भाजपा ने प्रदेश उपाध्यक्ष समेत चार पूर्व विधायकों को 6 साल के लिए पार्टी से किया निष्कासित

MS Malik
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नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के बागी नेता ही उसके लिए बड़ी चुनावी मुसीबत बन गए हैं। टिकट बंटवारे से नाराज़ चार पूर्व विधायकों समेत पांच नेताओं को भाजपा ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इसके अलावा पार्टी के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष की प्राथमिक सदस्यता भी रद्द कर दी गई है। इन बागी नेताओं में पार्टी के साथ कई दशकों से जुड़े हुए कद्दावर नेता भी शामिल है। जिनके चुनाव लड़ने से भाजपा के उम्मीदवारों का नुकसान होना तय माना जा रहा है। भाजपा के इन बागी उम्मीदवारों को जितना वोट मिलेगा उतना ही कांग्रेसी उम्मीदवारों को फायदा होने की संभावना बढ़ जाएगी। ऐसे में बताया जा रहा है कि डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा इन बागी नेताओं के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने का मन बना चुकी थी।

दरअसल भाजपा का यह मानना है कि कठोर कार्यवाही करके एक तरफ जहां भाजपा के कैडर को स्पष्ट संदेश मिल जाएगा तो वहीं दूसरी तरफ मतदान करने को लेकर कन्फ्यूज्ड वोटरों के मन में भी भाजपा उम्मीदवारों को लेकर तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी। निष्कासित सभी नेताओं पर 6 साल के लिए पार्टी से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने पर रोक रहेगी। भाजपा ने जिन नेताओं को निष्कासित किया है वह सभी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशीयों के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। जिन नेताओं पर एक्शन लिया गया है उनमें किन्नौर के पूर्व विधायक तेजवंत सिंह नेगी, इंदौरा के पूर्व विधायक मनोहर धीमान, आनी के पूर्व विधायक किशोरीलाल, नालागढ़ के पूर्व विधायक के एल ठाकुर के साथ ही पार्टी के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष कृपाल परमार शामिल है। राज्य में विधानसभा की सभी 68 सीटों पर 12 नवंबर को मतदान होना है।

प्रदेश में ज्यादातर विधानसभा सीटों पर कुछ हजार वोटों का अंतर ही हार जीत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में भाजपा के लिए उसके अपने बागी नेता ही परेशानी का सबब बन गए हैं। भाजपा हर चुनाव में सरकार बदलने की राजनीतिक परंपरा को तोड़ते हुए इस बार सरकार नहीं वाज बदले के नारे के साथ चुनाव लड़ रही है। लेकिन पार्टी के बागियों ने भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ा दी है।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपना गृह राज्य होने के कारण नाराज और बाकी नेताओं को मनाने की स्वयं ही जिम्मेदारी संभाली हुई थी। नड्डा ने लगातार नाराज नेताओं से मुलाकात कर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे बागियों को हर तरीके से मनाने समझाने की कोशिश की जिसमें नड्डा को कई मोर्चों पर कामयाबी भी मिली। लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तमाम प्रयासों के बावजूद अभी भी पार्टी के लगभग 21 नेता बागी होकर भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव में ताल ठोक रहे हैं।

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