बदले पैटर्न और कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुई UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2026

Astitva Times Desk
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दून के 32 केंद्रों पर दो पालियों में हुई परीक्षा, विश्लेषणात्मक प्रश्नों ने बढ़ाई अभ्यर्थियों की चुनौती

देहरादून। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 रविवार को दून जिले के 32 परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। परीक्षा दो पालियों में आयोजित की गई। पहली पाली में कुल 12,544 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 7,841 अभ्यर्थी शामिल हुए, जबकि दूसरी पाली में 7,692 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी।

परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सभी केंद्रों पर जैमर और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। अभ्यर्थियों को फेस ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिया गया। परीक्षा की निगरानी के लिए प्रशासन की ओर से आठ जोनल मजिस्ट्रेट, 16 सेक्टर मजिस्ट्रेट और दो ऑब्जर्वर तैनात किए गए थे। नोडल अधिकारी एवं एडीएम केके मिश्रा ने बताया कि परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई।

इस बार परीक्षा अपने बदले हुए पैटर्न को लेकर भी चर्चा में रही। विशेषज्ञों और अभ्यर्थियों के अनुसार प्रश्नपत्र में पारंपरिक तथ्यात्मक प्रश्नों की तुलना में विश्लेषणात्मक और परिस्थिति आधारित प्रश्न अधिक पूछे गए। इतिहास, भूगोल, राजनीति, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और पर्यावरण जैसे विषयों से जुड़े प्रश्नों में अभ्यर्थियों की समझ, तार्किक क्षमता और प्रशासनिक दृष्टिकोण को परखा गया।

फोटो; आर. ए.खान. डायरेक्टर

प्रयाग IAS अकादमी  देहरादून

प्रयाग आईएएस अकादमी के निदेशक आर. ए. खान के अनुसार इस बार प्रश्नों का स्वरूप मुख्य परीक्षा के जीएस पेपर-4 यानी एथिक्स से काफी प्रभावित दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि कई प्रश्न ऐसे थे जिनमें अभ्यर्थियों को प्रशासनिक भूमिका में खुद को रखकर निर्णय लेने की सोच प्रदर्शित करनी थी। आयोग अब केवल तथ्यों को याद रखने के बजाय व्यावहारिक समझ और निर्णय क्षमता को प्राथमिकता देता नजर आया। उन्होंने बताया कि प्रश्नपत्र में शासन व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रिया और निर्णय क्षमता से जुड़े विश्लेषणात्मक प्रश्नों की संख्या अधिक रही, जबकि राज्यव्यवस्था (Polity) से सीधे प्रश्न अपेक्षाकृत कम पूछे गए। इतिहास में विशेष रूप से प्राचीन भारत, कला एवं संस्कृति को महत्व दिया गया, जबकि मध्यकालीन इतिहास से कम प्रश्न पूछे गए। विज्ञान- प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रश्नों ने भी अभ्यर्थियों को उलझाए रखा।

विषयवार प्रश्नों का स्वरूप इस प्रकार रहा—
राज्यव्यवस्था : 7 प्रश्न
इतिहास एवं कला-संस्कृति : 20 प्रश्न (प्राचीन 15, आधुनिक 5)
भूगोल एवं पर्यावरण : 20 प्रश्न
अर्थव्यवस्था : 14 प्रश्न
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी : 15 प्रश्न
करेंट अफेयर्स : 12 प्रश्न
एथिक्स : 4 प्रश्न
सामान्य ज्ञान : 7 प्रश्न
आंतरिक सुरक्षा : 1 प्रश्न
आर. ए. खान के अनुसार प्रश्नों की जटिलता को देखते हुए 38 से 40 सही प्रश्न अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित स्थिति माने जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार सीसैट का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में संतुलित रहा, जिसका सकारात्मक असर हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के परिणाम पर देखने को मिल सकता है।

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