Video; भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को उठाकर दिल्ली पुलिस ने अस्पताल में कराया भर्ती

Astitva Times Desk
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नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षा सुधार के पक्षधर सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आंदोलन शनिवार को उस समय नए मोड़ पर पहुंच गया, जब दिल्ली पुलिस ने बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बीच उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस कार्रवाई के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, जबकि समर्थकों ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हस्तक्षेप बताया है।

सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे थे। उनका कहना था कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों पर सरकार प्रभावी कार्रवाई करे और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और नागरिक उनसे जुड़ते रहे। करीब तीन सप्ताह से जारी उपवास के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती रही। चिकित्सकों ने लंबे समय से भोजन नहीं करने के कारण शरीर में कमजोरी और डिहाइड्रेशन की स्थिति बताई थी। स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्टों के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने भी प्रशासन को उनके स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए थे।

 

शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम जंतर-मंतर पहुंची और चिकित्सकों की सलाह के आधार पर सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि यह कदम उनकी जान बचाने और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया।अस्पताल प्रशासन के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन उन्हें निरंतर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

दूसरी ओर, सोनम वांगचुक के परिवार और समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनकी पत्नी गीतांजलि अंग्मो ने कहा कि उनकी सहमति के बिना कोई चिकित्सकीय हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। समर्थकों का आरोप है कि वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल ले जाया गया, जबकि पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई चिकित्सकीय सलाह और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की गई।


वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और प्रदर्शनकारियों को हटाया गया। इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक विरोध की आवाज दबाने का प्रयास बताया। वहीं सरकार और प्रशासन का कहना है कि किसी भी आंदोलनकारी के जीवन की रक्षा करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल सोनम वांगचुक अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं, जबकि उनके समर्थकों का कहना है कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है और आगे की रणनीति जल्द घोषित की जाएगी।

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