उत्तराखंड में SIR की तैयारी: वोटर लिस्ट में संशोधन शुरू ऑनलाइन हुई 2003-2025 की मतदाता सूची 

67

 

उत्तराखंड में SIR से पहले 2003-2025 की मतदाता सूची राज्य की वेबसाईट पर की गई सार्वजनिक, समान नामों को चिह्नित किया जाएगा

देहरादून। भारत निर्वाचन आयोग की ओर से उत्तराखंड में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तारीख घोषित करने के पहले ही प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी है। निवार्चन आयोग के राज्य के पोर्टल पर 2025 व 2003 दोनों वर्षों की वोटर लिस्ट का लिंक दे दिया गया है, जिससे मौजूदा मतदाता अपना व अपने परिजनों के नाम 2003 व 2025 की मतदाता सूची में देख सकें। राज्य के लिहाज से यह बेहद संवेदनशील विषय है। प्रदेश में जनसंख्या बदलाव लगातार राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। प्रदेश में 2006 में परिसीमन लागू होने के बाद विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक बदलाव हुआ था। जिसके कारण मतदाता सूची में नामों के एक से अधिक स्थानों पर होने, फर्जी नामों की मौजूदगी सहित गड़बड़ियों की आशंका है। प्रदेश में नए जिले व नए विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सूची की मैपिंग कठिन चुनौती है।

भारत निर्वाचन आयोग के उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम का कहना है कि ‘प्रदेश में वोटर लिस्ट में संशोधन करने का काम शुरू हो गया है। अभी वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट से तुलनात्मक अध्ययन शुरू किया जा रहा है। इससे जब SIR शुरू होगी तो मतदाता सूची को सही करने में आसानी होगी।’

दरअसल प्रदेश निर्वाचन कार्यालय अगले साल फरवरी या उसके बाद शुरू होने वाले एसआईआर के पहले व्यापक होमवर्क कर लेना चाहता है। राजनीतिक दल आरोप लगाते है कि प्रदेश के कुछ क्षेत्रों की जनसंख्या में पिछले वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। स्थायी निवास के फर्जी प्रमाण पत्रों के पकड़े जाने पर मुख्यमंत्री ने पिछले तीन साल में बने स्थायी निवास प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश भी दे दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के नेता हरीश रावत ने स्थायी निवास प्रमाण की जांच 2018 या 2012 से कराने की मांग की है। साफ है कि एसआईआर के दौरान स्थायी निवास मुद्दा तूल पकड़ेगा।

मतदाताओं का नाम अलग किया जा रहा है दूसरी ओर निर्वाचन आयोग की राज्य की मशीनरी की निगाह एसआईआर की चुनौतियों पर है। 2003 व 2025 की मतदाता सूची में समान नामों को चिह्नित कर अलग किया जा रहा है। जिनके परिवार के सदस्यों के नाम 2003 में बदले है उनको सूची में अपना नाम देख कर संशोधन का मौका दिया जा रहा है। ताकि भविष्य में होने वाले विवाद से बचा जा सके। जिन मतदाताओं के नाम 2003 की सूची में है उनके बच्चो के नाम का वेरिफिकेशन में ज्यादा मुश्किल नही होगी। सत्यापन के समय मतदाताओं से दस्तावेज लेने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। मोटे तौर पर एसआईआर से पहले 50 ये 60 प्रतिशत काम पूरा हो जाएगा।