कंगाल कांग्रेस! चुनाव के दौरान काम करने वाले वेंडर भुगतान के लिए हो रहे परेशान

MS Malik
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नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों ने भी कांग्रेस मुख्यालय पर ताला लगा दिया धरना

600 करोड़ खर्च कर पार्टी को मिले दो विधायक, जिम्मेदार कौन?

गौरव जायसवाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश चुनाव में सैकड़ों करोड़ फूंक कर केवल दो विधायक जिताने में कामयाब रही कांग्रेस में अब वोटों के साथ-साथ नोटों का भी टोटा है। पार्टी की बुरी माली हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चुनाव के दौरान कांग्रेस के लिए काम करने वाले 80 फीसदी वेंडरों को अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। यही नहीं पैसों की कमी की आड़ में तीस-तीस सालों से पार्टी कार्यालय में काम कर रहे दर्जन भर कार्यकर्ताओं को मात्र एक माह का वेतन देकर घर बिठाने के तुगलकी आदेश जारी कर दिये गये हैं। पार्टी प्रबंधन के तुगलकी आदेश के चलते जबरन निकाले गये पार्टी कर्मचारी आंदोलनरत हैं।

लगभग 42 साल तक सूबे में एकछत्र राज्य करने वाली वाली कांग्रेस इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। पार्टी में वर्तमान में कोई प्रदेश अध्यक्ष नहीं है। अधिकांश जनाधार वाले नेताओं ने या तो पार्टी छोड़ दी है या उन्हें किनारे कर दिया गया है। पार्टी चलाने की जिम्मेदारी ऐसे लोगों के हाथों में है जिनकी हैसियत सभासदी का चुनाव जीतने की भी नहीं है। ऐसा नहीं है कि पार्टी की दुर्दशा एक दिन में हुई है। पार्टी तीन दशकों से यूपी की सत्ता से बाहर है। उसका वोट प्रतिशत लगातार कम हो रहा है। हाल ही में सम्पन्न चुनाव में उसे मात्र 2 फीसदी वोट ही मिले जबकि इस चुनाव में पार्टी के नीति निर्धारकों ने 600 करोड़ से अधिक का खर्च किया है। पार्टी के लोग अब मजाक में यह भी कहते हैं कि हमारा एक विधायक तीन सौ करोड़ कीमत का है।

किन पर थी पैसा खर्च करने की जिम्मदारी
इस चुनाव में पार्टी पदाधिकारी धीरज गुर्जर व रोहित चौधरी के हाथों में पैसों के लेन-देन की जिम्मदारी थी। चुनाव में पार्टी की ओर से खूब इवेंट किये गये और उसमें करोड़ों खर्च दिखाये गये। अब हालत यह है कि तमाम वेंडर अपने भुगतान के लिए कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें या तो टरका दिया जाता है या फिर उन्हें अपने बिल को कम करने का दबाव बनाया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अभी तक चुनावी खर्चों के 80 फीसदी बिलों को भुगतान पार्टी नहीं कर पायी है।

पार्टी ने बाहर किये 11 स्थायी कर्मचारी
अपने खर्चों को कम करने का हवाला देकर दो दिन पूर्व पार्टी नीति निर्धारकों ने अचानक 11 स्थायी कर्मचारियों को बाहर करने का नोटिस थमा दिया। नाराज कर्मचारियों ने जब मेन गेट पर ताला डाल कर कार्यालय पर धरना दिया तो उनका आक्रोश इस बात से और बढ़ गया कि कि उन्हें हटाये जाने के ठोस कारण नहीं बताये जा रहे हैं। कर्मचारियों का साफ कहना है कि 20 साल से वह कार्यालय की और कांग्रेस की सेवा कर रहे हैं। ऐसे में अब उन्हें कांग्रेस कार्यालय से बाहर कर देना उनके साथ अन्याय है। उनका कहना है पार्टी यह काम अब आउटसोर्सिंग पर कराने का मन बना रही है। एक अन्य कर्मचारी ने कहा कि परेशानी इस बात से नहीं है कि नौकरी से निकाला जा रहा है। लेकिन कुछ नियम है कुछ कानून है। उस प्रक्रिया के तहत निकाला जाता है। यहां तो बैक डेट पर नोटिस थमा दिया गया कि आपको काम नहीं करना है।

मामला शांत करने के लिए गठित की समिति
मामला बढ़ने पर पार्टी की ओर से एक समिति बना दी गई है। पार्टी प्रदेश कोषाध्यक्ष सतीश अजमानी ने बताया कि हटाये गये कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए एक समिति गठित की गई है जिसमें कर्मचारियांे की सेवा नियमावली को एआईसीसी की नीतियों के अनुसार तय कर ही अगला कदम उठाया जाएगा। बता दें कि प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में लगभग 45 कर्मचारी कार्यरत हैं।

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