देहरादून। प्रदेश में जल्द मौसम करवट लेने जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रदेश में बारिश और बर्फबारी का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग की मानें तो कल से मौसम बिगड़ेगा। मौसम वैज्ञानिकों ने बारिश -बर्फबारी की चेतावनी दी है। दो दिन प्रदेशभर में मौसम शुष्क रहेगा। 16 से 19 जनवरी के बीच उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश होने की संभावना है। साथ ही 3400 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के भी आसार हैं। इस सीजन बारिश-बर्फबारी न होने से सूखी ठंड मैदान से लेकर पहाड़ तक खूब परेशान कर रही है।

देहरादून,ऊधमसिंह नगर व हरिद्वार समेत नैनीताल, चंपावत और पौड़ी में घना कोहरा छाए रहने का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों ने प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में दो दिन बाद मौसम बिगड़ने की संभावना जताई है। इसके चलते प्रदेशभर में दिन के अधिकतम तापमान में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। सूखी ठंड का ज्यादा असर मैदानी इलाकों में देखने को मिल रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में रात के न्यूनतम तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है।
उत्तराखंड में कड़ाके की ठंड और संभावित भारी बर्फबारी को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्री-मानसून और पोस्ट- मानसून के इस दौर में शीत लहर से निपटने के लिए मार्च तक की रणनीति तैयार की जा चुकी है। मैदानी इलाकों में कोहरा और पहाड़ों में पाला जनजीवन को प्रभावित कर रही है, ऐसे में सरकार ने सभी जिलों को विशेष निर्देश जारी किए हैं।


हिमालयी राज्य उत्तराखंड में शीत लहर का असर साफ दिखाई देने लगा है। ऊंचाई वाले इलाकों में पाले से जनजीवन प्रभावित हुआ है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में घना कोहरा और ठंड लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। मसूरी, औली, नैनीताल, कौसानी, चोपता, धनोल्टी, मुनस्यारी, चकराता, चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग के ऊंचाई वाले क्षेत्र स्नो डेस्टिनेशन के रूप में जाने जाते हैं। बावजूद इसके इन स्थानों पर भी सामान्य बर्फबारी नहीं देखने को मिली है।
इसके साथ ही केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में भी बर्फबारी का दौर जारी है। इन हालातों को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने मार्च तक की ठोस कार्ययोजना बनाई है। आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन के मुताबिक, पिछले एक महीने से लगातार तैयारियां की जा रही हैं और जिला प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय बना हुआ है सचिव आपदा का कहना है कि पिछले एक महीने से हम लगातार तैयारियां कर रहे हैं, एसीओ स्तर से लेकर सचिव और मुख्य सचिव स्तर तक बैठकों के माध्यम से सभी जिलों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं।









