देहरादून। राजधानी देहरादून में आज 16 फरवरी को आयोजित होने वाले कांग्रेस के लोकभवन (राजभवन) से पहले लगाए गए होर्डिंग और बैनरों को प्रशासन द्वारा हटाए जाने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में गहरी नाराज़गी देखी जा रही है। पार्टी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार देते हुए सरकार पर तीखा प्रहार किया है।
जानकारी के अनुसार, शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और कार्यक्रम स्थल के आसपास कांग्रेस पदाधिकारियों ने पार्टी के कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार के लिए बैनर और होर्डिंग लगाए थे। सुबह जैसे ही कार्यकर्ता कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे, उन्हें पता चला कि प्रशासनिक टीम ने अधिकांश बैनर हटवा दिए हैं। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया और कई स्थानों पर उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की।
पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस के बढ़ते जनसमर्थन और आज के कार्यक्रम की सफलता से घबराकर सरकार ने यह कदम उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पदाधिकारियों द्वारा लगाए गए होर्डिंग-बैनरों से भयभीत होकर सरकार ने कायरता का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा, “यदि प्रशासन निष्पक्ष है तो उसे सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। शहर के अनेक क्षेत्रों में मंत्री विधायकों के जन्मदिन वाले बैनर होर्डिंग हफ्तों से लगे हुए हैं, लेकिन कार्रवाई केवल कांग्रेस के खिलाफ क्यों? यह साफ दर्शाता है कि प्रशासन पर राजनीतिक दबाव है।”
पार्षद सुमेंद्र सुशांत बोहरा ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है और कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर चुप नहीं बैठेगी। आवश्यकता पड़ी तो पार्टी व्यापक आंदोलन करेगी।
कांग्रेस के प्रदेश सचिव एवं धरमपुर विधानसभा के वरिष्ठ नेता रमेश कुमार मंगू ने भी इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम से ठीक पहले बैनर हटाना जानबूझकर किया गया कदम है, ताकि कार्यक्रम की भीड़ और प्रभाव को कम किया जा सके। मंगू ने प्रशासन से स्पष्ट जवाब और लिखित आदेश की प्रति सार्वजनिक करने की मांग की है।
दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि शहर में अवैध रूप से लगाए गए होर्डिंग और बैनरों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। नगर निगम और संबंधित विभागों द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाले बैनरों को हटाया गया है। दावा है कि यह कार्रवाई किसी विशेष दल के खिलाफ नहीं, बल्कि सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रेस नोट जारी नहीं किया गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि देहरादून में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और आगामी चुनावी तैयारियों के बीच इस प्रकार की घटनाएं राजनीतिक वातावरण को और गर्म कर सकती हैं। राजधानी में बैनर-पोस्टर को लेकर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं।
फिलहाल, कांग्रेस अपने कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटी है, वहीं प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है।













