खालिस्तान चाहता है। कोर्ट की कार्रवाई से यह संकेत नहीं जाना चाहिए कि गलत लोगों को शह दी गई है

CJI- हम सिर्फ सकारात्मकता को शह दे रहे हैं

आंदोलनकारियों का समर्थन कर रहे वकील विकास सिंह- लोगों को रामलीला मैदान में जगह मिलनी चाहिए। जहां मीडिया भी उन्हें देख सके।

CJI- रैली के लिए प्रशासन को आवेदन दिया जाता है। पुलिस शर्तें रखती है। पालन न करने पर अनुमति रद्द करती है। क्या किसी ने आवेदन दिया?

सिंह- पता करना होगा

पी एस नरसिम्हा- प्रतिबंधित संगठन भी आंदोलन में लगे हैं

CJI- एटॉर्नी जनरल, क्या आप इसकी पुष्टि करते हैं?

एटॉर्नी- मैं पता करके बताऊंगा

CJI- आप कल तक इस पर हलफनामा दीजिए। इसका मतलब यह नहीं कि हम पूरे मामले पर आज आदेश नहीं देंगे। आदेश आज ही आएगा। आप इस पहलू पर कल तक जवाब दें
CJI- हम (गणतंत्र दिवस परेड बाधित करने की आशंका पर) सॉलिसीटर जनरल की अर्ज़ी पर नोटिस जारी कर रहे हैं। इस पर सोमवार को सुनवाई होगी। सभी पक्षों को याचिका की कॉपी दी जाए
एटॉर्नी जनरल ने कमेटी के गठन का स्वागत किया

एक याचिकाकर्ता ने आंदोलन में कोविड गाइडलाइंस के पालन की मांग की। CJI ने कहा- हमने आपकी बात नोट कर ली

सॉलिसीटर- कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं कि किसानों की ज़मीन छीन ली जाएगी। कांट्रेक्ट फार्मिंग में सिर्फ फसल का होगा। यह साफ किया गया है कि ज़मीन लेकर किसी कर्ज की वसूली नहीं होगी।

सुनवाई पूरी। सुप्रीम कोर्ट का आदेश। 3 कानून पर अमल स्थगित। कमेटी पर भी आज ही आएगा लिखित आदेश।

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी में यह 4 नाम होंगे :-

भूपिंदर सिंह मान (बीकेयू), अशोक गुलाटी (कृषि विशेषज्ञ), अनिल घनवटे (शेतकरी संगठन) और प्रमोद जोशी (खाद्य नीति विशेषज्ञ)

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