पेंशन पर डाका; प्रधान ने अपनी ही मां को बना दिया ‘गरीब’, जांच रिपोर्ट पर उठ रहे सवाल

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देहरादून। राजधानी देहरादून के सहसपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत खुशहालपुर में सामने आए पेंशन फर्जीवाड़े का मामला लगातार गहराता जा रहा है। ताजा खुलासे में सामने आया है कि लाखों की संपत्ति खरीदने वाले तत्कालीन प्रधान ने कथित रूप से कम आय का प्रमाण पत्र बनवाकर अपनी ही माता के नाम पर पेंशन स्वीकृत करा दी। इस पूरे प्रकरण ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

17 लोगों पर मुकदमा, लेकिन जिम्मेदारों पर चुप्पी क्यों?
सहायक समाज कल्याण अधिकारी की तहरीर पर दस्तावेजों में हेराफेरी कर पेंशन लेने वाले 17 ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि पेंशन स्वीकृत कराने में भूमिका निभाने वाले पंचायत सचिव और प्रधान के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रधान की माता भी लाभार्थी सूची में शामिल
जांच में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है, उनमें तत्कालीन प्रधान की माताजी का नाम भी शामिल है। यह तथ्य सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है।

आय प्रमाण पत्र पर उठे सवाल
मामले में श्रीमती वारिशा के आय प्रमाण पत्र को लेकर भी गंभीर संदेह जताया जा रहा है। आरोप है कि उनके पति अफजाल अहमद द्वारा बनाए गए इस प्रमाण पत्र में पूरे परिवार की आय मात्र 4000 रुपये प्रतिमाह दर्शाई गई। यह प्रमाण पत्र पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार विकासनगर द्वारा 11 दिसंबर 2023 को जारी किया गया था।
विवाद इसलिए गहराया क्योंकि उसी अवधि में पूर्व प्रधान द्वारा 17–18 लाख रुपये की भूमि खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतनी कम आय में इतनी बड़ी संपत्ति कैसे खरीदी गई।

आवेदन में लगाए गए परिवार रजिस्टर को लेकर भी कई विसंगतियां सामने आई हैं। अफजाल अहमद ने दावा किया था कि उनके परिवार रजिस्टर की ऑनलाइन प्रति उपलब्ध नहीं है, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार यह 2017 से ही ऑनलाइन था। आशंका जताई जा रही है कि जन्मतिथि में बदलाव के उद्देश्य से इसे दोबारा ऑनलाइन कराया गया।
इसके अलावा आवेदन के साथ संलग्न हस्तलिखित परिवार रजिस्टर की प्रति भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि इसमें जन्मतिथि बदलकर आयु बढ़ाई गई और इस्तेमाल की गई मोहर व हस्ताक्षर भी फर्जी हो सकते हैं।
पुराने मुकदमे पर भी उठे सवाल
बताया जा रहा है कि अगस्त 2025 में पंचायत सचिव द्वारा इसी तरह की फर्जी मोहर और हस्ताक्षर के मामले में थाना सहसपुर में मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन इस पूरे प्रकरण को सार्वजनिक नहीं किया गया। वहीं, करीब 30 परिवार रजिस्टर की प्रतियां निरस्त की गईं, लेकिन इस संदिग्ध नकल को निरस्त क्यों नहीं किया गया—यह भी जांच का विषय बना हुआ है।

जांच अधूरी या जानबूझकर सीमित?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जांच को केवल आधार कार्ड में आयु परिवर्तन तक सीमित रखा गया है, जबकि आय प्रमाण पत्र और परिवार रजिस्टर जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में गड़बड़ी की गहन जांच नहीं की गई। एफआईआर में भी मुख्य रूप से आधार में बदलाव का ही जिक्र है।
बड़े सवाल
क्या जांच जानबूझकर सीमित रखी गई है?
क्या जिम्मेदार कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को बचाया जा रहा है?
क्या समाज कल्याण विभाग ने सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की है?
पेंशन जैसे संवेदनशील विषय में इस प्रकार की अनियमितताएं न केवल सरकारी योजनाओं की साख को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों के अधिकारों का भी हनन करती हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष और व्यापक कार्रवाई करता है या नहीं।

देहरादून। राजधानी देहरादून के सहसपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत खुशहालपुर में कूट रचित दस्तावेजों से पेंशन लेने वाले 17 लोगों के खिलाफ सहायक समाज कल्याण अधिकारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। ग्राम सभा खुशहालपुर में सामने आए कथित फर्जी पेंशन प्रकरण ने समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मामले में अब तक की कार्रवाई जहां अपात्र लाभार्थियों तक सीमित दिखाई देती है, वहीं शिकायतकर्ता ने पूरी प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।


क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, खुशहालपुर में आयोजित एक खुली बैठक के आधार पर वृद्धावस्था पेंशन के प्रस्ताव तैयार किए गए। आरोप है कि इन प्रस्तावों में अनियमितताएं करते हुए ऐसे व्यक्तियों को भी पेंशन का लाभ दिलाया गया, जिनकी आयु 60 वर्ष से कम थी।
मामले के सामने आने के बाद एक स्थानीय व्यक्ति ने प्रशासन से शिकायत की, जिस पर जिला समाज कल्याण अधिकारी ने सहायक समाज कल्याण अधिकारी, सहसपुर को जांच के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच के बाद अपात्र लाभार्थियों के खिलाफ थाना सहसपुर में कार्रवाई के लिए तहरीर दी गई है।


जांच पर उठे नए सवाल
मामले ने नया मोड़ तब लिया, जब शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया को ही सवालों के घेरे में ला दिया। निदेशक समाज कल्याण को भेजे गए पत्र में उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
पेंशन स्वीकृति के लिए फर्जी प्रस्ताव तैयार किए गए, जिनमें ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की भूमिका संदिग्ध बताई गई है।

26 जुलाई 2024 की बैठक में ‘शाहजहां’ नाम का प्रस्ताव पारित नहीं हुआ, फिर भी उनके नाम की सत्यापित प्रति जारी कर दी गई।
एक आधिकारिक प्रति में केवल दो नाम दर्ज हैं, जबकि दूसरी प्रति में 19 नाम जोड़े जाने का आरोप है।
दस्तावेजों में बाद में बदलाव (कूट रचना) किए जाने की आशंका जताई गई है।

जिम्मेदारी तय करने की मांग
शिकायतकर्ता का कहना है कि पेंशन आवेदन को अग्रसारित करने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की होती है। ऐसे में यदि अपात्र व्यक्तियों को लाभ मिला है, तो यह केवल लाभार्थियों की गलती नहीं हो सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि 2025 के पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए वोटरों को प्रभावित करने के लिए पेंशन स्वीकृत की गईं, और इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की अनदेखी की जा रही है।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल
फिलहाल की कार्रवाई में केवल पेंशन लेने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कदम उठाए जाने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या जांच अधूरी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें सत्यापित करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों की जांच और जवाबदेही तय करना भी आवश्यक है।

यह मामला अब व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि दस्तावेज़ों में हेरफेर और नियमों के दुरुपयोग का गंभीर मामला बन सकता है। स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या विभाग इस मामले में सभी पक्षों की भूमिका की जांच करेगा या कार्रवाई सीमित दायरे में ही रह जाएगी।

सहायक समाज कल्याण अधिकारी की तहरीर पर इन  ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

मुस्तफा
साबरी पत्नी शमशाद अली
जमील
नूरजहां पत्नी गुलजार
वरीशा पत्नी अफजाल
इकरार कुरैशी
नसरीन पत्नी अनवर
शाहजहां पत्नी असलम
हुस्न बानो पत्नी इनाम
अनीस
परवीन पत्नी अनीस
खातून पत्नी नूरहसन
रशीदा पत्नी मुस्तकीम
नूरजहां पत्नी मासूम
शहीना पत्नी मकसूद सभी निवासीगण खुशहालपुर

 

देहरादून के विकासनगर क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पछवादून में सहसपुर थाना क्षेत्र के खुशहालपुर गांव में 17 ग्रामीणों पर आरोप है कि उन्होंने अपने आधार कार्ड में उम्र बढ़ाकर खुद को वृद्धावस्था पेंशन के योग्य दिखाया और वर्षों तक सरकारी धन का लाभ उठाते रहे।

 

कहां और कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
यह पूरा मामला विकासनगर के सहसपुर क्षेत्र स्थित खुशहालपुर गांव का है। जांच में सामने आया कि आरोपितों ने योजनाबद्ध तरीके से अपने आधार कार्ड में वास्तविक उम्र से अधिक उम्र दर्ज करवाई, जिससे वे वृद्धावस्था पेंशन योजना के पात्र बन सके। समाज कल्याण विभाग को मिली एक गोपनीय शिकायत के बाद जब भौतिक सत्यापन कराया गया, तो हकीकत सामने आ गई। घर-घर जाकर की गई जांच में उम्र से जुड़ी विसंगतियां पाई गईं। इसके बाद सहायक समाज कल्याण अधिकारी ने पुलिस को तहरीर दी, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया।

धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज़ और सरकारी धन हड़पने के आरोप
पुलिस ने सभी 17 आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि कहीं इस फर्जीवाड़े के पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो नहीं है। यह कार्रवाई राज्यभर में चल रहे पेंशन सत्यापन अभियान के तहत की गई है, जिसके अंतर्गत 15 जून 2026 तक सभी लाभार्थियों का घर-घर जाकर सत्यापन किया जा रहा है। सरकार का मकसद है कि केवल पात्र लोगों को ही योजनाओं का लाभ मिले।

प्रशासन का कड़ा संदेश: “फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं”
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी योजनाओं में किसी भी तरह की धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई होगी। इस घटना के बाद अन्य लाभार्थियों में भी हड़कंप मच गया है और कई जगह स्वेच्छा से दस्तावेज़ों की जांच करवाई जा रही है।

बड़ा सवाल: सिस्टम में सेंध या लोगों की चालाकी?
यह मामला न केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी को उजागर करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि कहीं न कहीं विभागीय सिस्टम में ऐसी खामियां हैं, जिनका फायदा उठाया जा रहा है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की तह तक कैसे पहुंचती हैं।

अस्तित्व टाइम्स का भी प्रयास रहेगा कि इस पूरे प्रकरण की तह तक पहुंच कर पूरे मामले का खुलासा किया जाए।