देहरादून। राजधानी देहरादून के विकासनगर बाडवाला में अवैध खनन रोकने गए वन विभाग के अधिकारी के साथ कथित बदसलूकी और बाद में उन्हीं पर मुकदमा दर्ज किए जाने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए विकासनगर कोतवाली के पूरे स्टाफ को बदलने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार वन विभाग के उप प्रभागीय अधिकारी (एसडीओ) राजीव नयन नौटियाल बाडवाला क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायत पर कार्रवाई करने पहुंचे थे। इस दौरान खनन से जुड़े कुछ लोगों द्वारा उनके साथ कथित रूप से अभद्रता और मारपीट की घटना सामने आई। घटना के बाद दर्ज हुई पुलिस कार्रवाई में उल्टा वन अधिकारी के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जिस पर विवाद खड़ा हो गया।
मामला जब न्यायालय पहुंचा तो सुनवाई के दौरान घटना से जुड़े वीडियो और अन्य तथ्यों को अदालत के समक्ष रखा गया। इन सामग्रियों को देखने के बाद न्यायालय ने राज्य सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि राज्य अपने ही अधिकारियों को सुरक्षा प्रदान नहीं कर पा रहा है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।हाईकोर्ट ने इस मामले में महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए पुलिस महानिदेशक को विकासनगर कोतवाली के पूरे स्टाफ को तत्काल प्रभाव से बदलने के लिए कहा है। इसके साथ ही वन अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने वाले संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, इसलिए वन विभाग के अधिकारी की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगाई जाती है। इस मामले ने अवैध खनन और उससे जुड़े प्रभावशाली नेटवर्क पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत की सख्ती के बाद अब प्रशासन और पुलिस महकमे में संभावित बदलावों पर नजर बनी हुई है। फिलहाल राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय द्वारा न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन की प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है। मामले की अगली सुनवाई में जांच और कार्रवाई की प्रगति पर भी अदालत की नजर रहेगी।










