कूड़ेदान में शैलजा की चिट्ठी! हरदा के आगे नाकाम हुई कांग्रेस प्रभारी की नसीहत?

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हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा पर कांग्रेस हाईकमान सख्त: सैलजा की चिट्ठी के बाद दिल्ली तलब, फिर भी नहीं थमे हरदा के कदम, प्रभारी ने कहा—बिना संगठन से चर्चा के समानांतर कार्यक्रम पार्टी हित में नहीं, रावत बोले—जनता के बीच जाना जारी रहेगा

देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर पार्टी नेतृत्व ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी एवं महासचिव कुमारी शैलजा ने रावत को पत्र भेजकर यात्रा और कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया है। इसके बाद कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा रावत को दिल्ली तलब किए जाने की खबर सामने आई है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि पार्टी नेतृत्व की आपत्ति के बावजूद रावत ने अपनी राजनीतिक जनसंपर्क गतिविधियों को रोकने के बजाय आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं। सोमवार को उन्होंने जसपुर से हल्द्वानी तक के कार्यक्रम का ऐलान करते हुए कहा कि ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ के इस दौर में अब रुकना नहीं है।

चिट्ठी ने बढ़ाई सियासी गर्मी
कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने 1 अक्टूबर को हरीश रावत को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में चल रही यात्रा के संबंध में न तो उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से चर्चा की गई। शैलजा ने यह भी कहा कि रावत के हालिया कुछ बयानों को लेकर खबरें सामने आई हैं। पत्र में आगामी विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस समय पार्टी को एकजुट होकर काम करने की जरूरत है और ऐसे दौर में कोई भी समानांतर कार्यक्रम पार्टी के हित में नहीं होगा। उन्होंने रावत से इन कार्यक्रमों को आगे न बढ़ाने का अनुरोध किया। यानी कांग्रेस नेतृत्व की आपत्ति केवल यात्रा के कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पीछे संगठनात्मक समन्वय और चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता का सवाल भी जुड़ा हुआ है।

दिल्ली से आया संदेश, वेणुगोपाल ने किया तलब
मामला प्रदेश स्तर से आगे बढ़कर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच गया है। रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत को दिल्ली बुलाया है। नेतृत्व की चिंता रावत की व्यक्तिगत राजनीतिक यात्राओं और उन्हें पार्टी की चुनावी रणनीति के साथ समन्वित करने को लेकर बताई जा रही है। इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी समन्वय को लेकर चल रही चर्चाओं को और हवा दे दी है।

रावत का रुख—‘रुकना नहीं है’
दूसरी ओर हरीश रावत ने अपने कार्यक्रम को लेकर जो संदेश दिया, उससे साफ है कि वे फिलहाल जनता के बीच अपनी सक्रियता कम करने के पक्ष में नहीं दिख रहे।
रावत ने सोशल मीडिया पर जसपुर से हल्द्वानी तक यात्रा के कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए कहा कि चुनौती बड़ी है, लेकिन उत्तराखंड के स्वाभिमान के लिए उनका संकल्प दृढ़ है। उन्होंने जनता से संवाद और राज्य के मुद्दों को आगे बढ़ाने की बात कही। इससे पहले रावत यह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी यात्रा का उद्देश्य किसी समानांतर संगठन या व्यवस्था को खड़ा करना नहीं, बल्कि पार्टी और संगठन को मजबूत करना तथा जनता से सीधा संवाद स्थापित करना है।

यात्रा का मकसद क्या बता रहे हैं रावत?
रावत की ओर से आयोजित इस यात्रा को किसानों, व्यापारियों और आम लोगों से संवाद तथा उनके मुद्दों को समझने के कार्यक्रम के तौर पर पेश किया गया है। यात्रा के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय कार्यकर्ताओं और लोगों की भागीदारी भी देखने को मिली है। रामनगर में स्थानीय स्तर पर यात्रा की तैयारियों को लेकर बैठक होने की रिपोर्ट भी सामने आई थी। यात्रा इससे पहले हरिद्वार ग्रामीण, लक्सर और खानपुर जैसे क्षेत्रों से भी जुड़ी रही है।

कांग्रेस के सामने असली चुनौती—एक मंच, एक रणनीति
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। एक तरफ पार्टी का केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व संगठन को चुनावी रणनीति के तहत एकजुट रखने पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ हरीश रावत जैसे वरिष्ठ नेता लगातार जनता के बीच अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं।
सैलजा की चिट्ठी में ‘समानांतर कार्यक्रम’ पर आपत्ति और उसके बाद रावत को दिल्ली बुलाए जाने की खबर यह संकेत देती है कि केंद्रीय नेतृत्व पार्टी कार्यक्रमों और व्यक्तिगत राजनीतिक गतिविधियों के बीच स्पष्ट समन्वय चाहता है।

क्या यात्रा बनेगी कांग्रेस के लिए नया विवाद?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा आगे किस रूप में जारी रहती है और दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत का क्या नतीजा निकलता है।
एक तरफ पार्टी प्रभारी ने यात्रा को आगे न बढ़ाने की सलाह दी है, वहीं रावत ने सार्वजनिक रूप से अपनी अगली यात्रा का कार्यक्रम जारी किया है। ऐसे में उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, यह कहना कि कांग्रेस हाईकमान ने रावत के खिलाफ कोई अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी है, अभी उपलब्ध पुष्ट जानकारी से आगे की बात होगी। अभी तथ्य यह है कि प्रदेश प्रभारी ने यात्रा पर आपत्ति जताई है, उसे आगे न बढ़ाने का अनुरोध किया है और केंद्रीय संगठन स्तर पर रावत को दिल्ली बुलाए जाने की खबर है।

उत्तराखंड कांग्रेस में चुनावी तैयारियों के बीच हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा अब महज जनसंपर्क कार्यक्रम नहीं रह गई है। संगठन की अनुमति, पार्टी की एकजुटता और वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक सक्रियता—तीनों सवाल एक साथ सामने आ गए हैं। रावत का जनता के बीच सक्रिय रहना और हाईकमान का संगठनात्मक अनुशासन पर जोर, आने वाले दिनों में इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।