कांग्रेस में बगावत की चिंगारी: 45 साल की निष्ठा पर ‘पैराशूट’ नेताओं का साया

Astitva Times Desk
5 Min Read

 

​देहरादून। आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में अभी कई महीने बाकी हैं। लेकिन राजनीतिक जोड़तोड़ और समीकरण साधने का काम शुरू हो चुका है। कई नेता पुरानी सीटों को छोड़कर नई सीटों की तलाश में जुटे हुए हैं। इसी बीच राजधानी देहरादून की धरमपुर विधानसभा क्षेत्र के एक पुराने एवं खांटी नेता का दर्दभरा बयान सामने आया है।

“जिस पार्टी को 45 साल तक अपने खून-पसीने से सींचा, आज उसी घर में हम बेगाने हो गए हैं…” यह दर्द है कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रधान और पूर्व पार्षद हरि प्रसाद भट्ट का। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का अंदरूनी घमासान अब भूचाल का रूप लेता दिख रहा है। दशकों तक संगठन के प्रति वफादार रहे जमीनी नेताओं का आक्रोश अब सोशल मीडिया पर फूट पड़ा है।

​स्वर्गीय ब्रह्मदत्त से लेकर आज तक: वफादारी का 45 सालों का लंबा सफर
​हरि प्रसाद भट्ट का यह दर्द महज एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि 45 वर्षों की अनवरत साधना की परिणति है।
​दिग्गजों के साथ काम का अनुभव: उन्होंने स्वर्गीय ब्रह्मदत्त से लेकर स्वर्गीय किशोरी लाल सकलानी और राज्य गठन के बाद पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल के साथ अग्रिम पंक्ति में रहकर संगठन को मजबूत किया।
​हर दौर में चट्टान की तरह डटे रहे: पार्टी चाहे सत्ता में रही हो या विपक्ष के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हो, भट्ट ने कभी पाला नहीं बदला और हमेशा कांग्रेस का झंडा बुलंद रखा।

​’पैराशूट’ प्रत्याशियों का दबदबा और गुटबाजी का आरोप
​दिनेश अग्रवाल के पार्टी छोड़ने के बाद धर्मपुर में उपजे शून्य का फायदा उठाने के लिए बाहरी नेताओं का जमावड़ा लग गया है। भट्ट ने कड़े शब्दों में “पैराशूट प्रत्याशियों की बाढ़” पर अपनी नाराजगी जाहिर की है:
​स्थानीय मुद्दों से कोई वास्ता नहीं: भट्ट का कहना है कि ऐसे प्रत्याशियों का धर्मपुर के भूगोल, इतिहास या कार्यकर्ताओं के सुख-दुख से कोई लेना-देना नहीं  है।
​संगठनात्मक बैठकों को नाकाम करने की साजिश: 21 अगस्त 2026 को हुई एस.आई.आर (SIR) की महत्वपूर्ण बैठक और उससे पूर्व आयोजित कार्यक्रमों में BLA-2 की कम उपस्थिति का सीधा कारण इन पैराशूट तत्वों द्वारा फैलाई गई गलत अफवाहें थीं।

​वरिष्ठ नेता का आरोप है कि बाहरी प्रत्याशियों का गिरोह पार्टी के शीर्ष राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व—माननीय राहुल गांधी जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी, प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा जी और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल जी—के नामों का ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
​दिल्ली के गलियारों के हवाले से यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि टिकट पहले ही “फाइनल” हो चुके हैं और अब वार्ड अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष या प्रदेश अध्यक्ष की राय की कोई बिसात नहीं रह गई है।

​भट्ट का पार्टी आलाकमान से सवाल: “क्या हम सिर्फ दरी बिछाने के लिए हैं?”
​”अगर पैराशूट प्रत्याशियों को ही सिर-आंखों पर बैठाना है, तो 45 सालों से विचारधारा के लिए लाठियां खाने और खून-पसीना बहाने वाले स्थानीय कार्यकर्ताओं का क्या होगा?”
​ भट्ट ने पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों के सामने सवाल खड़े किए हैं:
​स्थानीय नेतृत्व की उपेक्षा क्यों? क्या विशाल धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में एक भी स्थानीय कार्यकर्ता इस काबिल नहीं है कि उसे विधानसभा का उम्मीदवार बनाया जा सके?
​युवाओं के भविष्य का क्या? जो युवा पार्षद और निष्ठावान कार्यकर्ता दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, इस परिपाटी से उनके मनोबल पर क्या असर पड़ेगा?

​गुटबाजी से तबाही: धर्मपुर में जो भाईचारा और एकजुटता थी, उसे बाहरी लोगों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए टुकड़ों में बांट दिया है।
​ स्पष्ट संदेश: बांटने की राजनीति बंद करो
​भट्ट ने सभी जिम्मेदार नेताओं से अपील की है कि धर्मपुर के निष्ठावान कैडर को आपस में लड़ाने और बांटने की घृणित राजनीति तुरंत बंद की जाए। 45 साल के एक कर्मठ सिपाही का यह दर्द इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व ने जमीनी कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान की रक्षा नहीं की, तो बगावत का यह दावानल प्रदेश भर में संगठन की जड़ों को हिलाकर रख देगा।

 

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!