बिजली दरों में वृद्धि औचित्यहीन, अन्य शुल्क भी बंद किए जाएं; आर्य

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जनसुनवाई में उपभोक्ताओं ने बिजली के दामों में बढ़ोतरी को लेकर जताया तीखा विरोध, 18.5% की बढ़ोतरी का प्रस्ताव

देहरादून। उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) द्वारा प्रस्तावित विद्युत दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ आयोजित जनसुनवाई में उपभोक्ताओं ने एक स्वर में अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में उपभोक्ता एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे, हालांकि उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभागीय प्रतिनिधि पूरे समय मौन बने रहे और उनकी समस्याओं का संतोषजनक उत्तर नहीं दिया।

जनसुनवाई के दौरान “जागरूक बनो आवाज़ उठाओ” अभियान के संयोजक यशवीर जी ने कहा कि प्रदेश में आए दिन बिजली दरों में वृद्धि की जा रही है, जिससे आम जनता, व्यापारी वर्ग और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उपभोक्ताओं ने न केवल प्रस्तावित दर वृद्धि का विरोध किया, बल्कि विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कई वक्ताओं ने विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, बिलिंग में अनियमितताओं और सेवा संबंधी शिकायतों के समाधान में देरी पर नाराजगी व्यक्त की।

‘केवल विद्युत प्रभार लिया जाए’
यशवीर आर्य ने जनसुनवाई में भाग लेते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि उपभोक्ताओं के बिजली बिल में केवल वास्तविक विद्युत उपभोग का प्रभार ही लिया जाए। वर्तमान में बिलों में लगाए जा रहे 3 -4 प्रकार के अतिरिक्त शुल्क—जैसे फिक्स्ड चार्ज, विद्युत ड्यूटी, सरचार्ज एवं अन्य प्रभार—को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।

यशवीर आर्य ने कहा कि जब तक विभाग अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता नहीं लाता और अनावश्यक शुल्कों को समाप्त नहीं करता, तब तक आम उपभोक्ता पर बढ़ता आर्थिक दबाव कम नहीं होगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से जागरूक होने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया।

उपभोक्ताओं ने दी चेतावनी
जनसुनवाई में उपस्थित उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रस्तावित दर वृद्धि वापस नहीं ली गई तो व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा। उनका कहना था कि पहले ही महंगाई चरम पर है, ऐसे में बिजली दरों में वृद्धि आमजन के लिए दोहरी मार साबित होगी। कार्यक्रम के अंत में उपभोक्ताओं ने लिखित रूप में अपना विरोध दर्ज कराया और सरकार तथा संबंधित नियामक आयोग से दर वृद्धि प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की।

प्रस्तावित बढ़ोतरी
यूपीसीएल (UPCL) ने 16.23% और पिटकुल ने लगभग 3% बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है, जिसका संयुक्त असर 18.50% की वृद्धि के रूप में सामने आ सकता है।

विरोध और रायः किसान प्रतिनिधियों ने कृषि और औद्योगिक दरों में वृद्धि को अन्यायपूर्ण बताया है।

सुनवाई की प्रक्रियाः आयोग द्वारा गढ़वाल (देहरादून,

कर्णप्रयाग) और कुमाऊं (रुद्रपुर, मुनस्यारी) मंडलों में जनसुनवाई के माध्यम से सुझाव और आपत्तियां ली जा रही हैं।

अंतिम निर्णयः जनसुनवाई के बाद तथ्यों के अध्ययन के आधार पर 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू की जाएंगी।

यह बढ़ोतरी यूपीसीएल द्वारा वित्तीय घाटे और परिचालन लागत का हवाला देकर प्रस्तावित की गई है, जिससे राज्य के 27 लाख से अधिक उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा।