देहरादून। देहरादून जिले में पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। नैनीताल हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद विकासनगर कोतवाली के इंस्पेक्टर सहित पूरे स्टाफ को बदलने के निर्देश दिए गए, जिसके बाद विभाग में व्यापक स्तर पर तबादले किए गए हैं। इस कार्रवाई से पुलिस व्यवस्था में हड़कंप मच गया है और इसे कानून-व्यवस्था सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
दरअसल मामला अवैध खनन से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार वन विभाग के एसडीओ राजीव नयन नौटियाल अवैध खनन रोकने गए थे, लेकिन उनके खिलाफ ही देर रात एफआईआर दर्ज कर दी गई। इस घटना पर हाईकोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कि। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जब एक सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन कर रहा था तो पुलिस ने उसकी सुरक्षा करने के बजाय उसके खिलाफ मामला क्यों दर्ज किया। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सख्त आदेश जारी किए। जस्टिस राकेश थपलियाल की पीठ ने विकासनगर कोतवाली के पूरे स्टाफ के तबादले के निर्देश दिए, साथ ही एफआईआर दर्ज करने वाले अधिकारी को निलंबित करने को भी कहा।
कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय हरकत में आया और विकासनगर थाने के इंस्पेक्टर समेत पूरे स्टाफ को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, कई पुलिसकर्मियों को अलग-अलग थानों और इकाइयों में भेजा गया है, जबकि नई टीम की तैनाती भी शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई का उद्देश्य निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और पुलिस की साख को बहाल करना बताया जा रहा है। इस मामले में एक वीडियो और अन्य साक्ष्य भी अदालत में प्रस्तुत किए गए, जिनमें कथित तौर पर खनन माफिया द्वारा वन अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार की बात सामने आई। कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि पुलिस को कानून के अनुसार काम करना चाहिए, न कि दबाव में आकर।
इधर, राज्य के अन्य हिस्सों में भी अवैध खनन से जुड़े मामलों पर कार्रवाई तेज हुई है। हरिद्वार जिले में एक वायरल ऑडियो के आधार पर चौकी प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभाग की छवि को धूमिल करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पुलिस और खनन माफिया के गठजोड़ पर सवाल खड़े कर दिए हैं।














