भाजपा ने 15 विभागों में की संयोजक-सह संयोजकों की घोषणा

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देहरादून। आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों को निर्णायक मोड़ देते हुए भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की सहमति से पार्टी ने प्रदेश के 15 प्रमुख विभागों में संयोजक एवं सह-संयोजकों की नियुक्ति कर नई टीम की घोषणा कर दी है। प्रदेश महामंत्री एवं कार्यालय प्रभारी कुन्दन परिहार की ओर से जारी आदेश के साथ ही सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।


भाजपा ने चुनावी तैयारियों को बूथ स्तर तक मजबूत करने, संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा चुनाव प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह नियुक्तियां की हैं। पार्टी का मानना है कि नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद विभागीय गतिविधियों में तेजी आएगी और चुनावी रणनीति को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।

जारी सूची के अनुसार सुशासन विभाग की जिम्मेदारी केदार जोशी को सौंपी गई है, जबकि पॉलिसी रिसर्च विभाग का संयोजक बिनेश गुप्ता और मीडिया संपर्क विभाग का संयोजक हरीश बगोली बनाए गए हैं। प्रशिक्षण विभाग की कमान कुन्दन परिहार, राजनीतिक सुझाव एवं संवाद विभाग की जिम्मेदारी ज्योति प्रसाद गैरोला तथा राष्ट्रीय कार्यक्रम एवं बैठक विभाग का संयोजन दीप्ति रावत को दिया गया है।


इसी प्रकार पुस्तकालय एवं दस्तावेज विभाग के संयोजक भजराम पंवार, सहयोग एवं आपदा राहत सेवाएं विभाग के अनुप सेमवाल, अध्यक्ष कार्यालय, प्रवास एवं कार्यक्रम विभाग के नलिन भट्ट, प्रचार साहित्य विभाग के जगमोहन सिंह रावत, चुनाव प्रबंधन विभाग के विजय रछेला, चुनाव आयोग विभाग के अनिल गोयल, कानूनी मामले विभाग के संजय गुप्ता, पत्रिका एवं प्रशासन विभाग के सत्यवीर सिंह चौहान तथा विदेशी मामले विभाग के वरुण भंडारी को संयोजक बनाया गया है। प्रत्येक विभाग में चार से पांच सह-संयोजकों की भी नियुक्ति की गई है, जिन्हें अलग-अलग क्षेत्रों और दायित्वों के अनुसार जिम्मेदारी सौंपी गई है।

भाजपा प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के प्रत्येक विभाग को सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाना पार्टी की प्राथमिकता है। नई टीम संगठन के कार्यक्रमों, प्रशिक्षण, मीडिया समन्वय, चुनाव प्रबंधन, कानूनी मामलों, आपदा राहत, प्रचार सामग्री और राजनीतिक संवाद जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करेगी। पार्टी का मानना है कि यह नई टीम चुनावी तैयारियों को गति देने के साथ-साथ संगठन की पकड़ को बूथ स्तर तक और मजबूत करेगी।