देहरादून। राजधानी देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में तैनात पुलिस हेड कांस्टेबल सुनील कुमार (49) की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना सोमवार देर रात रानीपोखरी थाना क्षेत्र के नागाघेर स्थित उनके निजी आवास पर हुई। बताया जा रहा है कि उनकी सरकारी सर्विस कार्बाइन से चली गोलियों के कारण उनकी जान चली गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हेड कांस्टेबल की सरकारी कार्बाइन से संदिग्ध परिस्थितियों में 10 से 11 गोलियां एक के बाद एक लगातार चलीं। इनमें से तीन गोलियां सीधे सुनील कुमार की छाती में जा लगीं। गोलीबारी की आवाज सुनकर परिजन तुरंत बाहर भागे और उन्हें गंभीर रूप से घायल अवस्था में जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल ले गए। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मौके से गोलियों के खोखे बरामद कर लिए हैं। वर्तमान में फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) और पुलिस की टीमें मामले की बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह महज एक हादसा था या इसके पीछे कोई अन्य गंभीर कारण है।
मृतक के बेटे ने पुलिस को बताया कि उसके पिता को नागाघेर, रानीपोखरी स्थित उनके घर पर रात करीब 9:15 बजे कार्बाइन से गोली लगी थी। सूचना मिलते ही प्रभारी निरीक्षक रानीपोखरी पुलिस बल के साथ तुरंत घटना स्थल (नागाघेर) पहुंचे। उच्चाधिकारियों को सूचित करने के साथ ही फील्ड यूनिट और FSL टीम को भी मौके पर बुला लिया गया।
FSL और फील्ड यूनिट की टीमों ने घटना स्थल पर पहुंचकर विस्तृत फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और साक्ष्य एकत्र करने की अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं। इसके बाद जौलीग्रांट अस्पताल में FSL टीम द्वारा शव का गहन निरीक्षण किया गया और पंचायतनामा की कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवा दिया गया।
पुलिस द्वारा मृतक के बेटे तुषार से की गई विस्तृत पूछताछ में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं:
ड्यूटी से घर वापसी: तुषार ने बताया कि उसके पिता राज्य अतिथि गृह (स्टेट गेस्ट हाउस) जौलीग्रांट में ड्यूटी पर तैनात थे और वहीं रहते थे।
तबीयत खराब होने की सूचना: 25 मई की रात्रि में मां की तबीयत खराब होने के कारण तुषार ने फोन कर अपने पिता को इसकी जानकारी दी थी।
हादसे का क्रम: सूचना मिलते ही हेड कांस्टेबल सुनील कुमार आनन-फानन में रात लगभग 9:15 बजे अपने घर पहुंचे। उन्होंने घर का गेट खटखटाते हुए आवाज दी। इसी दौरान जब वह आंगन में अपने जूते उतार रहे थे, तभी अचानक वह नीचे गिर गए और जोरदार गोली चलने की आवाज आई।
गोली की आवाज सुनकर घर के अंदर मौजूद उनकी पत्नी, बेटा और बेटी तुरंत बाहर की तरफ दौड़े, जहां उन्होंने सुनील कुमार को लहूलुहान हालत में पाया।
जांच के मुख्य बिंदु
पुलिस इस मामले में सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर तफ्तीश कर रही है:
क्या जूते उतारते समय संतुलन बिगड़ने से सरकारी कार्बाइन का ट्रिगर अचानक दब गया?
स्वचालित (Automatic) मोड पर होने के कारण क्या एक साथ इतनी गोलियां चलीं?
मामले में किसी अन्य प्रकार की साजिश या मानसिक तनाव का कोई कोण तो नहीं है?












