7,375 वन सीमा स्तंभ हो गए गायब? हाईकोर्ट ने CBI समेत कई को घेरा साथ ही वन अधिकारियों की संपत्ति की जांच के दिए आदेश, 11 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
नैनीताल/देहरादून। उत्तराखंड के जंगलों से जुड़े अब तक के सबसे गंभीर मामलों में से एक में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए 7375 वन सीमा स्तंभ (Boundary Pillars) के लापता होने की जांच के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने इस मामले में CBI, केंद्र सरकार, उत्तराखंड सरकार, भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) और केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) को नोटिस जारी किए हैं। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने मसूरी वन प्रभाग में पिछले कुछ वर्षों से तैनात क्षेत्रीय वन अधिकारियों की संपत्तियों में कथित असामान्य वृद्धि की भी जांच करने को कहा है। सभी पक्षों को 6 सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी 2026 को होगी।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इतनी बड़ी संख्या में वन सीमा स्तंभों के गायब होने को लेकर गहरी नाराज़गी व्यक्त की और इसे वन संरक्षण के लिए बेहद चिंताजनक बताया।
क्या है पूरा मामला?
यह याचिका पर्यावरण मित्र नरेश चौधरी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई है कि:
मसूरी वन प्रभाग के सभी वन क्षेत्रों का वैज्ञानिक, व्यापक और जियो-रीफरेस्ड सर्वेक्षण कराया जाए
सभी लापता सीमा स्तंभों की सटीक लोकेशन तय कर उन्हें दोबारा स्थापित किया जाए
प्रभावित क्षेत्रों के लिए पुनर्स्थापन, पुनर्वास और पुनरुद्धार योजना लागू की जाए
वर्तमान में राजस्व विभाग के नियंत्रण में मौजूद समस्त वन भूमि को समयबद्ध तरीके से वन विभाग को सौंपा जाए
2023 में सामने आया था बड़ा खुलासा
यह चौंकाने वाला मामला वर्ष 2023 में तब सामने आया, जब तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक (वर्किंग प्लान) संजीव चतुर्वेदी ने मसूरी वन प्रभाग के सीमा स्तंभों का सर्वेक्षण कराने के आदेश दिए।

तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) मसूरी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि:
कुल 12,321 वन सीमा स्तंभों में से
7375 सीमा स्तंभ मौके से पूरी तरह लापता पाए गए
सबसे गंभीर तथ्य यह था कि इनमें से करीब 80% सीमा स्तंभ केवल दो रेंज – मसूरी रेंज और रायपुर रेंज में गायब मिले।
रियल एस्टेट से जुड़ा एंगल?
मसूरी और रायपुर रेंज को रियल एस्टेट के लिहाज़ से अत्यंत संवेदनशील और लाभकारी क्षेत्र माना जाता है। इन इलाकों में:
लक्ज़री आवासीय प्रोजेक्ट
के लिए बड़े पैमाने पर संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे में सीमा स्तंभों का गायब होना अवैध कब्जे और वन भूमि के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।
CBI और ED जांच की मांग
जून और अगस्त 2025 में संजीव चतुर्वेदी ने उत्तराखंड के वन प्रमुख (HoFF) को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की थी।
इन पत्रों में यह भी उल्लेख किया गया कि:
संबंधित क्षेत्रीय वन अधिकारियों के नाम
बड़ी मात्रा में अचल संपत्तियों का संचय सामने आया है
जिसकी जांच बेहद जरूरी है
केंद्र सरकार ने भी जताई चिंता
अगस्त 2025 में केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय ने भी उत्तराखंड सरकार को पत्र लिखकर इस प्रकरण की जांच और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था। पत्र में वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के उल्लंघन से जुड़े मामलों पर गंभीरता से कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था।









