अक्षय तृतीया स्पेशल; धार्मिक परंपरा के साथ ही सोना-चांदी में निवेश को माना जाता है शुभ

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देहरादून। देशभर में मनाई जाने वाली अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी की खरीदारी को लेकर धार्मिक आस्था और परंपरा आज भी मजबूत बनी हुई है। इस दिन ज्वेलरी खरीदना न केवल शुभ माना जाता है, बल्कि इसे स्थायी समृद्धि और “अक्षय फल” से भी जोड़ा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार “अक्षय” का अर्थ है—जिसका कभी क्षय न हो। इसी वजह से इस दिन किए गए पुण्य कार्य, दान और निवेश का फल अनंत काल तक मिलने की बात कही जाती है। पंडितों और ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक अक्षय तृतीया पर खरीदी गई सोना-चांदी को “अक्षय संपत्ति” का दर्जा दिया जाता है।

 

देवी लक्ष्मी की कृपा से जुड़ी है मान्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदू धर्म में सोना और चांदी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन लक्ष्मी जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, ऐसे में इस दिन ज्वेलरी खरीदने से घर में सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि होती है। अक्षय तृतीया का महत्व कई पौराणिक घटनाओं से भी जुड़ा हुआ है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार:
भगवान परशुराम का जन्म इसी दिन हुआ था
महाभारत काल में पांडवों को अक्षय पात्र की प्राप्ति इसी तिथि पर हुई थी
इन प्रसंगों के कारण इस दिन को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

परंपरा के साथ आर्थिक सोच भी जुड़ी
समय के साथ अक्षय तृतीया पर ज्वेलरी खरीदने की परंपरा में आर्थिक दृष्टिकोण भी शामिल हो गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोना और चांदी लंबे समय में सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाते हैं, इसलिए लोग इस दिन निवेश के रूप में सोना चांदी एवं अन्य ज्वेलरी की खरीदारी करते हैं। अक्षय तृतीया पर ज्वेलरी खरीदने की परंपरा धार्मिक आस्था और आर्थिक समझ का मिश्रण बन चुकी है। यही कारण है कि हर साल इस अवसर पर देशभर के सर्राफा बाजारों में रौनक देखने को मिलती है और लोग इसे शुभ निवेश के रूप में अपनाते हैं।