राजधानी के अर्बन को ऑपरेटिव बैंक पर RBI का प्रतिबन्ध, हजारों खाताधारको के करोड़ों रुपए फंसे 

Astitva Times Desk
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सूत्रों के अनुसार नगर निगम देहरादून के भी करोड़ों रुपए बैंक में जमा हैं। इससे नगर निगम के विकास कार्यों, ठेकेदारों के भुगतान और स्थानीय कारोबार पर असर पड़ सकता है

देहरादून। राजधानी देहरादून का सहकारी बैंक देहरादून अर्बन को- ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड गहरे वित्तीय संकट में फंस गया है। वर्षों से घाटे में चल रहे बैंक की वास्तविक स्थिति अब सामने आने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक पर छह महीने का प्रतिबंध लगा दिया है। इसके तहत खाताधारकों की निकासी पर रोक लगा दी गई है, जिससे लगभग 9 हजार ग्राहक सीधे प्रभावित हुए हैं।

बैंक में लगभग 124 करोड़ रुपये की जमा राशि बताई जा रही है। प्रतिबंध के चलते खाताधारक अपनी जमा पूंजी नहीं निकाल पा रहे हैं। इनमें पेंशनभोगी, छोटे व्यापारी, कर्मचारी और गृहिणियां शामिल हैं, जिनकी जीवनभर की बचत बैंक में फंस गई है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक बैंक पर करीब 38 करोड़ रुपये का एनपीए (Non- Performing Assets) है। सूत्रों के अनुसार, संकट की नींव वर्ष 2014-15 में ही पड़ गई थी, जब मशीनरी और अन्य मदों के नाम पर बड़े पैमाने पर ऋण वितरित किए गए। लेकिन राजनीतिक नफा नुकसान के चक्कर में ऋणों की वसूली नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि प्रबंधन लगातार ऑडिट रिपोर्टों में वास्तविक वित्तीय स्थिति को उजागर नहीं कर रहा था।

RBI की निगरानी पर सवाल
खाताधारकों ने सवाल उठाया है कि हर वर्ष ऑडिट होने के बावजूद इतनी बड़ी अनियमितताएं कैसे नजरअंदाज होती रहीं। अब RBI की निगरानी और सहकारी बैंकों की ऑडिट प्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। अपना पैसा फंसने से गुस्साए कई खाताधारकों ने बैंक परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। बैंक के चेयरमैन और सचिव के अनुपस्थित रहने से उनका आक्रोश और बढ़ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। बुधवार को पीड़ित खाताधारकों ने उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

सूत्रों के अनुसार, नगर निगम देहरादून के भी करोड़ों रुपए बैंक में जमा हैं। इससे नगर निगम के विकास कार्यों, ठेकेदारों के भुगतान और स्थानीय कारोबार पर असर पड़ सकता है।

अब आगे क्या?
RBI के प्रतिबंध के दौरान बैंक की वित्तीय स्थिति का आकलन किया जाएगा। यदि पुनर्गठन या विलय संभव हुआ तो खाताधारकों को राहत मिल सकती है। अन्यथा, परिसंपत्तियों की वसूली और परिसमापन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है —
क्या 9 हजार खाताधारकों की कमाई सुरक्षित वापस मिल पाएगी?
फिलहाल, देहरादून के हजारों परिवारों की निगाहें सरकार और RBI के अगले कदम पर टिकी हैं।

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