बंगाल में राज्यपाल ने ममता बनर्जी सरकार को किया बर्खास्त

Astitva Times Desk
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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में गुरुवार को राज्यपाल आर. एन. रवि ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल को बर्खास्त कर दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब विधानसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य में नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अपने पद से हटने को तैयार नहीं थीं। इसी बीच राज्यपाल ने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मंत्रिपरिषद को भंग कर दिया।

राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को बेहद ऐतिहासिक और अभूतपूर्व माना जा रहा है। भाजपा ने इसे “लोकतंत्र की जीत” बताया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने राज्यपाल की कार्रवाई को “लोकतांत्रिक परंपराओं पर हमला” करार दिया है। बंगाल में अब सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है और नई सरकार गठन को लेकर भाजपा विधायक दल की बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं।

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की प्रचण्ड जीत के बाद ममता बनर्जी ने सीएम पद से इस्तीफा देने से इनकार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस को हराया है।

 

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की है। इस जीत के साथ ही ममता बनर्जी के हाथ से सीएम की कुर्सी भी चली गई है। हालांकि विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद भी ममता बनर्जी सीएम के पद से इस्तीफा देने के मूड में नहीं हैं।

मंगलवार को ममता बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस चुनाव हारी नहीं है, बल्कि उसे जबरन हराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने इस चुनाव में विलेन के रूप में काम किया। आयोग, केंद्र सरकार तथा भाजपा ने मिलीभगत से उनकी पार्टी को जबरन हराया है। नैतिक रूप से तृणमूल की जीत हुई है। उन्होंने आगे कहा कि वह लोकभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। ममता बनर्जी के इस बयान के बाद से अब सवाल उठता है कि अगर उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा नहीं दिया, तो बंगाल को नया सीएम कैसे मिलेगा। आइए जानते हैं इस मामले में हमारे संविधान में क्या लिखा है।

भारतीय संविधान के अनुसार, अगर कोई सीएम इस्तीफा न दे या फिर कोई दूसरी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हो, तो अनुच्छेद 356 के अनुसार राज्यपाल के पास पावर होती है कि वो इसकी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेज सकते हैं कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता। ऐसी स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। इसके बाद राज्य का कंट्रोल सीधा केंद्र सरकार के पास चला जाता है औ फिर सही वक्त पर नई सरकार का गठन किया जाता है।

पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मत-प्रतिशत में लगभग आठ प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे पार्टी को इस बार राज्य में अतिरिक्त 130 सीट हासिल करने में मदद मिली तथा तृणमूल कांग्रेस को राज्य में भारी हार का सामना करना पड़ा।आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा को इस बार 45.84 प्रतिशत वोट मिले, जो 2021 के मुकाबले 7.87 प्रतिशत अधिक हैं। उस वक्त भाजपा को 37.97 प्रतिशत वोट मिले थे। इस बढ़ोतरी के चलते पार्टी ने विधानसभा में 207 सीट हासिल कीं, जबकि पिछली बार उसे केवल 77 सीट मिली थीं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में 206 सीट पर जीत दर्ज की। इसी के साथ पार्टी ने 200 सीट से अधिक सीट हासिल करने का अपना वह लक्ष्य हासिल कर लिया है, जो उसने पांच साल पहले राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान तय किया था।पश्चिम बंगाल विधानसभा में सीटों की कुल संख्या 294 है। हालांकि, सोमवार को मतगणना केवल 293 सीट के लिए की गई, क्योंकि निर्वाचन आयोग ने चुनावी अनियमितताओं के आरोपों के चलते एक सीट पर मतदान रद्द कर दिया था।

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