सरकार द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की संस्तुति पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल की प्रेस वार्ता
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद भी इस मामले में घमासान जारी है। शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की संस्तुति किए जाने पर प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धामी द्वारा पहले दिन से जांच को भटकाने का काम कर उत्तराखंड की मातृशक्ति और उत्तराखंड की अस्मिता पर प्रश्न लगा कर अपमानित करने के लिए धामी जी को हमेशा जाना जाएगा।

उन्होंने मांग करते हुए कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच की संस्तुति के लिए भेजे गए प्रतिवेदन में टर्म्स ऑफ रिफरेंस सार्वजनिक करे और यह साफ करें कि क्या यह जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में किए जाने की सिफारिश की गई है। टर्म्स ऑफ रिफरेंस या विचारार्थ विषय से यह स्पष्ट हो जाता है कि जांच किन बिंदुओं पर किया जाना है परंतु सरकार उन बिंदुओं को सीमित करके संभावित वीआईपी के होने या ना होने पर केंद्रित करके जांच को भटका रही है। इसमें कतई कोई संशय नहीं है कि वीआईपी है तथा जांच में वीआईपी को पता लगाने की बात होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस या जांच के दायरे में सरकार को निम्न बिंदुओं को सम्मिलित करना चाहिए:
1. जिस दौरान अंकिता भंडारी वनांतरा रिजॉर्ट में कार्य कर रही थी और जब तक उसकी हत्या हुई, उसके फोन पर जिन लोगों के फोन आए सीबीआई जांच उसे रिकॉर्ड में लाए और तत्पश्चात, वे सार्वजनिक हो।
2. अंकिता भंडारी और उसके मित्र पुष्पदीप के व्हाट्सएप चैट की प्रमाणिकता कर बताए कि वे चैट क्या अंकिता की ही थी।
3. जो अपराधी साबित हो चुके हैं उनकी व्हाट्सएप और कॉल डिटेल सीबीआई द्वारा शामिल किया जाए।
4. यमकेश्वर की विधायक रेणु बिष्ट द्वारा अंकिता के शव की बरामदगी के बाद मुख्यमंत्री आवास से मुख्यमंत्री के अलावा जिन दो लोगों से उनकी वार्ता हुई वे लोग कौन थे और मुख्यमंत्री ने उनसे क्या-क्या बात की?
5. रेनू बिष्ट के गवाही एसआईटी के समक्ष हुई परंतु उनकी गवाही कोर्ट में क्यों नही हुई?
6. घटनास्थल की सुरक्षा एसआईटी की जिम्मेदारी थी परंतु घटनास्थल से साक्ष्य मिटाने की कार्यवाही किसके आदेशों पर हुई और पुलिस द्वारा इसको क्यों नहीं रोका गया?
गोदियाल ने कहा कि प्रदेश की जनता, सामाजिक संगठन, राजनीतिक दल ने यह ठाना है कि तटस्थ और ईमानदार जांच के लिए 11 जनवरी 2026 को बंद का आह्वान किया है जिसका कांग्रेस पार्टी पुरजोर तरीके से समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि सरकार उनके ऊपर जितने भी मुकदमे करना चाहे, वे कर ले परंतु आमजन, युटयुबर्स, सामाजिक संगठन, राजनीतिक दलों से संबंधित लोगों को प्रताड़ित करना बंद करें और तुरंत किए गए समस्त केस वापस ले। सभी विसलब्लोअर्स जो सरकार पर सवाल उठा रहे हैं उनकी लड़ाई को कांग्रेस पार्टी लड़ेगी।
गोदयाल ने कहा कि हल्द्वानी की ज्योति अधिकारी द्वारा वीआईपी के संदर्भ में सांकेतिक रूप में दराती उठाई गई और सरकार ने उसे पर आपराधिक मामला दर्ज कर जेल में डाल दिया जो नामंजूर है। ऐसे करतूत से सरकार बाज आए वरना कांग्रेस पार्टी लोगों की प्रताड़ना पर आंदोलन करेगी।

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की संस्तुति दिए जाने पर कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह फैसला कोई नैतिक साहस नहीं, बल्कि जनता के बढ़ते दबाव और पीड़ित परिवार की लगातार गुहार का परिणाम है। कांग्रेस शुरू से ही इस प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग करती रही है, लेकिन सरकार ने लंबे समय तक मामले को दबाने और गुमराह करने का प्रयास किया। शर्मा ने कहा कि यदि सरकार वाकई संवेदनशील और न्यायप्रिय होती, तो स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता को वर्षों तक दर–दर की ठोकरें न खानी पड़तीं। तीन साल तक सत्ता के संरक्षण में सच्चाई को दबाने की कोशिश की गई, अब जब जनाक्रोश चरम पर है तब मजबूरी में सीबीआई जांच की संस्तुति दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में “वीआईपी” को बचाने की मंशा से शुरुआत में जांच को कमजोर किया गया। आज भी सवाल कायम है कि आखिर इतना वक्त क्यों लगाया गया? क्या सरकार जवाबदेही से बचना चाहती थी?


कांग्रेस नेता ने कहा कि हमारी लड़ाई सिर्फ सीबीआई जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि दोषियों को सख्त से सख्त सज़ा दिलाने और न्याय सुनिश्चित कराने की है। कांग्रेस पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और जब तक अंकिता को पूरा न्याय नहीं मिलेगा, तब तक चुप नहीं बैठेगी। शर्मा ने सरकार से मांग की कि सीबीआई जांच को समयबद्ध बनाया जाए, किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को संरक्षण न मिले और जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में किसी भी तरह की लीपापोती हुई, तो कांग्रेस सड़कों से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेशभर में राजनीतिक माहौल पूरी तरह से गर्माया हुआ है। कांग्रेस अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग और कथित वीवीआईपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन कर रही है। राजधानी देहरादून के सहस्त्रधारा रोड किरसाली चौक पर भी सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए आज यूथ कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तथाकथित वीआईपी की तत्काल गिरफ्तारी तथा पूरे प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई से कराए जाने की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए प्रतीकात्मक पुतला दहन किया।

यह प्रदर्शन यूथ कांग्रेस नेता सुहैल अली, अनुराग मित्तल, दीपांशु पंवार के नेतृत्व में हुआ।प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारे लगाए। नारेबाजी के दौरान “महिला सुरक्षा नहीं कर सकी जो वो सरकार निकम्मी है”, “पुष्कर धामी मौन है, वीआईपी कौन है”, “बलात्कारियों की यह सरकार नहीं चलेगी”, “पुष्कर धामी होश में आओ”, “महिला विरोधी यह सरकार नहीं चलेगी” जैसे नारे लगाए गए। यूथ कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में अब तक कई महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित हैं और सरकार जानबूझकर तथाकथित वीआईपी को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई द्वारा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नहीं कराई जाती और दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक यूथ कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान प्रदेश सरकार एवं प्रदेश प्रभारी का प्रतीकात्मक पुतला दहन कर आक्रोश व्यक्त किया गया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रदेश में महिला सुरक्षा पूरी तरह से विफल हो चुकी है और भाजपा सरकार महिलाओं को सुरक्षित वातावरण देने में नाकाम साबित हुई है। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से अनुराग मित्तल (प्रदेश महासचिव, युवा कांग्रेस), सौरभ उनियाल (पूर्व पार्षद प्रत्याशी), दीपांशु पंवार (ब्लॉक अध्यक्ष, जाखन), प्रियांशु ठाकुर (ब्लॉक अध्यक्ष, ग्रामीण मसूरी), करण छेत्री, ध्रुव, लक्की सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।











