पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, प्रदेश सचिव सुमेंद्र बोहरा प्रदेश कोषाध्यक्ष गोदावरी थापली ने सरकार की भूमि नीति पर उठाए सवाल, कहा- प्रदेश की बेशकीमती संपत्तियों को निजी हितों की भेंट नहीं चढ़ने देंगे
देहरादून। प्रदेश सरकार पर सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस पार्टी ने ‘धामी हटाओ- भूमि बचाओ’ अभियान के तहत मसूरी में जॉर्ज एवरेस्ट के पास धरना प्रदर्शन कर विरोध जताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में मसूरी स्थित ऐतिहासिक जॉर्ज एवरेस्ट की भूमि को निजी हाथों में सौंपे जाने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विशाल प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन में पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, कांग्रेस सचिव सुमेंद्र बोहरा और प्रदेश कोषाध्यक्ष गोदावरी थापली ने प्रमुखता से भाग लेते हुए सरकार की भूमि नीति पर सवाल उठाए और प्रदेश की सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष का आह्वान किया।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की भूमि केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संपदा और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य है। राज्य गठन के समय प्रदेश की जनता ने सपना देखा था कि यहां के जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय जनता का अधिकार सुरक्षित रहेगा तथा इन संसाधनों का उपयोग प्रदेश के विकास और जनकल्याण के लिए किया जाएगा। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार सरकारी भूमि को कौड़ियों के भाव निजी हाथों में सौंपकर प्रदेश के हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है।
उन्होंने कहा कि मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसी महत्वपूर्ण भूमि को निजी हाथों में सौंपने का निर्णय अनेक सवाल खड़े करता है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि यह भूमि किस प्रक्रिया के तहत, किन शर्तों पर और किसके हितों को ध्यान में रखते हुए निजी हाथों में सौंपी गई है।

गोदियाल ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस पार्टी सरकारी संपत्तियों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। भाजपा सरकार को प्रदेश की जनता की संपत्तियों का निजी हितों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कांग्रेस का ‘धामी हटाओ-भूमि बचाओ’ अभियान प्रदेश की जमीन, जंगल और जनहितों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा जनआंदोलन है। उन्होंने मांग की कि जिन जमीनों को निजी हाथों में सौंपा गया है, उन्हें तत्काल सरकार में निहित किया जाए। साथ ही जॉर्ज एवरेस्ट की भूमि सहित सरकारी जमीनों को निजी हाथों में सौंपने से संबंधित सभी निर्णयों पर पुनर्विचार किया जाए और पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उत्तराखण्ड की जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक धरोहर और आने वाली पीढ़ियों का अधिकार है। राज्य गठन के समय जनता ने उम्मीद की थी कि जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों का अधिकार सुरक्षित रहेगा, लेकिन वर्तमान सरकार सरकारी भूमि को निजी हाथों में सौंपकर राज्य की मूल भावना के विपरीत काम कर रही है।

पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने जॉर्ज एवरेस्ट की ऐतिहासिक विरासत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मसूरी की पहचान केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की ऐतिहासिक धरोहर और प्राकृतिक संपदा भी इसकी विशिष्ट पहचान है। जॉर्ज एवरेस्ट जैसी महत्वपूर्ण भूमि को निजी हाथों में सौंपने का फैसला प्रदेश के हितों से जुड़ा गंभीर विषय है। सरकार को जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किन परिस्थितियों में इस भूमि को निजी हाथों में देने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों के संबंध में सरकार को पारदर्शिता बरतनी चाहिए और जनता को विश्वास में लेना चाहिए। प्रदेश की ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत पर किसी निजी हित का अधिकार नहीं होना चाहिए।
पार्टी के प्रदेश सचिव सुमेंद्र बोहरा ने भी सरकार की भूमि नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी जमीन जनता की संपत्ति है और सरकार उसका संरक्षण करने के लिए जिम्मेदार है। प्रदेश की बेशकीमती भूमि को निजी हाथों में सौंपने से पहले उसके दूरगामी परिणामों पर विचार किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना होगा कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में जनहित को कितनी प्राथमिकता दी गई और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई है। उन्होंने कांग्रेस के ‘धामी हटाओ-भूमि बचाओ’ अभियान को जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण आंदोलन बताते हुए कहा कि प्रदेश की जमीन और संसाधनों की रक्षा के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट होकर संघर्ष करेंगे।

कांग्रेस पार्टी की प्रदेश कोषाध्यक्ष गोदावरी थापली ने भी जॉर्ज एवरेस्ट की भूमि को निजी हाथों में सौंपे जाने पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधन प्रदेश की जनता की सामूहिक विरासत हैं। इन संसाधनों पर पहला अधिकार यहां के लोगों का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों और सरकारी भूमि के संबंध में लिए जाने वाले निर्णयों में पारदर्शिता और जनभागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए। सरकार को प्रदेश की जनता को विश्वास में लिए बिना इस प्रकार के निर्णय नहीं लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्रदेश की धरोहरों और जनहितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाती रहेगी।
प्रदर्शन में प्रदेश महामंत्री संगठन राजेन्द्र सिंह भंडारी, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, अश्विनी बहुगुणा, उपेन्द्र थापली, जिला पंचायत सदस्य गोविन्द सिंह पुण्डीर, अमरजीत सिंह, प्रदेश प्रवक्ता राजेश चमोली, जगदीश चौहान, विधानसभा प्रभारी अमरेंद्र बिष्ट, जिलाध्यक्ष अमित गुप्ता, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता, सुनीत राठौड़, सचिव यशपाल चौहान, गौरव अग्रवाल, ब्लॉक अध्यक्ष रितेश जोशी, प्रशांत खंडूरी, मनीष गुनियाल, सोनिया आनंद, ब्लॉक अध्यक्ष अपून सक्सेना, मेघ सिंह कंडारी, महिला नगर अध्यक्ष जसवीर कौर, महिला महानगर अध्यक्ष उर्मिला थापा, निशांत बोरा सहित अनेक वरिष्ठ नेता, प्रदेश पदाधिकारी, जिला एवं महानगर कांग्रेस के पदाधिकारी, विभिन्न प्रकोष्ठों एवं विभागों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कांग्रेस नेताओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखण्ड की जमीन, जंगल और प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा के लिए पार्टी का संघर्ष जारी रहेगा और प्रदेश की जनता की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने के किसी भी प्रयास का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

जॉर्ज एवरेस्ट की भूमि निजी हाथों में सौंपने के विरोध में कांग्रेस ने किया प्रदर्शन
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