कर्नाटक डीजीपी का बड़ा फैसला; पुलिस विभाग में खत्म होगा ‘अर्दली सिस्टम’

Astitva Times Desk
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नई दिल्ली। कर्नाटक पुलिस में लंबे समय से चली आ रही ‘अर्दली सिस्टम’ की परंपरा को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक एम ए सलीम ने पुलिस विभाग के भीतर इस व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला लिया है। इस कदम का उद्देश्य पुलिस बल का अधिक प्रभावी उपयोग करना और कांस्टेबलों को उनके वास्तविक कर्तव्यों में लगाना है।

दरअसल, अर्दली सिस्टम ब्रिटिश शासनकाल की एक पुरानी व्यवस्था रही है, जिसके तहत पुलिस कांस्टेबलों को वरिष्ठ अधिकारियों के घरों पर व्यक्तिगत सहायक के रूप में तैनात किया जाता था। इन कांस्टेबलों से खाना बनाने, घर की सफाई करने, बच्चों को स्कूल छोड़ने, बाजार से सामान लाने और अन्य घरेलू काम करवाए जाते थे। समय के साथ इस प्रथा की काफी आलोचना होती रही, क्योंकि इससे पुलिस बल का बड़ा हिस्सा अपने मूल कर्तव्यों से दूर हो जाता था।

डीजीपी एम ए सलीम द्वारा लिए गए ताजा फैसले के बाद अब कांस्टेबलों को अधिकारियों के निजी कामों में लगाने की प्रथा खत्म कर दी जाएगी। इसके साथ ही जो पुलिसकर्मी अब तक इस व्यवस्था के तहत तैनात थे, उन्हें वापस कोर पुलिसिंग ड्यूटी में लगाया जाएगा। इससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने, गश्त बढ़ाने और जांच कार्यों में अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध हो सकेगा।

यह फैसला राज्य सरकार द्वारा हाल ही में जारी उस सरकारी आदेश के बाद लागू किया गया है, जिसमें पुलिस विभाग के भीतर अर्दली सिस्टम में बदलाव करने की बात कही गई थी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पुलिसकर्मियों का उपयोग केवल सरकारी और आधिकारिक कार्यों के लिए ही किया जाएगा।

पुलिस विभाग के सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले से पुलिस बल के मनोबल पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। लंबे समय से कई पुलिसकर्मी और कर्मचारी संगठन इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि पुलिसकर्मियों से निजी घरेलू काम करवाना उनकी पेशेवर गरिमा के खिलाफ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अर्दली सिस्टम खत्म होने से पुलिस संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े कार्यों में ज्यादा पुलिसकर्मी उपलब्ध रहेंगे। साथ ही यह कदम पुलिस व्यवस्था को अधिक पेशेवर और जवाबदेह बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुल मिलाकर, डीजीपी एम ए सलीम का यह निर्णय कर्नाटक पुलिस में प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

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