देहरादून के सहसपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत खुशहालपुर में दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर पेंशन लेने का बड़ा मामला सामने आया था, जांच रिपोर्ट के बाद टिहरी प्रशासन की सख्त कार्रवाई
देहरादून। जिले के सहसपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत खुशहालपुर में पेंशन फर्जीवाड़े और सरकारी अभिलेखों में कथित हेराफेरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए टिहरी गढ़वाल के जिला पंचायत राज अधिकारी ने ग्राम पंचायत विकास अधिकारी शार्दूल सिंह तड़ागी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
प्राप्त आदेश के अनुसार, सहसपुर ब्लॉक की खुशहालपुर ग्राम पंचायत में 30 परिवारों के अभिलेखों के सत्यापन को लेकर गठित त्रिस्तरीय समिति की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि परिवार रजिस्टर के मिलान में गड़बड़ी हुई और कार्यालय में प्रस्तुत की गई सूची तथा वास्तविक अभिलेखों में भारी अंतर था।
बताया जा रहा है कि शार्दूल सिंह तड़ागी मूल रूप से टिहरी जिले में तैनात थे, लेकिन उन्होंने देहरादून जिले में अपना अटैचमेंट करा रखा था। इसी दौरान खुशहालपुर ग्राम पंचायत से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेराफेरी का मामला सामने आया। आदेश में उल्लेख है कि सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि ग्राम पंचायत में निवासरत परिवारों से संबंधित अभिलेख कार्यालय में प्रस्तुत किए गए थे। बाद में जब परिवार रजिस्टर की प्रतियों का मिलान कराया गया तो तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने लिखित रूप से स्पष्ट किया कि परिवार रजिस्टर में किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं।
जिसके बाद जांच समिति ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और कूटरचना का मामला मानते हुए शार्दूल सिंह तड़ागी की भूमिका संदिग्ध पाई। आरोप है कि संबंधित अभिलेखों को तैयार करने और प्रस्तुत करने में धोखाधड़ी एवं जालसाजी की गई।
जिला पंचायत राज अधिकारी, टिहरी गढ़वाल द्वारा जारी आदेश में शार्दूल सिंह तड़ागी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विकासखंड जौनपुर से संबद्ध कर दिया गया है।निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का भी उल्लेख आदेश में किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि आरोप पत्र पृथक से जारी किया जाएगा और पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच आगे भी जारी रहेगी।
कार्रवाई के बाद ग्राम पंचायत खुशहालपुर सहित पूरे सहसपुर ब्लॉक में हड़कंप की स्थिति है। स्थानीय लोगों के बीच पंचायत अभिलेखों की पारदर्शिता और सरकारी योजनाओं में संभावित गड़बड़ियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को पंचायत व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं अब सबकी निगाहें आगे की विभागीय जांच और संभावित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिक गई हैं।

जांच अधिकारी की जांच रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल, शिकायतकर्ता असलम खान ने मुख्य विकास अधिकारी से की शिकायत
देहरादून। सहसपुर विकासखंड के ग्राम घमोलो खुशहालपुर में 17 वृद्धावस्था पेंशनरों की पात्रता जांच और उसके बाद दर्ज हुई प्राथमिकी (FIR) को लेकर समाज कल्याण विभाग खुद ही घिरता नजर आ रहा है। जांच अधिकारी और सहायक समाज कल्याण अधिकारी संदीप नेगी द्वारा की गई जांच अब बड़े विवाद का रूप लेती दिख रही है। ताजा घटनाक्रम में यह सामने आया है कि जिन 17 लोगों के खिलाफ आधार कार्ड में कूटरचना (फर्जीवाड़ा) कर आयु बढ़ाने का मुकदमा दर्ज कराया गया था, उनमें से कम से कम दो लाभार्थियों की वास्तविक आयु नियमों के अनुसार सही पाई गई है।
स्थानीय निवासी असलम खान द्वारा पूर्व में विभिन्न माध्यमों से ग्राम घमोलो खुशहालपुर के 17 वृद्धावस्था पेंशनरों की पात्रता की जांच को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत पर निदेशक समाज कल्याण के निर्देशों के क्रम में जिला कार्यालय द्वारा जांच कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सहायक समाज कल्याण अधिकारी संदीप नेगी ने इस संवेदनशील मामले की जांच करते समय न तो मूल शिकायतकर्ता को मौके पर बुलाया और न ही संबंधित पेंशन धारकों का पक्ष सुना। बिना किसी निष्पक्ष सुनवाई के विभाग ने आनन-फानन में थाना सहसपुर में सभी 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया।
मुकदमा दर्ज होने के बाद जब मामले की परतें खुल रही हैं तो विभाग के पैरों तले जमीन खिसकती दिख रही है। जिन 17 लोगों पर आधार कार्ड में हेरफेर करने का संगीन आरोप लगाया गया है, उनमें से दो लाभार्थी—जमील और राशिदा की आयु 60 वर्ष से अधिक (पेंशन पात्रता के पूर्णतः योग्य) पाई गई है। दो बुजुर्गों की आयु सही पाए जाने के बाद अब पूरी जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर ही गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं।
जिसके बाद बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर किस आधार पर जांच अधिकारी ने इन पात्र बुजुर्गों को भी फर्जीवाड़े का दोषी मान लिया?
इस पूरे मामले में जिला समाज कल्याण अधिकारी देहरादून द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी को भी देने से इनकार कर दिया गया है। विभाग ने RTI अधिनियम 2005 की धारा 8(1)(ज) का हवाला देते हुए कहा है कि मामला अभी जांच के अधीन है और सूचना देने से अपराधियों के अन्वेषण या अभियोजन की प्रक्रिया में अड़चन आ सकती है। परंतु शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि विभाग अपनी कमियों और गलत जांच को छुपाने के लिए इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं कर रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी की चौखट पर पहुंचा मामला
कार्रवाई के नाम पर हुए इस कथित खेल को लेकर शिकायतकर्ता असलम खान ने अब मुख्य विकास अधिकारी (CDO) देहरादून को एक शिकायती पत्र प्रेषित किया है। असलम खान ने जांच अधिकारी संदीप नेगी द्वारा की गई पूरी प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा करते हुए मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि दो पात्र बुजुर्गों को जबरन मुकदमे में घसीटने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है और पीड़ित बुजुर्गों को कब तक न्याय मिलता है।











