मात्र 822 वोट पाने वाली पार्टी में शामिल हुए TMC के 20 सांसद

Astitva Times Desk
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों द्वारा नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने की घोषणा के बाद यह अपेक्षाकृत छोटी राजनीतिक पार्टी अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई है। सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने और सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है।

NCPI का नाम अब तक राष्ट्रीय राजनीति में चर्चित नहीं रहा था। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी को जनवरी 2023 में गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण मिला था। पश्चिम बंगाल में पंजीकृत होने के बावजूद पार्टी ने अपना पहला चुनाव त्रिपुरा विधानसभा में लड़ा था। उस चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद सीमित रहा और उसे कुल मिलाकर केवल 822 वोट प्राप्त हुए थे। राजनीतिक संसाधनों की कमी और संगठनात्मक चुनौतियों के कारण NCPI लंबे समय तक सक्रिय राजनीतिक भूमिका में दिखाई नहीं दी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। TMC के लगभग दो-तिहाई लोकसभा सांसदों के पार्टी में शामिल होने की घोषणा ने NCPI को अचानक राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला दी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि लोकसभा अध्यक्ष इस नए समूह को मान्यता देते हैं, तो संसद में NCPI की उपस्थिति कई स्थापित क्षेत्रीय दलों से अधिक प्रभावशाली हो सकती है। वहीं, इस घटनाक्रम से पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। दूसरी ओर TMC इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और पार्टी के भीतर इसे लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कानूनी और संसदीय स्तर पर भी चर्चा हो सकती है।

फिलहाल राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि जिस पार्टी को अपने पहले चुनाव में केवल 822 वोट मिले थे, वह अचानक 20 सांसदों के समर्थन के साथ राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में कैसे पहुंच गई। अब सबकी निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और NCPI की आगामी राजनीतिक रणनीति पर टिकी हैं।

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