देहरादून। सुहाग, प्रेम और अटूट विश्वास के पर्व करवा चौथ पर इस बार उत्तराखंड के मौसम ने महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है। दिनभर निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी उम्र की कामना करने वाली सुहागिनों को आज रात चांद के दीदार के लिए मौसम की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने प्रदेश के नौ जिलों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। ऐसे में रात 8:17 बजे होने वाले चंद्रोदय के दौरान आसमान में छाए बादल व्रती महिलाओं के इंतजार को लंबा कर सकते हैं।

मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उत्तराखंड के मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, चंपावत और टिहरी में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं, पर्वतीय क्षेत्रों के अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार हैं। बारिश और बर्फबारी के चलते पहाड़ों में ठंड बढ़ सकती है। मैदानी इलाकों में भी बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश से तापमान में गिरावट महसूस की जा सकती है।

मौसम की चुनौती केवल बारिश तक सीमित नहीं है। प्रदेश के 10 जिलों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है।
रात 8:17 बजे चंद्रोदय, लेकिन बादल बन सकते हैं बाधा
करवा चौथ का सबसे खास और भावनात्मक पल चंद्रमा के दर्शन का होता है। पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद महिलाएं शाम को विधि-विधान से पूजा करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण करती हैं।

पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि आज रात 1:06 बजे से शुरू होकर रात 10:09 बजे तक रहेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक निर्धारित है, जबकि चंद्रोदय का समय रात 8:17 बजे बताया गया है। देहरादून और नैनीताल में भी चंद्रमा के लगभग इसी समय उदित होने की संभावना है। हालांकि, मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने चांद के दीदार को लेकर असमंजस पैदा कर दिया है। देहरादून में लगभग 15.5 डिग्री सेल्सियस और नैनीताल में 15.3 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ आसमान में बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना है। ऐसे में कई स्थानों पर चंद्रमा बादलों की ओट में छिपा रह सकता है।
बादल छाए तो भी नहीं टूटेगी परंपरा, चंद्रमा की दिशा में अर्घ्य देने की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आसमान में बादल होने के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो व्रती महिलाएं चंद्रमा की निर्धारित दिशा में अर्घ्य देकर व्रत खोल सकती हैं। पंडितों के अनुसार ऐसी स्थिति में परंपरा और धार्मिक विधि के अनुरूप पूजा-अर्चना की जाती है। इसलिए बादलों की वजह से चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन न होने पर भी महिलाओं को अनावश्यक चिंता करने की जरूरत नहीं है।

करवा चौथ केवल एक व्रत नहीं, बल्कि दांपत्य प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है। यही वजह है कि मौसम की तमाम चुनौतियों के बावजूद महिलाओं के उत्साह में कमी नहीं है। बाजारों में करवा चौथ की रौनक, हाथों में सजी मेहंदी, सोलह शृंगार और शाम की पूजा की तैयारियों के बीच अब सभी की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। देखना होगा कि रात 8:17 बजे उत्तराखंड के आसमान में चांद बादलों को चीरकर सुहागिनों को दर्शन देता है या फिर बादलों की ओट से ही इस बार करवा चौथ की रात गुजरती है। फिलहाल प्रदेशभर में महिलाओं की एक ही कामना है—मौसम साफ हो और उनके इंतजार का चांद समय पर नजर आए।

करवा चौथ के चांद पर मौसम का पहरा! बादलों में छिप सकता है सुहागिनों के इंतजार का चांद
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