SIR में 95 हजार मतदाताओं के नाम पर ऑटो-जनरेट हुए Form-7

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1.73 लाख Form-7 में आधे से अधिक ‘इनएलिजिबल’; चार जिलों से आए 85 प्रतिशत से ज्यादा आवेदन, 3 अक्टूबर को सामने आएगी अंतिम तस्वीर

देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर Form-7 के आंकड़ों ने नई बहस छेड़ दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार SIR के दौरान अब तक करीब 1.73 लाख Form-7 आवेदन सामने आए हैं। इनमें 95 हजार से अधिक मतदाताओं को ‘इनएलिजिबल’ यानी अपात्र चिह्नित किया गया है। खास बात यह है कि इन मामलों में संबंधित मतदाता ने जरूरी तौर पर स्वयं Form-7 दाखिल नहीं किया था। निर्वाचन अधिकारी द्वारा सिस्टम में ‘इनएलिजिबल’ दर्ज किए जाने के बाद Form-7 ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से स्वतः जनरेट हुआ।


95 हजार मामलों में क्या हुआ?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार ये सभी मामले ऐसे मतदाताओं से संबंधित हैं जिनके नाम SIR की प्रक्रिया में ‘logical discrepancy’ के मामलों में आए थे। सुनवाई के दौरान यदि संबंधित मतदाता आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाया अथवा स्वयं या परिवार के किसी सदस्य के माध्यम से सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ, तो ERO/AERO ने उसे ECI-Net पर ‘इनएलिजिबल’ चिह्नित किया। इसके बाद सिस्टम ने Form-7 स्वतः generate कर नाम को मतदाता सूची से हटाने के लिए mark किया।
यानी 95 हजार लोगों ने स्वयं Form-7 भरकर अपना नाम हटाने का अनुरोध किया था—यह कहना सही नहीं होगा। उपलब्ध सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक Form-7 का ऑटो-जनरेशन अधिकारी द्वारा ‘इनएलिजिबल’ दर्ज किए जाने के बाद हुआ।
चार जिलों से आए 85 प्रतिशत से अधिक Form-7
इस पूरे मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू Form-7 के भौगोलिक वितरण से जुड़ा है। 14 जुलाई से 13 अगस्त के बीच प्राप्त 1,30,382 Form-7 आवेदनों में से 85 प्रतिशत से अधिक केवल चार जिलों—ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून और नैनीताल—से आए थे।
जिला
Form-7 आवेदन
ऊधम सिंह नगर
43,878
हरिद्वार
29,369
देहरादून
19,402
नैनीताल
18,301
चार जिलों का कुल
1,10,950
इन चार जिलों के 1,10,950 आवेदन, उस समय प्राप्त कुल 1,30,382 Form-7 का लगभग 85.1 प्रतिशत हैं। शेष जिलों में संख्या काफी कम रही। मसलन, पौड़ी गढ़वाल में 5,424, पिथौरागढ़ में 3,044, अल्मोड़ा में 2,999, उत्तरकाशी में 2,109, चम्पावत में 1,723, चमोली में 1,702, टिहरी गढ़वाल में 1,431, बागेश्वर में 618 और रुद्रप्रयाग में 382 Form-7 आवेदन दर्ज हुए थे।
हालांकि इन आंकड़ों को 95 हजार ऑटो-जनरेटेड Form-7 का जिला-वार ब्योरा नहीं माना जाना चाहिए। ये पहले चरण में प्राप्त कुल Form-7 आवेदनों के जिलेवार आंकड़े हैं। 95 हजार ‘इनएलिजिबल’ मामलों का अलग-अलग जिले और विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से आधिकारिक विस्तृत आंकड़ा अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
आंकड़ों ने क्यों बढ़ाई चिंता?
Form-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने के लिए किया जाता है। SIR के दौरान चार जिलों में Form-7 की असामान्य रूप से बड़ी संख्या सामने आने से राजनीतिक दलों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने Form-7 के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल तथा कुछ मामलों में अधिकारी के नाम से दर्ज आवेदनों को लेकर आपत्तियां उठाई हैं।
वहीं निर्वाचन विभाग का कहना है कि SIR निर्धारित नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है तथा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ विधानसभा, जिला और राज्य स्तर पर प्रक्रिया से संबंधित जानकारी साझा की जा रही है।


‘Logical discrepancy’ का मतलब क्या है?
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार SIR के दौरान सॉफ्टवेयर से कुछ मतदाताओं के रिकॉर्ड में तार्किक विसंगतियां चिन्हित हुई थीं। इनमें नामों में अंतर, परिवार के सदस्यों की उम्र से जुड़ी विसंगतियां अथवा परिवार संबंधी रिकॉर्ड में अंतर जैसे मामले शामिल हो सकते हैं। ऐसी विसंगति अपने आप में किसी व्यक्ति को अपात्र साबित नहीं करती; संबंधित व्यक्ति को सुनवाई में अपना पक्ष और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया।
यदि अधिकारी दस्तावेजों और सुनवाई से संतुष्ट होता है तो मतदाता का रिकॉर्ड बरकरार रह सकता है। इसके विपरीत, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न कराने अथवा सुनवाई में उपस्थित न होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी ‘इनएलिजिबल’ दर्ज कर सकता है और उसके बाद Form-7 स्वतः जनरेट होकर नाम विलोपन की प्रक्रिया में चला जाता है।

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि 95 हजार नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हट चुके हैं। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया 28 सितंबर 2026 तक जारी है और अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होनी है।
निर्वाचन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ‘इनएलिजिबल’ श्रेणी में रखे गए लोगों के लिए मतदाता सूची में शामिल होने का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद निर्धारित दस्तावेजों के साथ Form-6 के माध्यम से नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल इस पूरे प्रकरण में फिलहाल तीन आंकड़े सबसे महत्वपूर्ण हैं—करीब 1.73 लाख कुल Form-7 आवेदन, 95 हजार से अधिक ‘इनएलिजिबल’ मामले और 3 अक्टूबर को आने वाली अंतिम मतदाता सूची।

साथ ही चार जिलों—ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून और नैनीताल—से शुरुआती चरण में 1,30,382 में से 1,10,950 यानी 85 प्रतिशत से अधिक Form-7 आवेदन आना भी जांच और विश्लेषण का महत्वपूर्ण विषय है। हालांकि केवल इस आंकड़े के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी जिले में गलत तरीके से नाम हटाए गए। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने भी इस तरह के वितरण से सीधे कोई निष्कर्ष निकालने के प्रति सावधानी बरती थी। अब निगाह 3 अक्टूबर पर है। अंतिम सूची सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि 95 हजार ‘इनएलिजिबल’ मामलों में वास्तव में कितने नाम मतदाता सूची से बाहर हुए, कितने दावे-आपत्तियों के बाद बहाल हुए और कितने लोगों ने Form-6 के जरिए फिर से नाम दर्ज कराया। यही आंकड़े SIR की इस पूरी प्रक्रिया के वास्तविक असर की सबसे स्पष्ट तस्वीर देंगे।