हल्द्वानी में मंच के कथित “शुद्धिकरण” को लेकर देहरादून में कांग्रेस का प्रदर्शनात्मक विरोध, धारा चौकी में सौंपा एफआईआर का प्रार्थना पत्र; डॉ. गोगी ने कहा—मामला सिर्फ खड़गे के सम्मान का नहीं, दलित समाज और संविधान की गरिमा से जुड़ा
देहरादून। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद मंच के कथित “शुद्धिकरण” को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। महानगर कांग्रेस कमेटी ने इस घटना को जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता की मानसिकता का प्रतीक बताते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह ‘गोगी’ के नेतृत्व में कांग्रेस पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सोमवार को धारा चौकी, कोतवाली देहरादून पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र सौंपा। कांग्रेस ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खड़गे की जनसभा के बाद मंच के कथित “शुद्धिकरण” और उसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट द्वारा दिए गए बयानों को गंभीर मामला बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की।
डॉ. जसविंदर सिंह ‘गोगी’ ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे केवल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं हैं, बल्कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में उनके साथ जातिगत आधार पर कथित भेदभाव का संदेश देने वाली घटना को किसी भी स्थिति में सामान्य राजनीतिक बयानबाजी या राजनीतिक विवाद कहकर खारिज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि मंच का तथाकथित “शुद्धिकरण” सामाजिक समरसता की भावना के खिलाफ है और इससे अनुसूचित जाति समाज की भावनाओं को गहरी चोट पहुंची है। यह मानसिकता संविधान की उस भावना पर सीधा प्रहार है, जिसमें हर नागरिक को समान अधिकार और सम्मान की गारंटी दी गई है। डॉ. गोगी ने मांग की कि मामले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और दोष पाए जाने पर एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम सहित संबंधित धाराओं में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन ने इस पूरे प्रकरण को संरक्षण दिया है तो उसकी भूमिका भी कानून के दायरे में लाई जानी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 17 का उल्लेख करते हुए कहा कि देश का संविधान कानून के समक्ष समानता और अस्पृश्यता के उन्मूलन की स्पष्ट व्यवस्था करता है। ऐसे में जाति के आधार पर किसी व्यक्ति के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कोई भी कृत्य लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। कांग्रेस का कहना है कि संविधान केवल किताब में लिखे प्रावधानों का नाम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की गरिमा और समानता की गारंटी है। इसलिए जातिगत भेदभाव के आरोपों पर राजनीतिक रसूख या दलगत प्रभाव से ऊपर उठकर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि मामले में शीघ्र एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई तो पार्टी इस मुद्दे को प्रदेश स्तर पर उठाएगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से प्रदेशव्यापी जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हाजी सुलेमान अंसारी ने कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के मुद्दे पर पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि जाति के नाम पर किसी के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से खिलवाड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी। एफआईआर की मांग को लेकर दिए गए प्रार्थना पत्र के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष सुलेमान अंसारी, प्रदेश प्रवक्ता डा. प्रतिमा सिंह, प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट, प्रीतम आर्य, सुनील जायसवाल, संजय कन्नौजिया, देवेंद्र सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष वीरेंद्र पंवार, संजय उनियाल, पार्षद मुकीम अहमद भूरा, पूर्व पार्षद इलियास अंसारी, मुकेश सोनकर, अर्जुन पासी, अरुण शर्मा, गगन छाजर, आदर्श सूद, राजीव प्रजापति, अनूप कपूर, नीरू सिंह, दीपक गुप्ता, अमनदीप सिंह और पुष्पा पंवार सहित अनेक कार्यकर्ता शामिल रहे। कांग्रेस नेताओं ने एक स्वर में कहा कि मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान, समानता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का है। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग दोहराई।














