बिजली बिलों में ‘चार्ज पर चार्ज’, सुविधाएं बेहाल! कांग्रेस ने यूपीसीएल को घेरा 

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₹8,974 की बिजली लागत, पर बिल पहुंचा ₹10,868, फिक्स्ड-डिमांड चार्ज से लेकर एफपीपीसीए तक पर उठे सवाल; कटौती, कनेक्शन और खम्भों की बदहाली को लेकर भी कांग्रेस का हमला

देहरादून। बिजली उपभोक्ताओं से विभिन्न शुल्कों और अधिभार के नाम पर अतिरिक्त रकम वसूले जाने, बार-बार बिजली कटौती, मलिन बस्तियों में नए कनेक्शन के लिए लोगों की परेशानी और शहर में विद्युत खम्भों की अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने यूपीसीएल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि जब उपभोक्ताओं से बिजली की मूल लागत के अलावा अलग-अलग मदों में लगातार भुगतान लिया जा रहा है, तो फिर विद्युत व्यवस्था की खामियां दूर क्यों नहीं हो रही हैं।

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष लालचंद शर्मा ने बिजली बिलों में लगाए जा रहे विभिन्न शुल्कों और अधिभार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि महंगाई से जूझ रही जनता पर बिजली के बिलों के माध्यम से अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने एक बिजली बिल का उदाहरण देते हुए बताया कि ₹8,974.50 की बिजली लागत के साथ बिल में ₹550 फिक्स्ड चार्ज, ₹220 डिमांड चार्ज, ₹173.70 विद्युत कर, ₹115.80 हरित ऊर्जा उपकर और ₹860.23 एफपीपीसीए अधिभार दर्ज है। इसके बाद बिल का वर्तमान योग ₹10,692.23 पहुंचता है और ₹176 की प्रतिभूति किस्त जोड़ने पर कुल देय राशि ₹10,868 हो जाती है।

लालचंद शर्मा ने कहा कि उपभोक्ता यह जानना चाहता है कि बिजली की वास्तविक खपत के अलावा लगाए जा रहे प्रत्येक शुल्क का आधार क्या है। उन्होंने यूपीसीएल से बिल में शामिल हर मद की स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी देने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि यदि उपभोक्ताओं से अलग-अलग मदों में राशि वसूली जा रही है तो उसके अनुरूप विद्युत व्यवस्था की गुणवत्ता और सेवाओं में भी सुधार दिखाई देना चाहिए।
‘बिल बढ़ रहे, लेकिन बिजली कटौती क्यों नहीं रुक रही?’
कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र पोखरियाल ने धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में बार-बार हो रही बिजली कटौती पर यूपीसीएल को घेरा। उन्होंने कहा कि अनियोजित कटौती ने आम उपभोक्ताओं के साथ विद्यार्थियों, दुकानदारों और कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

उन्होंने कहा कि सुबह और शाम के समय बिजली आपूर्ति बाधित होने से घरेलू कामकाज के साथ पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित होती है। यदि मरम्मत या शटडाउन के कारण बिजली बंद की जानी है तो उपभोक्ताओं को पहले से SMS के माध्यम से सूचना दी जानी चाहिए। पोखरियाल ने मांग की कि पीक आवर्स में अनावश्यक कटौती से बचा जाए और तकनीकी खराबी होने की स्थिति में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए।

मलिन बस्तियों के लोगों को कनेक्शन के लिए क्यों भटकना पड़ रहा?
पूर्व विधायक राजकुमार ने देहरादून की मलिन बस्तियों में नए बिजली कनेक्शन नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाते हुए सरकार और ऊर्जा निगम से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि कई परिवार वर्षों से इन बस्तियों में रह रहे हैं और उनके पास बिजली-पानी के बिल सहित विभिन्न सरकारी दस्तावेज उपलब्ध हैं, इसके बावजूद नए कनेक्शन के लिए उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
उन्होंने कहा कि गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए नए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया सरल, स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए। पात्र परिवारों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
300 घर, 15 लेन और निकास पर खम्भों की ‘अव्यवस्था’
कांग्रेस नेताओं ने गंगा बिहार सोसाइटीज, कैनाल रोड, कौलागढ़ में विद्युत खम्भों की स्थिति को लेकर भी यूपीसीएल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनके अनुसार कॉलोनी में करीब 300 आवासीय भवन और 15 लेन हैं। कई लेनों के निकास मार्ग पर विद्युत खम्भों की स्थिति ऐसी है कि स्थानीय निवासियों और वाहनों को आवागमन में परेशानी होती है।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि करीब आठ लेनों के निकास द्वार पर खम्भे सड़क और निकास मार्ग के उचित किनारे पर नहीं हैं, जिससे चार पहिया वाहनों को निकलने में दिक्कत होती है। निकास द्वार पर लगे लाइटयुक्त साइनबोर्ड को भी उचित स्थान पर शिफ्ट करने की मांग की गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मौके का स्थलीय निरीक्षण कराकर खम्भों और साइनबोर्ड को आवश्यकतानुसार स्थानांतरित करने की मांग की।

जर्जर तार और झूलते मीटर—कांग्रेस ने मांगी जवाबदेही
कांग्रेस नेताओं ने ट्रांसफार्मरों के रखरखाव, अर्थिंग, झूलते एवं जर्जर तारों, लटकते मीटरों, मीटर रीडिंग तथा आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी यूपीसीएल को घेरा।
उन्होंने कहा कि जब विद्युत व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं तो उनके समाधान की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा करने तथा लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस का सीधा सवाल—‘वसूली पूरी तो व्यवस्था दुरुस्त क्यों नहीं?’
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उपभोक्ताओं से बिजली बिल के नाम पर अलग-अलग मदों में राशि लेने के साथ यूपीसीएल को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उपभोक्ताओं को नियमित और सुरक्षित बिजली आपूर्ति मिले। उनका कहना है कि बिजली बिलों की पारदर्शिता, अनियोजित कटौती, नए कनेक्शन, जर्जर विद्युत ढांचे और शिकायतों के निस्तारण पर यूपीसीएल को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस ने मांग की कि बिजली बिलों में लगाए जा रहे सभी शुल्कों और अधिभार की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए, अनियोजित बिजली कटौती पर रोक लगे, पात्र परिवारों को नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया सरल हो तथा जर्जर विद्युत लाइनों, खम्भों और अन्य अवसंरचना की तत्काल समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। इस अवसर पर राजीव पूंज, रमेश कुमार मगू, पार्षद डी.पी. सिंह, विपुल नौटियाल एडवोकेट, अमित रावत, मुकेश चौहान और नजीर खान सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता एवं स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।