UP पंचायत चुनाव: पिछले 25 साल से आरक्षित जिला और क्षेत्र पंचायत की सीट बदलेगी, समझें फार्मूला

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उत्तर प्रदेश मे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2021 को लेकर तैयारियां चल रही हैं. इस बार के चुनाव में संभावित प्रत्याशियों बीच सबसे ज्यादा चर्चा आरक्षण की नई व्यवस्था को लेकर है. पूरा गुणा-भाग इस बात को लेकर है कि जो सीट इस समय जिस वर्ग के लिए आरक्षित है या अनारक्षित है, इस बार के चुनाव के लिए वह सीट किस वर्ग के लिए तय होगी? इसी के बाद गांव में उम्मीदवार तय होगा. कई संभावित उम्मीदवार अभी तक इसीलिए खुलकर प्रचार नहीं कर रहे हैं. दरअसल उन्हें लगता है कि आरक्षण के ऐलान से पहले की उनकी सारी मेहनत सिर्फ जुआ ही है. पता नहीं वह चुनाव लड़ भी पाएं या नहीं?

वहीं आरक्षण की जो नई व्यवस्था लागू होने की जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार 1995, 2000, 2005, 2010 एवं 2015 के चुनाव में लागू अनुसूचित जाति (एससी) या अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित रहे क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी), ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्षों के निर्वाचन क्षेत्रों में इस बार आरक्षण का लाभ लागू नहीं होगा. यही व्यवस्था एससी, एसटी के लिए आरक्षित रहे क्षेत्रों में भी लागू रहेगी. हालांकि ग्राम पंचायत स्तर पर ये व्यवस्था लागू नहीं होगी, जानकारी अनुसार ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्य का आरक्षण तय करने में वर्ष 2015 को आधार बनाया जाएगा. यानि उस समय जो ग्राम पंचायत जिस वर्ग के लिए आरक्षित थी, इस बार उस पर उसका आरक्षण नहीं होगा. इस संबंध में जल्द ही शासन के निर्देश जारी हो सकते हैं.
प्रस्तावित फार्मूले के अनुसार ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों तथा जिला पंचायतों में एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र यानी वार्डों की गणना पहले से तय फार्मूले के अनुसार डीएम के स्तर से की जाएगी. जिला पंचायतों में आगामी सामान्य निर्वाचन के आरक्षण में रोटेशन लागू किया जाएगा.

इस तरह समझें व्यवस्था

25 वर्ष में 1995, 2000, 2005, 2010 एवं 2015 में पंचायत चुनाव हुए. इन चुनावों में आरक्षित वर्गों और महिलाओं के लिए रिजर्व जिला पंचायतें इस बार आरक्षित नहीं होंगी. इनमें ‘गिरते हुए’ क्रम में अगली आने वाली जिला पंचायत से आरक्षण दिया जाएगा. हालांकि अगर इसके बाद भी रिजर्वेशन कोटा पूरा न हो सके तो पिछले 5 चुनावों में उस वर्ग के लिए आरक्षित जिला पंचायत में फिर से उसी वर्ग के लिए आरक्षण का निर्धारण हो सकता है. यही फार्मूला क्षेत्र पंचायत यानि ब्लॉक प्रमुख प्रमुख पद पर लागू हो सकता है.
सबसे पहले जिला पंचायतों को एसटी, एससी और ओबीसी की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर गिरते हुए क्रम में लिस्ट किया जाएगा. इसके बाद 1995 से 2015 तक आरक्षण की स्थिति देखकर फिर से इन वर्गों के लिए आरक्षित नहीं किया जाएगा.

ग्राम पंचायतों के लिए ये व्यवस्था
वहीं 2015 में जो ग्राम पंचायत जिस वर्ग के लिए आरक्षित थी, उस पर उसका आरक्षण नहीं होगा. पिछले साल के आरक्षण से आगे चक्रानुक्रम में सीट तय की जाएंगी. चक्रानुक्रम की शुरुआत एसटी की महिलाओं से फिर एससी, एससी महिलाएं, ओबीसी महिलाएं, ओबीसी के लिए आरक्षित की जाती हैं. यानी कोई ग्राम पंचायत अगर 2015 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी तो इस बार ओबीसी महिला के लिए आरक्षित होगी.

पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण का चक्रानुक्रम फार्मूला :-
पहले एसटी महिला, फिर एसटी महिला/पुरुष

पहले एससी महिला, फिर एससी महिला/पुरुष

पहले ओबीसी महिला, फिर ओबीसी महिला/पुरुष

अगर इसके बाद भी महिलाओं का एक तिहाई आरक्षण पूरा न हो तो महिला, इसके बाद अनारक्षित।

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