SIR; महाराष्ट्र में कटे 2.07 करोड़ वोट, दिल्ली में भी 47.56 लाख नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर

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नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद दिल्ली और महाराष्ट्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। दिल्ली में 47 लाख 56 हजार 722 लोगों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं हैं, जबकि महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ नाम सूची से बाहर बताए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नामों के ड्राफ्ट सूची में नहीं होने के बाद अब राजनीतिक दलों की नजर दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पर है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सामने आने के साथ ही यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में नाम किन वजहों से सूची में शामिल नहीं हो पाए और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के बाद इनमें से कितने नाम अंतिम मतदाता सूची में वापस जुड़ेंगे। हालांकि, ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हट जाना नहीं है। अब प्रभावित लोगों को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में SIR के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 47,56,722 नामों का नहीं होना राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। दिल्ली में चुनावी राजनीति पहले से ही बेहद प्रतिस्पर्धी रही है और ऐसे में मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव ने राजनीतिक दलों का ध्यान खींचा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं मिलने वाले लोगों में कितने पात्र मतदाता हैं और दावा-आपत्ति के बाद कितने नाम दोबारा जोड़े जाते हैं। यही वजह है कि अगले चरण में निर्वाचन अधिकारियों के साथ-साथ राजनीतिक दल भी मतदाता सूची की प्रक्रिया पर करीबी नजर रख सकते हैं।

महाराष्ट्र में भी SIR के बाद करीब 2.07 करोड़ लोगों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर बताए गए हैं। राज्य में इतने बड़े पैमाने पर नामों का ड्राफ्ट सूची में नहीं होना राजनीतिक तौर पर भी बड़ा मुद्दा बन सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पहले भी बेहद संवेदनशील रहे हैं। ऐसे में अब विपक्षी दल जहां इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठा सकते हैं, वहीं निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी दावा-आपत्ति के माध्यम से पात्र मतदाताओं के नाम शामिल किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।

दिल्ली और महाराष्ट्र के आंकड़े सामने आने के बाद SIR को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने को लेकर विपक्षी दल सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठा सकते हैं। वहीं, चुनावी प्रक्रिया का समर्थन करने वाले पक्ष का तर्क हो सकता है कि ड्राफ्ट सूची के बाद हर पात्र व्यक्ति को दावा दाखिल करने का अवसर दिया गया है।
यानी फिलहाल राजनीतिक बहस का केंद्र केवल यह नहीं होगा कि कितने नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हैं, बल्कि यह भी होगा कि इनमें से कितने नाम अंतिम सूची में वापस शामिल होते हैं।

हालांकि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं मिलने वाले लोगों के लिए अभी रास्ता बंद नहीं हुआ है। संबंधित मतदाता 30 सितंबर तक दावा-आपत्ति दर्ज करा सकता है। यही चरण अब पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम होने जा रहा है। पात्र मतदाता अपने नाम को अंतिम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा कर सकते हैं। निर्वाचन अधिकारियों द्वारा दावों और आपत्तियों की जांच के बाद आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसलिए ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं मिलने वाले मतदाताओं के लिए संदेश साफ है—ड्राफ्ट लिस्ट अंतिम नहीं है, लेकिन दावा करने की समयसीमा जरूर तय है।

4 नवंबर को साफ होगी पूरी तस्वीर
दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक 4 नवंबर को फाइनल वोटर लिस्ट सामने आएगी। तभी यह साफ हो सकेगा कि दिल्ली में ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए 47,56,722 नामों और महाराष्ट्र में बाहर हुए करीब 2.07 करोड़ नामों में से कितने नाम जांच और दावे के बाद वापस जोड़े गए और कितने नाम अंतिम सूची से बाहर रहे। SIR के बाद अब राजनीतिक दलों के लिए भी बड़ा काम सामने है। बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होने के कारण पार्टियां अपने-अपने स्तर पर मतदाता सूची की जांच और समर्थकों के नामों की स्थिति पर नजर रख सकती हैं।
राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो 30 सितंबर तक की दावा-आपत्ति प्रक्रिया और 4 नवंबर की फाइनल वोटर लिस्ट आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है। खासकर दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में मतदाता सूची में हुए बदलावों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

फिलहाल सबसे बड़े आंकड़े
दिल्ली: 47,56,722 नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर
महाराष्ट्र: करीब 2.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर
दावा-आपत्ति की आखिरी तारीख: 30 सितंबर
फाइनल वोटर लिस्ट: 4 नवंबर
अब नजर इस बात पर रहेगी कि 30 सितंबर तक कितने दावे और आपत्तियां दाखिल होती हैं और 4 नवंबर को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम वापस जगह बना पाते हैं।