तीन इंस्टीट्यूट पर कार्रवाई की आंच, 6208 छात्रवृत्ति दावों की जांच में बड़ा खुलासा, 2895 फर्जी क्लेम पाए गए; करोड़ों रुपये की सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप
देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित SC/ST छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13.83 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई फर्जी छात्रवृत्ति दावों के जरिए सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई है। जांच के दायरे में रुड़की स्थित मदरहुड इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, हरिद्वार का RIMS संस्थान तथा मेरठ का महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
ED ने यह जांच उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। मामला वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रों के लिए संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।जांच में सामने आया कि उक्त निजी शिक्षण संस्थानों ने कथित रूप से अपात्र और फर्जी छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति का दावा कर सरकारी धन प्राप्त किया। हरिद्वार जिला समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय से इन संस्थानों से जुड़े कुल 6208 छात्रवृत्ति दावों का निस्तारण किया गया था। इन दावों के आधार पर लगभग 27.98 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि जारी की गई। इसमें से 19.74 करोड़ रुपये संस्थानों के खातों में तथा 8.24 करोड़ रुपये छात्रों के नाम पर खोले गए बैंक खातों में भेजे गए।
2895 फर्जी क्लेम, सरकार को 13.83 करोड़ का नुकसान
ED के अनुसार रिकॉर्ड के सत्यापन में 6208 में से 2895 छात्रवृत्ति दावे फर्जी पाए गए। इन फर्जी दावों के कारण सरकारी खजाने को करीब 13.83 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जांच एजेंसी का दावा है कि कई छात्रों का दाखिला केवल दस्तावेजों में दर्शाया गया था। कई छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हुए, कुछ का रिकॉर्ड विश्वविद्यालयों में उपलब्ध नहीं मिला, जबकि कई छात्र मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों में पंजीकृत ही नहीं पाए गए। जांच में दस्तावेजों और अभिलेखों में गंभीर विसंगतियां उजागर हुई हैं।छात्रों के बैंक खातों से संस्थानों तक पहुंचती थी राशि
ED की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ छात्रों के बैंक खाते संस्थान प्रबंधन के नियंत्रण में संचालित किए जा रहे थे। छात्रवृत्ति की राशि खातों में जमा होने के बाद उसे संस्थानों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या नकद निकाल लिया जाता था। एजेंसी इस वित्तीय नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। कुर्क की गई संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), भूमि और हरिद्वार -रुड़की क्षेत्र में स्थित शैक्षणिक संस्थानों की इमारतें शामिल हैं। ED का मानना है कि ये संपत्तियां कथित तौर पर घोटाले से अर्जित धन से जुड़ी हुई हैं। प्रवर्तन निदेशालय वर्ष 2020 से इस मामले की जांच कर रहा है। अब तक एजेंसी PMLA कोर्ट, देहरादून में पांच अभियोजन शिकायतें (चार्जशीट) दाखिल कर चुकी है। यह इस मामले में एजेंसी का छठा प्रॉपर्टी अटैचमेंट आदेश है।
ED ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और घोटाले से जुड़े अन्य व्यक्तियों, संस्थानों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसी के अनुसार आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे तथा कार्रवाई सामने आ सकती है।










