सावधान: अमेरिका वीज़ा देने से पहले जांचेगा आपका सोशल मीडिया अकाउंट

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अमेरिका अब वीजा देने से पहले लोगों की ऑनलाइन मौजूदगी पर भी नजर रखेगा। इसलिए एच-1बी और एच-4 वीजा के इच्छुक लोगों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी

नई दिल्ली। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एच -1बी वीजा और उससे जुड़े एच -4 वीजा आवेदकों के लिए वीजा जांच प्रक्रिया को और सख्त करने का निर्णय लिया है। नए नियमों के तहत अब सभी एच -1बी और एच -4 वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल की अनिवार्य जांच की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स में अमेरिकी विदेश विभाग के हवाले से चल रही खबरों के अनुसार इस नई व्यवस्था के अंतर्गत वीजा आवेदकों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देनी होगी तथा उनकी प्राइवेसी सेटिंग्स सार्वजनिक (पब्लिक) रखनी होंगी, ताकि संबंधित अधिकारी उनकी ऑनलाइन गतिविधियों की समीक्षा कर सकें। यह कदम वीजा प्रक्रिया को राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले सोशल मीडिया जांच की यह व्यवस्था केवल छात्र वीजा और एक्सचेंज विजिटर वीजा आवेदकों पर लागू थी, जिसे अब एच-1बी और एच-4 वीजा श्रेणी तक विस्तारित कर दिया गया है।इस निर्णय से भारतीय पेशेवरों, विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के विशेषज्ञों और डॉक्टरों में चिंता देखी जा रही है, क्योंकि एच-1बी वीजा का सबसे अधिक उपयोग भारतीय नागरिकों द्वारा किया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया गतिविधियों की कड़ी जांच के कारण वीजा प्रक्रिया में अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। जो भी लोग एच-1बी वीजा (वर्क वीजा) या एच-4 वीजा (पत्नी/पति और बच्चों के लिए) के लिए आवेदन करेंगे, उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच अनिवार्य होगी।

नया नियम क्या कहता है?
वीजा आवेदन करने वाले हर व्यक्ति को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देनी होगी। साथ ही प्राइवेसी सेटिंग “पब्लिक” रखनी होगी, ताकि अमेरिकी अधिकारी उनकी प्रोफाइल देख सकें

सरकार आवेदक की ऑनलाइन गतिविधियों को देखकर यह जांचेगी कि वह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं है।

पहले यह नियम किन पर लागू था?
पहले यह सख्त सोशल मीडिया जांच केवल छात्र वीजा और एक्सचेंज विजिटर वीजा
वालों पर लागू थी। अब इसे एच-1बी और एच-4 वीजा तक बढ़ा दिया गया है

भारतीयों पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले से भारतीय पेशेवरों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि

एच-1बी वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और डॉक्टर करते हैं

लोगों को डर है कि सोशल मीडिया पोस्ट, लाइक या पुराने कमेंट्स वीजा रिजेक्शन का कारण बन सकते हैं।