पंचायत चुनाव टालने को राष्ट्रपति, गवर्नर एवं हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी SDC फाउंडेशन

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जून में प्राकृतिक आपदाओं व सड़क दुर्घटनाओं में पिछले वर्ष की तुलना में 100% बढ़ोतरी से साफ दिख रहा उत्तराखंड में बढ़ता खतरा, मानसून संकट के बीच सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन ने पंचायत चुनावों को कुछ माह के लिए टालने की मांग की

देहरादून। सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन ने राज्य में आ रही आपदाओं और लगातार चल रही बारिश से हो रहे नुकसान को देखते हुए प्रदेश सरकार एवं राज्य निर्वाचन आयोग से पंचायत चुनाव टालने की मांग की है। फाउंडेशन के अनूप नौटियाल ने कहा कि आज समाप्त हो रहे जून के इस महीने ने उत्तराखंड की एक बेहद चिंताजनक और गंभीर तस्वीर उजागर की है। सरकारी आंकड़ों के आधार पर उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में जून 2024 में जहां प्राकृतिक आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं से कुल 32 मौतें दर्ज हुई थीं, वहीं इस वर्ष जून में अब तक ऐसी 65 मौतें हो चुकी हैं जो कि 100% की भयावह वृद्धि है। इनमें 20 मौतें प्राकृतिक आपदाओं व 45 सड़क दुर्घटनाओं से हुई हैं।

आपदा और रोड एक्सीडेंट के कारण इस बढ़ती मृत्यु दर के साथ चारधाम यात्रा में भी जून में तीर्थयात्रियों की संख्या में 29% की बढ़ोतरी देखी गई है। एक जून से 28 जून 2025 के बीच 18, 22, 434 श्रद्धालु चार धाम पहुंचे, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 14,10,860 की तुलना में 4,11,574 अधिक है। जून महीने में रुद्रप्रयाग में बस हादसा, उत्तरकाशी में बादल फटने की घटना और कई अन्य सड़क दुर्घटनाएं घटीं। इन आंकड़ों में 15 जून को केदारनाथ में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में मारे गए सात तीर्थयात्रियों और पायलट की मौतें शामिल नहीं हैं।

अनूप नौटियाल ने कहा की यह बेहद चिंताजनक है कि उत्तराखंड सरकार हर आपदा को अलग-थलग घटना मानकर देख रही है जबकि राज्य में बढ़ती दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों के बढ़ते, खतरनाक पैटर्न को समझने की ज़रूरत है।

इस संदर्भ में उन्होंने उत्तराखंड सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से मांग की है कि 24 व 28 जुलाई 2025 को प्रस्तावित पंचायत चुनावों को स्थगित करे। बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं, सड़क हादसों और पहले से ही सीमित प्रशासनिक संसाधनों के बीच चुनाव कराना जन सुरक्षा के लिहाज से गंभीर जोखिम खड़ा करेगा।

उन्होंने जुलाई में ही होने वाले कांवड़ मेले मे अनुमानित सात करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन से प्रशासनिक दबाव की भी बात कही। नौटियाल ने कहा की इन सभी कारणों से पंचायत चुनाव मानसून के बाद सितंबर या अक्टूबर 2025 में कराए जाएं ताकि जनता की सुरक्षा सर्वोपरि रहे। राजनीति और चुनाव कभी भी जनजीवन से ऊपर नहीं होने चाहिए, खासकर उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य मे। उन्होंने कहा कि वो जल्द राष्ट्रपति, राज्यपाल और नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय के समक्ष भी इस मांग को रखेंगे।

देखें, अनूप नौटियाल द्वारा पिछले सप्ताह चुनाव टालने की मांग वाला वीडियो

देहरादून। उत्तराखंड में पंचायत चुनावों की घोषणा हो चुकी है। जुलाई महीने में लगभग 48 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। वरिष्ठ समाजसेवी अनूप नौटियाल ने पंचायत चुनाव के लिए तैयार की जा रही मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि इसी वर्ष जनवरी में राज्य चुनाव आयोग ने शहरी निकाय चुनाव संपन्न कराए थे, जिनमें करीब 30 लाख वोटर वोटिंग लिस्ट में दर्ज थे। उस दौरान राज्यभर से हजारों शिकायतें आई थीं कि लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब थे।

उन्होंने कहा कि इसी कारण से मुझे आशंका है कि पंचायत चुनाव में भी ऐसी भारी गड़बड़ियां दोहराई जा सकती हैं और बड़ी संख्या में ग्रामीण मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से नदारद हो सकते हैं। यह आशंका इस बात से भी और मजबूत होती है कि पिछले साल अप्रैल 2024 में हुए लोकसभा चुनावों में उत्तराखंड में 84 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता थे, जबकि शहरी निकाय और अब पंचायत चुनावों में कुल मतदाता संख्या लगभग 78 लाख के आसपास ही सीमित रह गई है।

नौटियाल ने कहा कि राज्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली शहरी निकाय चुनावों में पहले ही अविश्वसनीय और लचर साबित हो चुकी है। हमारा स्पष्ट आग्रह है कि इतनी बड़ी और दोहराई जाने वाली चूक दोबारा न हो। हर मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में होना लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है। चुनाव आयोग को कम से कम इस बार जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम करना होगा।