काठ बंगला बस्ती में जारी नोटिस के खिलाफ विभिन्न संगठनों का सीएम आवास कूच

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कानून एवं सरकार के वादों के विपरीत विस्थापन की कार्रवाई का किया विरोध, मुख्यमंत्री से की विनम्र अपील

देहरादून। काठ बंगला बस्ती वासियों को mdda द्वारा जारी नोटिस निरस्त करने की मांग को लेकर प्रदेश सचिव कांग्रेस एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री एडवोकेट सुनीता प्रकाश, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल के नेतृत्व में गुरुवार को मलिन बस्तियों के लिए बनाये विशेष कानून और मुख्यमंत्री के ही वादों का उल्लेख करते हुए सैकड़ों मज़दूर बस्तीवासियों के साथ मुख्यमंत्री के नाम पर CM आवास पर ज्ञापन सौंपवाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने 2018 के अधिनियम के धारा 4 का ज़िक्र करते हुए कहा कि 11 मार्च 2016 से पहले रह रहे लोगों पर हटाने की कार्यवाही नहीं की जा सकती है, लेकिन MDDA की और से कांठ बंगला बस्ती में सैकड़ों लोगों को 15 दिन के अंदर खाली करने का नोटिस दिया गया है जबकि नोटिस में ही इस बात को स्वीकारा गया है कि यह निवासी 11 मार्च 2016 से पहले रह रहे हैं।

इसके आलावा नोटिस में लिखा है कि नगर निगम द्वारा फ्लैट का आवंटन किया जायेगा लेकिन वह फ्लैट प्रभावित परिवारों के लिए रहने लायक नहीं है, और वह ईमारत पुरानी और नदी के बीच में बनने की वजह से उनमें खतरा भी हो सकता है। कहीं परिवारों को नोटिस दिया गया है जो नदी से दूर में रह रहे हैं। ज्ञापन में मुख्यमंत्री धामी जी का बयान का उल्लेख करते हुए बस्तीवालों ने कहा कि ऐसे लग रहा है कि सरकारी अधिकारी सरकार के ही वादों एवं विधान सभा द्वारा पारित कानूनों के खिलाफ कार्यवाही कर रहे हैं। उन्होंने इस ग़ैर क़ानूनी प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने के लिए मांग उठायी। पुनर्वास की प्रक्रिया जहां पर जरुरत है, वह लोगों से वार्ता करते हुए उनके सहयोग के साथ किया जाए।

जब ज्ञापन सौंपवाने के लिए सैकड़ों लोग इकट्ठे हुए पुलिस ने लोगों को कालिदास रोड पर रोक दिया। उनमें से एक प्रतिनिधि मंडल को मुख्यमंत्री आवास में बुलाया गया और वहां पर मुख्यमंत्री के जन संपर्क अधिकारी हरीश कोठारी के साथ विस्तार में वार्ता हुई। क़ानूनी एवं जनता के पक्ष को ध्यान में लेते हुए कोठारी ने कहा कि इन बातों पर विचार किया जायेगा और सकारात्मक कार्यवाही की जाएगी। जन सभा करते हुए बस्तीवालों एवं प्रतिनिधियों ने तय की कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाती आयोग, मुख्य सचिव कार्यालय और अन्य सरकारी विभागों को भी इस गैर क़ानूनी कार्यवाही को लेकर शिकायत दी जाएगी।

कार्यक्रम में सर्वोदय मंडल उत्तराखंड के हरबीर सिंह कुशवाहा, वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री एडवोकेट सुनीता प्रकाश, कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव प्रवीण त्यागी, संजय शर्मा, देवेंद्र सिंह, नेमचंद सूर्यवंशी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ एसएन सचान, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, राजेंद्र शाह, भाई सिंह, प्रकाश स्नेही, लक्ष्मी नेगी, भजन रौंछेला, मिंटू कुमार, शैलेश गुप्ता, राजेन्द्र कुमार, शमशेर अली, सुनील कुमार, रमन पंडित, रामकुमार, सुनीता, अशोक कुमार, राजेश्वरी, दिलबहार, मोनू, वकील अहमद, अंकुश कुमार, रघुवीर सिंह नेगी, राम सिंह, पिंटू समेत सैकड़ों की संख्या में बस्तीवासी मौजूद रहे।

ज्ञापन सलग्न।

निवेदक,

दून समग्र विकास अभियान

*ज्ञापन*

सेवा में

माननीय मुख्यमंत्री
उत्तराखंड सरकार

विषय: कांठ बंगले बस्ती से ज़बरन विस्थापन करने के संबंध में

महोदय,

हम इसलिए आपके आवास पर आज आये हैं क्योंकि उत्तराखंड सरकार के कुछ अधिकारी विधान सभा द्वारा पारित कानूनों एवं सरकार की और से घोषित नीतियों के खिलाफ कार्यवाही कर रहे हैं और उनको इस प्रकार की कार्यवाहियों को करने के लिए भी अंजाम दिया जा रहा है। इन गैर क़ानूनी कार्यवाहियों की वजह से हम और हमारे परिवार महीनों से भय और तनाव के माहौल में रह रहे हैं। हम आपसे निवेदन करना चाहेंगे कि इन गैर क़ानूनी कार्यवाहियों पर तुरंत रोक लगाए जाये और ज़िम्मेदार अधिकारीयों पर कार्यवाही की जाये।

महोदय, 22 नवंबर को मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की और से कांठ बंगले बस्ती के निवासियों को नोटिस जारी किया गया है कि 15 दिन के अंदर वह अपने घरों को खाली करे और नगर निगम द्वारा उनको बगल में बने हुए आवासीय फ्लैट में विस्थापित किया जायेगा। महोदय, इस सन्दर्भ में हम कुछ बातों को आपके संज्ञान में लाना चाहेंगे:

1. विधान सभा द्वारा पारित उत्तराखंड नगर निकायों और प्राधिकरणों हेतु विशेष प्रावधान अधिनियम, 2018 (उत्तराखंड अधिनियम संख्या 24 वर्ष 2021 एवं उत्तराखंड अधिनियम संख्या 5 वर्ष 2025 द्वारा संशोधित) के धारा *4(2) के अनुसार “किसी निर्णय, डिक्री* तथा न्यायालयों के आदेशों से सम्बन्धित प्रकरणों के अतिरिक्त जोकि उपधारा 4(1) में वर्णित हैं, में दिनांक 11.03.2016 की स्थिति के अनुसार यथास्थिति बनायी रखी जा सकेगी।” धारा 4(3) के अनुसार “उपधारा (1) में संदर्भित अनधिकृत निर्माण से सम्बन्धित प्रकरणों में किसी भी स्थानीय निकाय/प्राधिकरण द्वारा दिये गये नोटिस के फलस्वरूप होने वाली दण्डात्मक कार्यवाही इस अधिनियम के लागू होने की दिनांक से आगामी 09 वर्ष के लिए स्थगित रहेगी एवं इस अवधि में इन प्रकरणों पर कोई दण्डात्मक कार्यवाही नहीं की जा सकेगी।” MDDA की और से दिए गए नोटिस इन क़ानूनी प्रावधानों के सीधा विरोध में हैं। एक सरकारी विभाग विधान सभा द्वारा पारित कानून के खिलाफ कैसे कार्यवाही कर सकता है?
2. 17 जनवरी को आप ने भी बयान दिया था कि देहरादून में किसी भी मलिन बस्ती को नहीं उजड़ेगी। MDDA के अधिकारी इस घोषित नीति के विरोध में कैसे कार्यवाही कर रहे हैं?
3. नगर निगम EWS फ्लैट ज़रूरतमंद परिवारों को देने की नीति बनाना चाह रही है, यह बात सराहनीय एवं स्वागतयोग्य है। लेकिन पुरे देश के अनुभवों से यह बात स्पष्ट है कि पुनर्वास की प्रक्रिया तब सफल हो पाता है जब वह प्रभावित लोगों की भागीदारी एवं सहमति से की जाती है। जिन आवासीय फ्लैट की बात की जा रही है, वह किसी भी बड़े परिवार के लिए रहने लायक नहीं है। तो जिन परिवारों को नोटिस दिया गया है उनसे न उनकी राय के बारे में पूछा गया है और न ही उनके परिवारों की बातों को ध्यान में रखा गया है। हमारे निवेदन है कि रिस्पना नदी किनारे जो लोक खतरे में रह रहे हैं और जो इस प्रकार के विस्थापन के लिए तैयार हैं, उन्ही को ही इन फ्लैट का आवंटन किया जाये।

4. महोदय, किसी भी विस्थापन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले नगर निगम और प्रशासन को इन आवासीय फ्लैट को ले कर दो बातों की पुष्टि करनी चाहिए, पहली बात यह है कि यह स्थान बाढ़ के समय में सुरक्षित रहेगा क्या, और दूसरी बात यह है कि पंद्रह साल से ज्यादा यह फ्लैट आधा निर्मित स्थिति में रहने की वजह से उनके ढांचा में कोई कमज़ोरी तो नहीं आयी है? जब तक इन दोनों बातों की पुष्टि नहीं होती है, तब तक किसी को इन में रहने देना शायद प्रशासन की और से लापरवाही होगी। और जिन परिवारों की यह भवन आवंटित किए जाएंगे उनकी जान को जोखिम में डालने के तुल्य होगा। एक कल्याणकारी राज्य वेलफेयर स्टेट में यह ना तो प्रशासनिक स्तर पर उचित है और नहीं मानवीय दृष्टिकोण से उचित है।

अतः हमारा आपसे निवेदन है कि सरकार की नीतियों एवं क़ानूनी प्रावधानों के विरोध में की जा रही इस गैर क़ानूनी प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाया जाये। कांठ बंगले के फ्लैट की सुरक्षा को ले कर पुष्टि होने के बाद नगर निगम सही में ज़रूरतमंद परिवारों को उनकी सहमति के साथ उनका आवंटन करे।

 

देहरादून। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण mdda द्वारा जारी नोटिस के खिलाफ बुधवार को सैकड़ों लोगों ने नगर निगम का घेराव किया। चेतना आंदोलन के बैनर तले किए गए घेराव में विपक्षी दलों एवं जन संगठनों ने नगर निगम का घेराव कर आरोप लगाया कि अपने ही 2018 के कानून एवं वादों की धज्जिया उड़ा कर सरकार मज़दूर परिवारों को उजाड़ कर पुनर्वास के नाम पर ऐसी जगह में उनका विस्थापन करना चाह रहे हैं जो उनके परिवारों के लिए रहने लायक नहीं है और जहाँ पर उनकी जान के लिए भी खतरा हो सकता है। कांठ बंगले बस्ती में 21 तारीख को MDDA द्वारा दिए गए 15 दिन के अंदर खाली करने का नोटिस पर आक्रोश जताते हुए वक्ताओं ने कहा कि 2018 के मलिन बस्ती अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान है कि 2016 से पहले रह रहे लोगों पर 2027 तक ज़बरन कार्यवाही नहीं की जा सकती है, ताकि सरकार इन क्षेत्रों के लिए स्थाई नीति बना पाए।

अब जब mdda द्वारा जारी नोटिस में ही स्वीकारा जा रहा है कि प्रभावित लोग 2016 से पहले रह रहे हैं, यह नोटिस कानून के खिलाफ है। इसके अतिरिक्त नोटिस में लिखा है कि नगर निगम द्वारा फ्लैट का आवंटन किया जायेगा लेकिन वह फ्लैट बहुत  प्रभावित परिवारों के लिए रहने लायक नहीं है, और उनमें खतरा भी हो सकता है। कहीं परिवारों को नोटिस दिया गया है जबकि वह नदी से दूर में रह रहे हैं।  प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम से मांग की कि वह प्राधिकरण का इस गैर क़ानूनी काम में सहयोग न दे, और अगर फ्लैग में खतरा न होने की बात की पुष्टि होती, तो उसके बाद इन फ्लैट उन लोगों को आवंटित किया जाये जो सही में खतरे में रह रहे हैं और जिनके परिवारों के लिए यह फ्लैट रहने लायक होंगे।  ऐसे ज़बरदस्ती, जल्दबाजी और लापरवाही से कदम उठाने से यह लगता है कि प्रशासन की मकसद लोगों का पुनर्वास कराना नहीं है बल्कि एलिवेटेड रोड एवं अन्य विनाशकारी परियोजनाओं के लिए ज़मीन खाली करने का है।

प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए शहर के महापौर सौरभ थपलियाल ने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को ले कर प्राधिकरण के अधिकारीयों को बुलाया जायेगा और ज्ञापन द्वारा उठाये गए बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया जायेगा।  निकलते हुए प्रदर्शनकारियों ने तय किया कि अगर प्रशासन इस गैर क़ानूनी कदम को वापस नहीं लेता, आने वाले सप्ताह में वह दोबारा आंदोलन करेंगे।

प्रदर्शन में सैकड़ों लोगों के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय कौंसिल सदस्य समर भंडारी, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय शर्मा और प्रवीण त्यागी, सर्वोदय मंडल उत्तराखंड के हरबीर सिंह कुशवाहा, समाजवादी पार्टी के सईद अहमद एवं चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, राजेंद्र शाह, सुनीता, रमन, भूपेंद्र, मिश्रा, शैलेश गुप्ता, शमशेर अली, स्वाति, आशा रौंछेला, भाई सिंह, राकेश कुमार, रामकुमार, शकील अहमद, राजेंद्र कुमार, भजन सिंह, अमन कुमार, सुनील कुमार, मोहम्मद फाजिल, शमा, मंजू, मधु, मनीषा, अंकुश, जौहर सिंह, लक्षमण सिंह, गंगा देवी, नरेश, सुशील कुमार, मोहम्मद आलम, छोटे सिंह, सुरेश गुप्ता, शिवानी आदि सैकड़ों बस्तीवसी मौजूद रहे।

ज्ञापन सलग्न।
निवेदक

दून समग्र विकास अभियान

*ज्ञापन*

सेवा में

महापौर महोदय

नगर निगम, देहरादून

विषय: कांठ बंगले बस्ती से ज़बरन विस्थापन करने के संबंध में

महोदय,
22 नवंबर को मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की और से कांठ बंगले बस्ती के निवासियों को नोटिस जारी किया गया है कि 15 दिन के अंदर वह अपने घरों को खाली करे और नगर निगम द्वारा उनको बगल में बने हुए आवासीय फ्लैट में विस्थापित किया जायेगा।

महोदय, इस सन्दर्भ में हम कुछ बातों को आपके संज्ञान में लाना चाहेंगे:
1. उत्तराखंड नगर निकायों और प्राधिकरणों हेतु विशेष प्रावधान अधिनियम, 2018 के धारा 4(3) के अनुसार “(3) उपधारा (1) में संदर्भित अनधिकृत निर्माण से सम्बन्धित प्रकरणों में किसी भी उत्तराखंड अधिनियम संख्या 24 वर्ष 2021 एवं उत्तराखंड अधिनियम संख्या 5 वर्ष 2025 द्वारा संशोधित स्थानीय निकाय/प्राधिकरण द्वारा दिये गये नोटिस के फलस्वरूप होने वाली दण्डात्मक कार्यवाही इस अधिनियम के लागू होने की दिनांक से आगामी 09 वर्ष के लिए स्थगित रहेगी एवं इस अवधि में इन प्रकरणों पर कोई दण्डात्मक कार्यवाही नहीं की जा सकेगी।” MDDA की और से दिए गए नोटिस इस क़ानूनी प्रावधान के विरोध में हैं, और हम आपसे विनम्र निवेदन करना चाहेंगे कि नगर निगम इस गैर क़ानूनी प्रक्रिया में सहयोग न करे।  एमडीए को भी उसकी गैर कानूनी कार्रवाई को न करने हेतु अलग से एक ज्ञापन भी दिया जा रहा है।यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा कोई पुनर्वास नीति अभी तक बनायी ही नहीं गई है।

2. इसके अतिरिक्त सत्ताधारी दल की और से जनता को स्पष्ट आश्वासन दिया गया है कि 2016 से पहले रहने वाले परिवारों को ले कर ज़बरन हटाने की  कार्यवाही पर रोक लगाई गयी है  और मलिन बस्तियों को नहीं उजाड़ी जाएगी। इस बात पर 17 जनवरी को माननीय मुख्यमंत्री ने भी स्पष्ट बयान दिया था।  अब जब MDDA कानून और सरकार की घोषित नीतियों के विरोध में अवैध कार्यवाही पर उतर रही है, इस समय नगर निगम की और से स्पष्ट राय लिया जाये, यह भी हमारे आपसे निवेदन है।

2. नगर निगम EWS फ्लैट ज़रूरतमंद परिवारों को देने की नीति बनाना चाह रही है, यह बात सराहनीय एवं स्वागतयोग्य है। लेकिन  पुरे देश के अनुभवों से यह बात स्पष्ट है कि पुनर्वास की प्रक्रिया तब सफल हो पाता है जब वह प्रभावित लोगों की भागीदारी एवं सहमति से की जाती है। जिन आवासीय फ्लैट की बात की जा रही है, वह किसी भी बड़े परिवार के लिए रहने लायक नहीं है। तो जिन परिवारों को नोटिस दिया गया है उनसे न उनकी राय के बारे में पूछा गया है और न ही उनके परिवारों की बातों को ध्यान में रखा गया है। नगर निगम से हमारे निवेदन है कि रिस्पना नदी किनारे जो लोक खतरे में रह रहे हैं और जो इस प्रकार के विस्थापन के लिए तैयार हैं, उन्ही को ही इन फ्लैट का आवंटन किया जाये।

4. महोदय, किसी भी विस्थापन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले नगर निगम और प्रशासन को  इन आवासीय फ्लैट को ले कर दो बातों की पुष्टि करनी चाहिए, पहली बात यह है कि यह स्थान बाढ़ के समय में सुरक्षित रहेगा क्या, और दूसरी बात यह है कि पंद्रह साल से ज्यादा यह फ्लैट आधा निर्मित स्थिति में रहने की वजह से उनके ढांचा में कोई कमज़ोरी तो नहीं आयी है? जब तक इन दोनों बातों की पुष्टि नहीं होती है, तब तक किसी को इन में रहने देना शायद प्रशासन की और से लापरवाही होगी।  और जिन परिवारों की यह भवन आवंटित किए जाएंगे उनकी जान को जोखिम में डालने के तुल्य होंगे  एक कल्याणकारी राज्य वेलफेयर स्टेट में यह ना तो प्रशासनिक स्तर पर उचित है और नहीं मानवीय दृष्टिकोण से उचित है

5. जिस जल्दबाजी एवं लापरवाही से इस कार्यवाही को किया जा रहा है, उससे जनता के बीच में यह आशंका पैदा हो रही है कि सरकार एलिवेटेड रोड एवं अन्य विनाशकारी परियोजनाओं के लिए लोगों को हटाना चाह रही है और इसके लिए इस क्षेत्र को वह उदहारण बनाना चाह रही है। हम प्रशासन को याद दिलाना चाहेंगे कि एलिवेटेड रोड जैसे परियोजनाओं के खिलाफ शहर भर में लोगों ने आवाज़ उठाया है और अगर उसके लिए प्रशासन गैर क़ानूनी कदम उठा रहा है, यह बेहद निंदनीय एवं जन विरोधी है।

अतः हमारा आपसे निवेदन है कि MDDA की इस गैर क़ानूनी प्रक्रिया में नगर निगम किसी भी प्रकार का सहयोग न करे और काठ बंगले के फ्लैट की सुरक्षा को ले कर पुष्टि होने के बाद नगर निगम सही में ज़रूरतमंद परिवारों को उनकी सहमति के बाद उनका आवंटन किया जाए।

 

देहरादून। काठ बंगला बस्ती के लोगों में एमडीडीए (MDDA) द्वारा जारी किए गए नोटिस को लेकर आक्रोश है। इसी के विरोध में चेतना आंदोलन के बैनर तले बस्तीवासी बुधवार, 26 नवंबर को नगर निगम देहरादून का घेराव करेंगे। यह प्रदर्शन दोपहर एक बजे आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी शामिल होने की तैयारी में हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मार्च 2016 से पहले बसी बस्तियों के लिए सरकार द्वारा तीन साल का अध्यादेश लाया गया है जो 2027 तक प्रभावी है। ऐसे में किसी भी प्रकार से लोगों को हटाना कानूनन गलत है।

बस्ती वासियों का कहना है कि एमडीडीए द्वारा अचानक भेजे गए नोटिस ने उन्हें मानसिक दबाव में डाल दिया है और उनके सिर पर उजाड़े जाने की तलवार लटका दी है। स्थानीय लोगों को आरोप है कि नोटिस जारी करने से पहले न तो उचित जानकारी दी गई और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था प्रस्तावित की गई। इसी के विरोध में सामूहिक रूप से आवाज उठाने का निर्णय लिया गया है।

चेतना आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि यह सिर्फ एक बस्ती का मुद्दा नहीं, बल्कि हज़ारों गरीब और मेहनतकश परिवारों के जीवन और आजीविका से जुड़ा सवाल है। उनका कहना है कि विकास के नाम पर वर्षों से बसे लोगों को बिना संवाद और बिना पुनर्वास योजना के उजाड़ना अमानवीय है।

बस्तीवासियों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग की है कि:

एमडीडीए द्वारा जारी नोटिस तुरंत वापस लिया जाए।

स्थानीय निवासियों से संवाद स्थापित कर समाधान खोजा जाए।

पुनर्वास की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना किसी प्रकार की कार्रवाई न की जाए।

घेराव को सफल बनाने के लिए दोनों बस्तियों की महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं में इस आंदोलन को लेकर व्यापक एकजुटता देखने को मिल रही है।

चेतना आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने घोषणा की है कि जब तक नोटिस वापस नहीं लिया जाता और प्रशासन संवाद के लिए आगे नहीं आता, तब तक आंदोलन चरणबद्ध रूप से जारी रहेगा। बुधवार को होने वाला यह घेराव देहरादून में जन-आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें प्रभावित परिवार अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

देहरादून। राजधानी देहरादून के काठ बंगला क्षेत्र में MDDA (मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण) द्वारा अचानक नोटिस जारी करने के बाद विरोध के स्वर उठने लगे हैं। MDDA ने काठ बंगला में रह रहे कुछ परिवारों को नोटिस जारी कर निर्देश दिया है कि वे 15 दिन के भीतर अपना कब्ज़ा खाली कर सुमन नगर में तैयार किए गए फ्लैटों में शिफ्ट हो जाएँ।

 

अचानक जारी हुए इस नोटिस ने क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। इसे लेकर स्थानीय निवासियों ने आज काठ बंगला बस्ती में एक बड़ी बैठक आयोजित की, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग शामिल हुए।

मार्च 2016 से पहले वाली बस्तियाँ अध्यादेश के तहत सुरक्षित—चेतना आंदोलन

चेतना आंदोलन के पदाधिकारी भी बैठक में पहुंचे उन्होंने स्पष्ट कहा कि मार्च 2016 से पहले स्थापित बस्तियों पर सरकार द्वारा जारी अध्यादेश लागू है, और ऐसी बस्तियों में किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई गैरकानूनी है। उनका कहना है कि जब तक अध्यादेश की अवधि पूर्ण नहीं होती, तब तक किसी भी बस्ती को हटाया नहीं जा सकता।

नोटिस की भाषा और प्रक्रिया पर लोगों की आपत्ति

स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि mdda या प्रशासन द्वारा स्थानीय लोगों से बातचीत तक करना मुनासिब नही समझा और नोटिस जारी कर सीधे कब्ज़ा खाली करने का नोटिस भेजा गया, जिसकी भाषा को भी लोग आपत्तिजनक बता रहे हैं।

एक स्थानीय निवासी के अनुसार—

> “सरकार और MDDA को पहले बस्ती में आकर लोगों से बातचीत कर समाधान का प्रयास करना चाहिए था। बिना संवाद के बेदखली का आदेश देना जनता के साथ अन्याय है।

कांग्रेस नेता लालचंद शर्मा भी आए समर्थन में

MDDA की इस कार्रवाई का राजनीतिक विरोध भी शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता लालचंद शर्मा ने नोटिस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विकास प्राधिकरण को इतने बड़े फैसले से पहले स्थानीय लोगों से चर्चा करनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि
> “MDDA को सौहार्दपूर्ण ढंग से बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए। लोगों के साथ जबरदस्ती की जाएगी तो कांग्रेस हर स्तर पर इसका विरोध करेगी।”

कांग्रेस नेता के समर्थन के बाद स्थानीय लोगों का आंदोलन और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

नगर निगम और MDDA का घेराव करने की तैयारी

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय हुआ कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया, तो आगामी दिनों में नगर निगम और MDDA कार्यालय का घेराव किया जाएगा। लोगों का कहना है कि वे किसी भी अवैध कार्रवाई के सामने झुकेंगे नहीं और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी व लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ेंगे।