प्रधानमंत्री करेंगे 6200 करोड़ रुपए की रिस्पना- बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना का शिलान्यास

Astitva Times Desk
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एलिवेटेड रोड परियोजना से ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत या बढ़ेंगी पर्यावरणीय चुनौतियां

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से प्रस्तावित ₹6200 करोड़ की रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना का शिलान्यास 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। जहां एक ओर इस परियोजना को शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर विरोध के स्वर भी तेज होते जा रहे हैं।

करीब 26 किलोमीटर लंबी यह फोरलेन एलिवेटेड रोड रिस्पना और बिंदाल नदियों के किनारे विकसित की जाएगी। परियोजना के पूरा होने के बाद शहर के भीतर यातायात दबाव कम होने और यात्रा समय में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही, मसूरी और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की भी संभावना है।

हालांकि, इस परियोजना को लेकर वरिष्ठ समाजसेवी अनूप नौटियाल समेत कई सामाजिक संगठनों ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका कहना है कि नदी किनारे बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। विरोध करने वाले संगठनों के अनुसार, इस परियोजना के चलते नदी किनारे बसे कई हजार परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनके सामने आजीविका और पुनर्वास की बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी।

 

इसके अलावा परियोजना के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की आशंका भी जताई जा रही है, जो शहर के पर्यावरण और हरित क्षेत्र के लिए नुकसानदायक हो सकती है। पर्यावरणविदों का मानना है कि इससे न केवल जैव विविधता प्रभावित होगी, बल्कि बाढ़ के जोखिम में भी इजाफा हो सकता है।

वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि परियोजना को सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए लागू किया जाएगा। सरकार इसे देहरादून के भविष्य के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बता रही है।ऐसे में एक ओर जहां यह परियोजना शहर को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने की उम्मीद जगाती है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण और सामाजिक प्रभावों को लेकर उठ रहे सवाल इसके क्रियान्वयन को चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। आने वाले दिनों में इस परियोजना पर बहस और तेज होने की संभावना है।

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