
देहरादून। उत्तराखंड में पंचायत चुनाव के पहले चरण का मतदान कल 24 जुलाई को हो रहा है। पहले चरण के मतदान का प्रचार मंगलवार शाम को बंद हो गया। जिले के विकासनगर, कालसी और चकराता ब्लॉक में कल मतदान होगा।
वहीं दूसरे चरण का मतदान 28 जुलाई को सम्पन्न होगा, जिसमें सहसपुर, रायपुर और डोईवाला ब्लॉक में मतदाता अपने अपने गांव की सरकार चुनने के लिए मतदान करेंगे।
सहसपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत खुशालपुर, में दूसरे चरण यानी 28 जुलाई को मतदान होगा। उस दिन खुशहालपुर के लगभग 4200 मतदाता अपने गांव के भविष्य का फैसला करेंगे। खुशहालपुर ग्राम पंचायत इस बार एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी हुई दिख रही है। सालों से चली आ रही पुरानी शैली की राजनीति, जनप्रतिनिधियों के टालमटोल रवैये और अधूरे वादों से तमाम दूसरे इलाकों की तरह इस गांव की जनता भी ऊब चुकी है। और अब एक ऐसे नेता की जरूरत महसूस कर रही है, जो न सिर्फ गांव की बुनियादी जरूरतों को समझे, बल्कि गांव के लोगों की धड़कनों से जुड़ा हो।
ऐसे ही एक चेहरे के रूप में तेजी से उभर रहे हैं शराफ़त मलिक, एक युवा, शिक्षित और दूरदर्शी नेता जो (इमली) चुनाव चिह्न के साथ प्रधान पद के लिए चुनावी मैदान में हैं, और गांव की जनता का दिल जीतने में लगे हैं। गांव के लोग भी शराफत की साफ और ईमानदार युवा की छवि से प्रभावित होते दिख रहे हैं।

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🔹 कौन हैं शराफ़त मलिक?
शराफत मलिक न केवल एक नाम है, बल्कि नई पीढ़ी की सोच, साफ नियत और समर्पित सेवा भावना का प्रतीक हैं। वे उन युवाओं में से हैं जो गांव में रहकर ही गांव के विकास का सपना देखते हैं, और उसे हकीकत में बदलने के लिए पूरी मेहनत से लगे हैं।
उनकी सोच केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे गांव को “आधुनिक और आत्मनिर्भर पंचायत” में बदलने के लिए एक स्पष्ट और ठोस योजना लेकर आए हैं।

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🔹 श्राफ़त मलिक का एजेंडा: जनता की ज़रूरतों के सबसे करीब
1️⃣ पक्की सड़कें, हर गली-हर घर तक
गांव की टूटी-फूटी सड़कों को बदलकर पक्की और टिकाऊ सड़कें बनाई जाएंगी ताकि बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर किसी को आवाजाही में सहूलियत मिले।
2️⃣ पेंशन और सरकारी योजनाओं की सीधी पहुँच
वृद्धजन, विधवाएं, और दिव्यांग नागरिकों को समय पर पेंशन दिलाना और उन्हें आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड, व अन्य ज़रूरी सुविधाओं से जोड़ना —शराफ़त मलिक की प्राथमिकता है।

3️⃣ नशा मुक्ति अभियान — गांव को बर्बादी से बचाना है
नशा और शराब जैसी बुराइयाँ गांव की युवा पीढ़ी को खोखला कर रही हैं। शराफत मलिक ने इस पर गहराई से काम करने का संकल्प लिया है।
वे गांव के बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों की एक समिति बनाएंगे जो इस मुद्दे पर जनजागरूकता फैलाएगी और नशा मुक्त गांव की दिशा में काम करेगी। नशे के आदि हो चुके युवाओं की अच्छे डॉक्टरों से काउंसिलिंग कराकर ऐसे युवाओं को समाज की मुख्य धारा में वापस लाने के लिए गंभीरता से प्रयास करेंगे जिसमें इन युवाओं के माता पिता को भी जोड़ा जाएगा।
4️⃣ युवाओं के लिए खेल का मैदान और रोशनी भरा भविष्य
गांव में खेल का मैदान बनवाना शराफत मलिक का सपना है, ताकि युवा पीढ़ी मोबाइल और नशे से हटकर खेलों में रुचि ले और आगे बढ़े। साथ ही खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन से उन्हें पहचान और प्रोत्साहन मिलेगा।
5️⃣ जनता से सीधा संवाद और समाधान
एक स्थायी जन सेवा केंद्र बनाया जाएगा जहां हर नागरिक अपनी समस्याएं सीधे रख सकेगा, और उनका समाधान समयबद्ध तरीके से किया जाएगा।


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🔹 गांव के लोग क्या कह रहे हैं?
गांव के एक बुज़ुर्ग का कहना है —
“हमने कई बार प्रधान बदले, पर सोच नहीं बदली। अब समय आ गया है कि हम एक ऐसे युवा को मौका दें जो सच्चे मन से गांव की सेवा करे। शराफत मलिक वही चेहरा है।”
वहीं युवाओं का कहना है —
“शराफत भाई जैसे नेता ही हमें आगे ले जा सकते हैं। उनके आने से हमें लगता है कि अब हमारी बात सुनी जाएगी और बदलाव ज़रूर आएगा।”
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🔹 शराफत मलिक की खासियतें जो उन्हें भीड़ से अलग बनाती हैं
✔️ पढ़े-लिखे, समझदार और गांव की ज़रूरतों से वाक़िफ़
✔️ बिना भेदभाव के, सभी वर्गों की सेवा का संकल्प
✔️ नशे के खिलाफ खड़े होने का साहस
✔️ पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति
✔️ विकास के लिए योजनाबद्ध सोच
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✅ अब वक्त है बदलाव का…
शराफत मलिक कोई बड़े-बड़े वादे नहीं करते, बल्कि जमीनी सच्चाई से जुड़ी बातें करते हैं। उनका कहना है:
> “मैं चुनाव जीतने नहीं, सेवा करने आया हूँ। अगर आपने साथ दिया तो मैं वादा करता हूँ — गांव की तस्वीर और तक़दीर दोनों बदल कर दिखाऊंगा।”
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**अबकी बार – युवा नेतृत्व के साथ विकास की सरकार
गांव को बनाएं नशा मुक्त, शिक्षित, स्वच्छ और आत्मनिर्भर –
शराफत मलिक ने गांव की समस्त जनता से गुजारिश करते हुए कहा कि चुनाव चिह्न (इमली) पर दिया गया
“आपका हर एक वोट, हमारी ग्राम पंचायत के बड़े बुजुर्गों, मां बहनों और बच्चों का उज्ज्वल भविष्य तय करेगा।”












