सीवर लाइन बनी खतरा, दूषित पानी पीने को मजबूर सैकड़ों परिवार

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40 साल पुरानी सीवर लाइन फटने से दून विहार में स्वास्थ्य संकट, मानसून से पहले कार्रवाई नहीं हुई तो हालात होंगे भयावह

देहरादून। राजधानी देहरादून के वार्ड-06 दून विहार में पेयजल एवं सीवर व्यवस्था की बदहाली अब एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी है। क्षेत्र की लगभग 40 साल पुरानी जर्जर सीवर लाइन के कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त और फट जाने के कारण सीवर का गंदा पानी पेयजल व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। नतीजतन 600 से अधिक परिवार दूषित और असुरक्षित पानी पीने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से सीवर लाइन की मरम्मत और नई लाइन बिछाने की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अब स्थिति यह हो गई है कि कई घरों में आने वाले पानी से दुर्गंध आती है और उसमें गंदगी के अंश स्पष्ट दिखाई देते हैं। क्षेत्र के लोगों में जलजनित बीमारियों जैसे डायरिया, टाइफाइड, पीलिया और अन्य संक्रमण फैलने की आशंका लगातार बनी हुई है।

बारिश ने खोली व्यवस्थाओं की पोल
गुरुवार को हुई बारिश ने क्षेत्र की बदहाल व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। बारिश के बाद बापूनगर क्षेत्र की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई, जिससे सैकड़ों परिवारों को घंटों तक पानी के लिए परेशान होना पड़ा। कई लोगों को निजी स्तर पर पानी की व्यवस्था करनी पड़ी, जबकि कुछ परिवारों को पीने के पानी के लिए दूसरे क्षेत्रों पर निर्भर होना पड़ा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर मानसून में यही स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई गंभीर प्रयास नहीं किए जाते। सीवर ओवरफ्लो, जलभराव और दूषित पेयजल अब क्षेत्रवासियों की नियति बन चुके हैं।

फाइलों में धूल खा रही 1370 लाख रुपये की योजना
दून विहार क्षेत्र की सीवर एवं पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए 1370 लाख रुपये की विस्तृत परियोजना (डीपीआर) तैयार की जा चुकी है, लेकिन यह योजना लंबे समय से विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर स्वीकृति का इंतजार कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनहित से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण योजना अधिकारियों की मेजों पर धूल फांक रही है, जबकि दूसरी ओर हजारों लोगों का स्वास्थ्य दांव पर लगा हुआ है।

पार्षद ने सचिव को लिखा पत्र
वार्ड-06 की पार्षद मीनाक्षी नौटियाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिव, पेयजल विभाग को पत्र भेजकर परियोजना को तत्काल स्वीकृति देने और कार्य शुरू कराने की मांग की है। पार्षद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि दून विहार, बापूनगर और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले सैकड़ों परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। यदि मानसून के दौरान स्थिति और बिगड़ी तो क्षेत्र में जलजनित रोगों का प्रकोप फैल सकता है, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते उनका कर्तव्य है कि जनता की समस्याओं को शासन तक पहुंचाएं, लेकिन अब आवश्यकता केवल पत्राचार की नहीं बल्कि तत्काल निर्णय और जमीनी कार्रवाई की है।

बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा खतरा
क्षेत्र के अभिभावकों में अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता है। दूषित पानी के कारण सबसे अधिक खतरा छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सीवर और पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो किसी बड़ी स्वास्थ्य आपदा से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान सीवर और पेयजल लाइनों में रिसाव की समस्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में यदि 40 वर्ष पुरानी सीवर लाइन को तत्काल बदला नहीं गया और प्रस्तावित परियोजना पर शीघ्र कार्य शुरू नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।