हरीश रावत को चुनाव संचालन समिति की कमान, प्रीतम समर्थक कई दावेदारों की बढी़ चिंता

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2022 विधानसभा चुनाव में प्रीतम समर्थक टिकट के कई दावेदारों को हाईकमान के फैसले से बडा़ झटका

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस में भारी उलटफेर के बाद अब प्रीतम टीम सकते में हैं। हरीश रावत के कार्यक्रमों में शामिल तक न होने वाला संगठन अब 2022 में किस प्रकार से हरीश रावत का साथ देगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन कांग्रेस हाईकमान के इस फैंसले से टिकट के कई दावेदारों को बडा़ झटका लगा है तो कईयों के चेहरों पर मुस्कान भी आ गयी हैं क्योंकि यह तो लगभग तय है कि 2022 में विधानसभा के टिकट अब रावत के अनुसार ही बांटे जाएंगे।

प्रदेश में पिछले करीब तीन सालों से कांग्रेस संगठन पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से किनारा किये हुआ था अक्सर देखा जाता था कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में केवल किसान कांग्रेस के पदाधिकारी या समर्थक ही नजर आते थे। मुख्य संगठन अक्सर उनके कार्यक्रम को निजी बताते हुए दूरी बनाते नजर आता था।

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में बैलगाड़ी यात्रा झोटा बुग्गी यात्रा और इसके साथ ही पहाड़ी व्यंजनों की दावतों का कार्यक्रम आयोजित किये। इन कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की भीड़ तो जुटी लेकिन मुख्य संगठन के पदाधिकारी इस कार्यक्रम से अक्सर ही दूर रहे। संगठन पदाधिकारियों की बात करें तो अंदरूनी तौर पर उन्होंने हरीश रावत की खिलाफत में कहीं कोई कमी नहीं छोड़ी।

अब कांग्रेस हाईकमान ने हरीश रावत को चुनाव समिति की कमान सौंपी है तो वहीं उनके करीबी गणेश गोदियाल को प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी दी है अब ऐसे में प्रीतम टीम के वह सदस्य जो कई मंचों पर खुले और अंदरूनी तौर पर हरीश रावत की खिलाफत करते नजर आते थे उनका ऊंट किस करवट बैठेगा यह देखने वाली बात होगी इन खिलाफत करने वालों में कई लोग 2022 में विधानसभा टिकट के दावेदार भी हैं। राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हरीश रावत को भी यह बात अच्छी तरह पता है कि इन टिकट के दावेदारों ने उनके रास्ते में खाई खोदने में कभी कोई कमी नही छोड़ी।

प्रदेश की अधिकतर सीटों पर कम से कम एक-एक दावेदार तो ऐसा है ही जो कि प्रीतम टीम में रहते हुए अपना टिकट कन्फर्म मान रहा था लेकिन अब इस उलटफेर से सबसे बड़ा झटका उन्हें लगा ही है अब ऐसे नेता अपनी राह बदलते हैं कि नही यह तो आने वाले कुछ समय के बाद ही साफ हो पायेगा। फिलहाल वक्त हरीश रावत का है यह उन्हें मानना पड़ेगा।

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