IT park मामले में हाईकोर्ट ने पलटा दून कोर्ट का फैसला, सिडकुल को बड़ी राहत 

4

 

देहरादून। राजधानी देहरादून में सहस्त्रधारा रोड स्थित आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक पार्क के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सिडकुल के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने देहरादून की संदर्भ अदालत द्वारा मुआवजे में की गई भारी वृद्धि को निरस्त करते हुए विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) के मूल पुरस्कार को बहाल कर दिया। इस फैसले को भूमि अधिग्रहण मामलों में बाजार मूल्य निर्धारण के सिद्धांतों को स्पष्ट करने वाला एक अहम न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।

विवाद देहरादून के ग्राम गुजराड़ा मानसिंह स्थित उस भूमि से जुड़ा है, जिसका अधिग्रहण सहस्त्रधारा रोड पर स्थापित किए गए आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक पार्क परियोजना के लिए किया गया था। अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद वर्ष 2005 में विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी ने भूमि स्वामी अवधेश चौधरी को वैधानिक लाभों सहित लगभग 34.72 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया था।
हालांकि भूमि स्वामी ने इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए संदर्भ न्यायालय में चुनौती दी। मामले की सुनवाई के बाद तृतीय अपर जिला न्यायाधीश, देहरादून ने 13 दिसंबर 2010 को दिए गए अपने आदेश में क्षेत्र की सर्किल दरों को आधार बनाकर मुआवजा बढ़ाते हुए 1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित कर दिया था।

सिडकुल ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
न्यायालय के इस आदेश को सिडकुल ने हाईकोर्ट में विशेष अपील दायर कर चुनौती दी। सिडकुल की ओर से दलील दी गई कि भूमि अधिग्रहण मामलों में बाजार मूल्य का निर्धारण केवल सर्किल दरों के आधार पर नहीं किया जा सकता। अपील में यह भी कहा गया कि संबंधित भूमि को स्वयं भूमि स्वामी ने अधिग्रहण अधिसूचना जारी होने से लगभग 15 महीने पहले खरीदा था और उसी भूमि का क्रय-विक्रय मूल्य वास्तविक बाजार दर का सबसे विश्वसनीय प्रमाण माना जाना चाहिए।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि संदर्भ न्यायालय ने भूमि को आवासीय मानते हुए सर्किल दरों के आधार पर मुआवजा बढ़ाया था, जबकि उपलब्ध राजस्व अभिलेखों में भूमि की प्रकृति कृषि दर्ज थी। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि भूमि के बाजार मूल्य के निर्धारण में वास्तविक बिक्री विलेखों और समकालीन क्रय-विक्रय दस्तावेजों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। केवल सर्किल दरों के आधार पर बाजार मूल्य तय करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की एकलपीठ ने सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए संदर्भ न्यायालय द्वारा मुआवजे में की गई वृद्धि को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी द्वारा वर्ष 2005 में निर्धारित मूल मुआवजे को पुनः लागू करने का आदेश दिया। इस फैसले के साथ सिडकुल की विशेष अपील स्वीकार कर ली गई और देहरादून अदालत का आदेश प्रभावहीन हो गया।