दर्दनाक; करंट लगने से महिला एवं दो साल की मासूम की मौत

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 बिजली का टूटा तार बना काल—सड़क पर भरे पानी में फैला करंट, 26 वर्षीय महिला और उसकी दो वर्षीय बेटी की दर्दनाक मौत; जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

देहरादून। योग नगरी ऋषिकेश के खदरी क्षेत्र में बिजली विभाग की कथित लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। सड़क पर टूटकर गिरे बिजली के तार में करंट प्रवाहित होने और सड़क पर भरे पानी में करंट फैलने से 26 वर्षीय सुमन पत्नी हरपाल और उसकी दो वर्षीय मासूम बेटी सृष्टि की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे का सबसे हृदय विदारक पहलू यह रहा कि करंट की चपेट में आने के बाद मासूम सृष्टि ने अपनी मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। मां-बेटी की मौत की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में मातम और आक्रोश का माहौल बन गया।


जानकारी के अनुसार सुमन अपनी दो वर्षीय बेटी सृष्टि और बेटे के साथ घर लौट रही थी। क्षेत्र की सड़क पर पहले से पानी जमा था। इसी दौरान सड़क पर टूटकर गिरे बिजली के तार की चपेट में पानी आ गया। जैसे ही सुमन का पैर पानी में पड़ा, वह करंट की चपेट में आकर गिर गई। मां को गिरता देख उसकी मासूम बेटी भी उसकी चपेट में आ गई। अचानक मां और बहन को गिरते देखकर सुमन का बेटा बुरी तरह घबरा गया। वह मदद के लिए घर की ओर दौड़ा और परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजन और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। वहां सड़क पर बिजली का तार पड़ा था और स्थानीय लोगों के अनुसार उसमें करंट दौड़ रहा था।

पानी में फैला करंट, गंभीर रूप से झुलसी मां-बेटी
स्थानीय लोगों के मुताबिक बिजली के पोल से तार टूटकर सड़क पर गिरा था। सड़क पर जमा पानी ने खतरे को और बढ़ा दिया और करंट पानी में फैल गया। इसी की चपेट में आने से सुमन और उसकी बेटी सृष्टि गंभीर रूप से झुलस गईं। परिजन दोनों को आनन-फानन में एम्स ऋषिकेश लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद मां-बेटी को मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि दो वर्षीय सृष्टि ने करंट लगने के बाद अपनी मां की गोद में ही दम तोड़ दिया। यह दृश्य जिसने भी देखा, वह सन्न रह गया।


मां-बेटी की मौत की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। एम्स ऋषिकेश में बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन एकत्र हो गए और उन्होंने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर विरोध जताया। ग्रामीणों ने हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का आरोप था कि बिजली का तार टूटने के बाद यदि समय रहते विद्युत आपूर्ति बंद कर दी जाती अथवा मौके पर पहुंचकर तार को हटाया जाता तो यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई।

हादसे के बाद बिजली विभाग की ओर से अधिशासी अभियंता शक्ति सिंह ने पीड़ित परिवार को आठ लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की। हालांकि, ग्रामीण और परिजन इससे संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि दो जिंदगियां चली जाने के बाद केवल मुआवजे की घोषणा से विभाग की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर बिजली के टूटे तार की सूचना विभाग को कब मिली थी? यदि सूचना पहले मिल चुकी थी तो विद्युत आपूर्ति तत्काल क्यों नहीं रोकी गई? सड़क पर पानी भरा होने के बावजूद खतरे वाले क्षेत्र को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया? लोगों की मांग थी कि हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।


‘मौत की कीमत तय करना शर्मनाक’
ग्रामीणों ने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद परिवार की मौत की कीमत तय करना शर्मनाक है। उन्होंने जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने तथा संबंधित अधिकारियों, एमडी समेत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। उन्होंने लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को उनके पद से हटाने की भी मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना था कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की उस लापरवाही का परिणाम है जिसका खामियाजा एक परिवार ने अपनी मां और मासूम बच्ची को खोकर भुगता है।

एसडीएम ने कहा—दोषी पाए गए तो होगी कार्रवाई
ऋषिकेश की एसडीएम कुमकुम जोशी ने कहा कि विद्युत विभाग के कर्मचारियों को पहले भी कई बार सतर्क रहने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। जनप्रतिनिधियों की ओर से भी इस संबंध में जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। एसडीएम ने कहा कि जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के स्तर से समय पर कार्रवाई नहीं की गई होगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उन्हें निलंबित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे शोकाकुल परिवार को कुछ समय अकेला रहने दें।


हादसे ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल
मां-बेटी की मौत ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिजली का तार कब टूटा और इसकी जानकारी विभाग को कब मिली? यदि तार सड़क पर गिरा था तो वहां विद्युत आपूर्ति तत्काल क्यों नहीं रोकी गई? पानी से भरी सड़क को सुरक्षित करने के लिए समय रहते कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल ग्रामीण और परिजन निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारी तय करने और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। एक मां और उसकी मासूम बेटी की असमय मौत ने पूरे खदरी क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। सड़क पर पड़ा एक टूटा बिजली का तार दो जिंदगियों को निगल गया और पीछे छोड़ गया एक ऐसा सवाल, जिसका जवाब अब सिर्फ जांच से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय होने और कार्रवाई से ही मिलेगा—आखिर अगर लापरवाही थी, तो उसके लिए जवाबदेह कौन है?