नैनीताल/देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों में वर्षों से कार्यरत उपनल (UPNL) संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, चयनित वेतनमान और वेतन से जीएसटी कटौती के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूर्व में पारित आदेशों के अनुपालन को लेकर सरकार को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों का अब तक पालन नहीं किया गया है। कर्मचारियों को न तो नियमित किया गया है और न ही उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि कई उपनल कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से कई कर्मचारी सेवानिवृत्ति की आयु के करीब पहुंच चुके हैं, लेकिन उनकी सेवा संबंधी मांगों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने अदालत से आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की।
अवमानना याचिका में उपनल कर्मचारी संघ ने कहा है कि नवंबर 2025 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट आदेश दिया था कि उपनल कर्मचारियों को पहले समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए। साथ ही उनके वेतन से जीएसटी की कटौती न की जाए और नियमितीकरण की प्रक्रिया भी शुरू की जाए। इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। संघ ने अदालत को बताया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है और न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की जा रही है। इस पर अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर आदेशों के अनुपालन संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी, जिसमें सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर हाईकोर्ट विचार करेगा।











