सरकारी जमीन पर कब्जे और अतिक्रमण की शिकायतों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश, राजस्व-पुलिस समेत सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्रवाई के आदेश
देहरादून। भूमि संबंधी धोखाधड़ी, सरकारी जमीन पर कब्जे, फर्जी दस्तावेजों के जरिए भूमि हस्तांतरण और अवैध प्लॉटिंग के मामलों को लेकर गढ़वाल मंडल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। आयुक्त गढ़वाल मंडल आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में गुरुवार को आयुक्त शिविर कार्यालय, ईसी रोड देहरादून में आयोजित लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में मंडल के विभिन्न जनपदों से आए 56 मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में 12 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि 8 मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने और एक मामले में एसआईटी जांच के आदेश दिए गए। शेष 35 मामलों में विस्तृत जांच कर तथ्यात्मक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए।
आयुक्त आनंद स्वरूप ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भूमि धोखाधड़ी के मामलों में जांच प्रभावी, निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भूमि संबंधी फर्जीवाड़े में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सरकारी भूमि पर अतिक्रमण अथवा कब्जे की शिकायतों को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज न किया जाए और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जांचकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बैठक में प्रस्तुत 56 प्रकरणों में से 12 मामलों का निस्तारण किया गया। वहीं 8 मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। एक प्रकरण को एसआईटी जांच के लिए भेजने के आदेश दिए गए। शेष 35 मामलों में संबंधित उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों और विभागीय अधिकारियों को अभिलेखों एवं उपलब्ध तथ्यों का गहन परीक्षण कर विस्तृत जांच आख्या प्रस्तुत करने को कहा गया है। आयुक्त ने राजस्व, पुलिस, नगर निकाय, एमडीडीए और अन्य संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि विवाद या धोखाधड़ी के मामलों में केवल वर्तमान अभिलेखों को आधार न बनाया जाए, बल्कि आवश्यकता के अनुसार पुराने राजस्व अभिलेख, खसरा- खतौनी, नक्शे, रजिस्ट्री तथा अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाए, ताकि भूमि के वास्तविक स्वामित्व और हस्तांतरण की स्थिति स्पष्ट हो सके।
आयुक्त ने सभी उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों तथा नगर निगम एवं नगर निकाय के अधिकारियों को सरकारी भूमि पर कब्जे और अतिक्रमण की शिकायतों का प्राथमिकता से परीक्षण करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि जांच में सरकारी भूमि पर फर्जीवाड़े या अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो संबंधित विभाग तत्काल आपसी समन्वय से नियमानुसार कार्रवाई करें। पुलिस विभाग को भी निर्देशित किया गया कि भूमि धोखाधड़ी से संबंधित मामलों में तहरीर मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपराध पाए जाने पर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए गए। राजस्व और पुलिस विभाग को ऐसे मामलों में समन्वित तरीके से प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया।
बैठक में हरिद्वार जिले के बहादराबाद क्षेत्र में ग्रामसभा की भूमि पर खेती किए जाने के मामले की भी समीक्षा हुई। आयुक्त ने यह पता लगाने के निर्देश दिए कि संबंधित भूमि पर खेती की अनुमति किसके निर्देश पर दी गई। साथ ही संबंधित फसल को नियमानुसार कुर्क करने की कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। हरिद्वार में ‘केसर हिंद’ के नाम पर दर्ज भूमि के अन्य व्यक्तियों के नाम हस्तांतरण के मामले में भी आयुक्त ने गंभीरता से जांच के निर्देश दिए। उन्होंने भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया, राजस्व अभिलेखों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने को कहा। कनखल में लैंड फ्रॉड के एक मामले में संबंधित प्रॉपर्टी डीलर के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। आयुक्त ने दोहराया कि भूमि संबंधी धोखाधड़ी में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
देहरादून की 70 बीघा भूमि के हस्तांतरण की होगी जांच
देहरादून के भारूवाला क्षेत्र में एंग्लो इंडियन एवं डोमिसाइल समिति की करीब 70 बीघा भूमि अन्य व्यक्तियों के नाम हस्तांतरित होने के मामले को भी बैठक में प्रमुखता से उठाया गया। आयुक्त ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही संबंधित समिति का अधिनियम प्राप्त कर उसके बायलॉज का परीक्षण करने और भूमि हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया की जांच करने को कहा गया।
राजपुर रोड पर बहुउद्देशीय वित्तीय विकास निगम की भूमि से जुड़े प्रकरण में नगर निगम को संपूर्ण विवरण एवं संबंधित अभिलेखों के साथ विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।कोटद्वार और पौड़ी में बिना अनुमति प्लॉटिंग किए जाने तथा निर्धारित अंश से अधिक भूमि बेचे जाने के मामलों पर भी अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए। आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों से तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट एवं तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने कहा कि भूमि संबंधी मामलों में दस्तावेजों की गहन जांच के बिना किसी निष्कर्ष पर न पहुंचा जाए। पुराने राजस्व रिकॉर्ड से लेकर वर्तमान रजिस्ट्री, नक्शे और खसरा-खतौनी तक सभी संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया जाए, जिससे भूमि के वास्तविक स्वामित्व और हस्तांतरण की स्थिति सामने आ सके।
आयुक्त ने कहा कि लैंड फ्रॉड जैसे मामलों में राजस्व विभाग के साथ पुलिस, नगर निकाय, एमडीडीए और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्रवाई करें और जांच में अनावश्यक विलंब न हो। बैठक में वन संरक्षक वन विभाग कल्याणी, नगर आयुक्त ऋषिकेश विजय नाथ शुक्ला, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण स्वतंत्र कुमार, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार, उप जिलाधिकारी डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल, उप जिलाधिकारी ऋषिकेश कुमकुम जोशी, जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व नितिन वशिष्ठ, उप जिलाधिकारी रुड़की, उप जिलाधिकारी कोटद्वार समेत नगर निगम, एमडीडीए और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। गढ़वाल मंडल के विभिन्न जनपदों से जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।











