12 करोड़ के ‘टेंडर घोटाले’ पर अपनों की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, आहत मंत्री बोले’आरोप सच निकले तो कर लूंगा सुसाइड’

5

 

​ देहरादून। प्रदेश के सियासी हलकों में कल उस समय माहौल गरमा गया जब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी बंद कमरों से निकलकर सीधा राजधानी देहरादून की सड़कों पर आ गई। कांग्रेस का मजबूत किला माने जाने वाले जौनसार-बावर (चकराता) क्षेत्र के लिए जारी विकास बजट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी बवंडर में तब्दील होता दिख रहा है।


​दरअसल कल रविवार को राजधानी देहरादून में यमुना कॉलोनी स्थित कैबिनेट मंत्री खजानदास के सरकारी आवास का भाजपा के ही दर्जनों वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने घेराव किया और मुख्य द्वार पर धरना देकर बैठ गए। इस अप्रत्याशित ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की अगुवाई कोई साधारण कार्यकर्ता नहीं, बल्कि विकासनगर से भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान की पत्नी और दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी मधु चौहान कर रही थीं। देखते ही देखते माहौल इतना गरमा गया कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और ’15-20% कमीशनखोरी’ के सार्वजनिक आरोपों से झुलसे कैबिनेट मंत्री खजानदास ने न सिर्फ मंत्री पद छोड़ने, बल्कि सार्वजनिक रूप से आत्महत्या (सुसाइड) करने तक की धमकी दे डाली।

​ क्या है विवाद का पूरा केंद्र?
​पूरे विवाद की जड़ समाज कल्याण विभाग द्वारा 11 सितंबर को जारी की गई जनजातीय उप-योजना (TSP/STC) और स्पेशल कॉम्पोनेंट प्लान (SCP) से जुड़ी करीब 12 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की सूची है। गौरतलब है कि TSP/STC (Tribal Sub-Plan) का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजाति (ST) बाहुल्य क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बजट आवंटित करना होता है। चूंकि चकराता एक जनजातीय बहुल क्षेत्र है, इसलिए यहाँ हर साल समाज कल्याण विभाग की ओर से विशेष बजट दिया जाता है।
​ कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्वीकृत योजनाओं में से 80 प्रतिशत कार्य विपक्षी दल कांग्रेस से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के समर्थकों को बांट दिए गए और वर्षों से पार्टी का झंडा उठाने वाले और दिन-रात मेहनत करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रस्तावों को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया।कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि विपक्ष के लोगों ने 15 से 20 प्रतिशत तक कमीशन देकर अपनी मनपसंद योजनाएं मंजूर करा ली हैं।

मधु चौहान का तीखा हमला
​रविवार दोपहर 12 बजे यमुना कॉलोनी में मंत्री आवास के बाहर वरिष्ठ भाजपा नेता मूरत राम शर्मा, प्रताप राव, गीताराम गौड़ और कमलेश भट्ट समेत भारी संख्या में कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। धरने को संबोधित करते हुए मधु चौहान ने सरकार और संगठन दोनों पर तीखे बाण चलाते हुए कहा कि “यह विरोध किसी एक दिन का गुस्सा नहीं है, बल्कि सालों से कार्यकर्ताओं के दिल में दबा हुआ आक्रोश है। जब पार्टी के कार्यक्रमों, रैलियों और अभियानों के लिए पसीना बहाने की बात आती है, तो कार्यकर्ताओं को आगे किया जाता है। लेकिन जब सरकारी योजनाओं और बजट आवंटन का समय आता है, तो उन्हें किनारे कर दिया जाता है। मंत्री को मंत्री और नेता को नेता बनाने वाले यही कार्यकर्ता हैं। कार्यकर्ता कब तक अपनी जेब से पेट्रोल फूंककर पार्टी का काम करते रहेंगे? अपनी ही सरकार में यदि निराशा मिलेगी तो सड़क पर उतरना हमारी मजबूरी बन जाता है।”

देहरादून की चकराता सीट दशकों से कांग्रेस का मजबूत किला रही है, जहाँ वर्तमान में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह विधायक हैं। चकराता में जिला पंचायत से लेकर ब्लॉक प्रमुख के पदों पर भी कांग्रेस का ही कब्जा है। मधु चौहान ने सवाल उठाया कि जहाँ पार्टी के पास एक भी स्थानीय राजनीतिक पद नहीं है, वहाँ यदि भाजपा सरकार का बजट भी कांग्रेसियों को बांटा जाएगा, तो कार्यकर्ता किस मुँह से जनता के बीच जाएंगे और किसके पास अपनी फरियाद लेकर जाएंगे?

​ ‘आरोप साबित हुए तो सुसाइड कर लूंगा’ — आहत मंत्री का आक्रामक पलटवार
​अपने ही घर के मुहाने पर पार्टी कार्यकर्ताओं के उग्र प्रदर्शन, नारेबाजी और भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों से कैबिनेट मंत्री खजानदास पूरी तरह स्तब्ध और आहत नजर आए।
​मीडिया के कैमरों के सामने आकर मंत्री खजानदास ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एक अत्यंत भावुक और तल्ख बयान देते हुए कहा कि “यदि मुझ पर लगाए गए 15-20 प्रतिशत कमीशनखोरी के आरोपों में 1% भी सच्चाई साबित होती है, तो मैं तुरंत प्रभाव से मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा और आत्महत्या (सुसाइड) कर लूंगा।”


केबिनेट मंत्री खजानदास ने कहा कि समाज कल्याण विभाग का दायित्व पूरे प्रदेश के 95 ब्लॉकों में बिना किसी भेदभाव के संतुलित विकास करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पेशल कॉम्पोनेंट प्लान (SCP) का पैसा पूरे राज्य में समान रूप से दिया गया है। चमोली और पौड़ी जिलों से समय पर प्रस्ताव न आने के कारण वहाँ बजट नहीं दिया जा सका, जबकि सबसे ज्यादा बजट चकराता को दिया गया है। कालसी को भी चकराता से कम बजट मिला है।
​मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि “राज्य में संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। चकराता के कुछ लोग चाहते हैं कि सिर्फ और सिर्फ उनकी बात सुनी जाए और पूरा बजट एक ही जगह दे दिया जाए, जो कि एक जिम्मेदार मंत्री के नाते संभव नहीं है।”

​धरने के दौरान मंत्री खजानदास ने गतिरोध समाप्त करने की कोशिश की। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि मधु चौहान अपने 3-4 प्रतिनिधियों को लेकर आएं और विभाग के सचिव की मौजूदगी में बंद कमरे में पूरी सूची की दोबारा समीक्षा कर ली जाए। लेकिन मधु चौहान और उग्र कार्यकर्ताओं ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उनकी मांग थी कि मंत्री खुद कार्यकर्ताओं के बीच बाहर आएं और सबके सामने विवादित सूची को निरस्त (कैंसल) करने का स्पष्ट ऐलान करें। कार्यकर्ताओं का कहना था कि इससे पहले वे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से भी मिले थे, लेकिन वहाँ से कोई ठोस या संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला। वार्ता बेनतीजा रहने के बाद नेताओं ने ऐलान किया कि अब चकराता के इस पूरे मामले और 12 करोड़ की विवादित सूची की शिकायत लेकर वे सीधे मुख्यमंत्री के दरबार में जाएंगे।विधानसभा चुनावों की उल्टी गिनती के बीच सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर का यह घमासान भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

अपने ही कैबिनेट मंत्री पर 15-20% कमीशनखोरी और विपक्षी कांग्रेसियों को फायदा पहुंचाने के आरोपों ने कांग्रेस को बैठे-बिठाए सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। राजधानी के हाई-प्रोफाइल यमुना कॉलोनी क्षेत्र में अपनी ही सरकार के खिलाफ लगे नारों और तीखे बयानों से संगठन बेहद असहज है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अब आंतरिक गुटबाजी को दबाने और ‘डैमेज कंट्रोल’ की कवायद में जुट गया है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री के साथ होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हैं—क्या सरकार इस 12 करोड़ की विवादित सूची को रद्द करके कार्यकर्ताओं को शांत करेगी, या फिर मंत्री खजानदास और चकराता के भाजपाइयों के बीच का यह सियासी युद्ध और भीषण रूप अख्तियार करेगा?