54 सहकारी समितियों को नोटिस, 14 अप्रैल तक जवाब नहीं तो रद्द होगा पंजीकरण

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देहरादून। उत्तराखंड में सहकारिता चुनाव से ठीक पहले निष्क्रिय और कागजों में चल रही सहकारी समितियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। निबंधक सहकारिता की जांच में गड़बड़ियां मिलने के बाद 54 समितियों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन सभी समितियों को 14 अप्रैल तक अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय सीमा में संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनका पंजीकरण निरस्त किया जा सकता है।

हरिद्वार जिले की सहकारी समितियों के खिलाफ शिकायतकर्ता सुशील कुमार द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद निबंधक सहकारिता कार्यालय ने जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब की। डीएम स्तर पर हरिद्वार, रुड़की, लक्सर और भगवानपुर क्षेत्रों में जांच कराई गई, जिसमें बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आईं।
जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं—
कई समितियां अपने पंजीकृत पते पर मौजूद ही नहीं मिलीं
ऑडिट रिपोर्ट और बैलेंस शीट में भारी गड़बड़ी
निर्धारित पैनल की बजाय एक ही CA फर्म से ऑडिट
कई बैलेंस शीट पर एक ही व्यक्ति के हस्ताक्षर
विभिन्न मदों में एक जैसी रकम दर्ज
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ये समितियां केवल कागजों में संचालित हो रही थीं और अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप कार्य नहीं कर रही थीं।

अपर निबंधक सहकारिता ईरा उपरेती के अनुसार, सभी 54 समितियों के अध्यक्षों और सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर उनका पंजीकरण क्यों न निरस्त किया जाए। इस कार्रवाई के राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकते हैं। कांग्रेस ने पहले भी ऐसी कार्रवाई को राजनीतिक बताया है। दून के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पोखरियाल का कहना है कि यदि कांग्रेस समर्थित समितियों को निशाना बनाया गया तो इसका विरोध किया जाएगा। कुल मिलाकर, उत्तराखंड में सहकारिता व्यवस्था को पारदर्शी और सक्रिय बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है। अब सबकी नजर 14 अप्रैल की डेडलाइन और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।