देहरादून। शनिवार को सैकड़ों निर्माण मजदूरों ने उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। मजदूरों का आरोप है कि बोर्ड नियमों के विपरीत कार्य करते हुए पंजीकृत निर्माण मजदूर यूनियनों द्वारा जारी प्रमाण पत्रों को अस्वीकार कर रहा है, जिसके कारण असली और पात्र मजदूर योजना से वंचित हो रहे हैं।
चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने बोर्ड के देहरादून स्थित कार्यालय में 288 मजदूरों की ओर से हस्ताक्षरित पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में राजेंद्र शाह, सुनीता देवी, अशोक कुमार, जयप्रकाश, रामु सोनी और अरुण तांती शामिल रहे। ज्ञापन में मांग की गई है कि पूर्व की भांति यूनियनों के प्रमाण पत्रों को पुनः मान्यता दी जाए ताकि वास्तविक मजदूरों का पंजीकरण और नवीनीकरण सुचारु रूप से हो सके।
मजदूरों ने आरोप लगाया कि पहले उनका पंजीकरण या नवीनीकरण यूनियनों के माध्यम से आसानी से हो जाता था, लेकिन वर्तमान में यह प्रक्रिया बाधित कर दी गई है। इसके चलते मजदूरों को नेताओं, ठेकेदारों और कथित दलालों पर निर्भर होना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि किसी यूनियन द्वारा दुरुपयोग की आशंका है तो संबंधित यूनियन पर कार्रवाई की जाए, लेकिन सभी यूनियनों को प्रक्रिया से बाहर कर देना न्यायसंगत नहीं है। ज्ञापन में कहा गया है कि इस व्यवस्था से वास्तविक मजदूरों के सामने पंजीकरण का कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं बचता, जिससे वे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।
बोर्ड की कार्यप्रणाली पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
गौरतलब है कि यह बोर्ड राज्य के गरीब एवं वंचित निर्माण मजदूरों के लिए विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाएं संचालित करता है। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में इसकी कार्यप्रणाली विवादों में रही है।
2024 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया था कि पात्र मजदूरों में से केवल लगभग 10 प्रतिशत का ही पंजीकरण हुआ है। इतना ही नहीं, जिनका पंजीकरण हुआ, उनमें से लगभग 50 प्रतिशत लोग वास्तविक मजदूर नहीं पाए गए। इससे पहले वर्ष 2021 और 2022 में बोर्ड की सामान वितरण प्रक्रिया में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद शासन स्तर पर तीन बार जांच बैठाई गई थी।हाल में प्रक्रियाओं में किए गए नए बदलावों के बाद एक बार फिर विवाद खड़ा होता दिख रहा है। मजदूरों ने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी यूनियन द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाए और दुरुपयोग रोकने के लिए आवश्यक शर्तें लागू की जाएं। लेकिन यूनियनों के प्रमाण पत्रों को पूर्णतः अस्वीकार करना हजारों वास्तविक मजदूरों के हितों के खिलाफ है। मजदूरों ने बोर्ड से अपील की है कि नियमों के अनुरूप यूनियन प्रमाण पत्रों को पुनः मान्यता देकर पंजीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाया जाए, ताकि कोई भी पात्र मजदूर योजनाओं से वंचित न रहे।












