डॉ. अंबेडकर जयंती पर श्रद्धा और संकल्प का संगम, सामाजिक समरसता का दिया गया संदेश

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देहरादून। संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव आंबेडकर जयंती के अवसर पर देहरादून में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि एवं जनसेवा कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। घंटाघर स्थित आंबेडकर पार्क में कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा के नेतृत्व में एक गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर वक्ताओं ने बाबा साहेब के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया।

लालचंद शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहेब द्वारा दिया गया संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उनकी विचारधारा और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। समाज में समानता, भाईचारे और न्याय की भावना को सशक्त करने के लिए उनके मार्ग पर चलना आवश्यक है। उन्होंने यह भी दोहराया कि कांग्रेस पार्टी सदैव संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है।कार्यक्रम में रामु राजोरिया, डॉ. ललिता प्रसाद, मुकेश कुमार, अर्जुन सोनकर, आशु रतूड़ी, हिमांशु, प्रकाश नेगी, बिट्टू गुसाईं सहित कई कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

वहीं, प्रेमनगर क्षेत्र में वाल्मीकि सेवा समिति द्वारा बाबा साहेब की 135वीं जयंती के अवसर पर प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बाजार में लगाए गए स्टॉल के माध्यम से आम नागरिकों को शुभकामनाएं दी गईं और संविधान की रक्षा करने की शपथ दिलाई गई।

कार्यक्रम में लालचंद शर्मा, विरेन्द्र पोखरियाल, राजीव पुंज, राजेश शर्मा, संजय शर्मा, संग्राम सिंह पुंडीर, समिति अध्यक्ष आशीष देसाई, सुमित खन्ना, दिवान सिंह बिष्ट, मोहन काला, संजय थापा, कैलाश वाल्मीकि, संजय बिरला, मनोज बिरला, रवींद्र सिंह रैना, कार्तिक बिरला, मानस चिनालिया, प्रमोद कांगड़ा, प्रदीप कुमार, सन्नी कुमार, महेश शर्मा, प्रेम कुमार, नितिन चंचल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।कार्यक्रमों के माध्यम से एक स्वर में यह संदेश दिया गया कि बाबा साहेब के विचार केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के मार्गदर्शक हैं। समाज के हर वर्ग तक उनके सिद्धांतों को पहुंचाकर एक समरस और सशक्त भारत का निर्माण ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।