नई दिल्ली। भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए केंद्र सरकार एक अनोखी और कड़ी सुरक्षा रणनीति पर विचार कर रही है। जानकारी के अनुसार, जिन इलाकों में बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहाँ प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र का इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत नदियों और दलदली क्षेत्रों में सांप और मगरमच्छों की मौजूदगी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि घुसपैठ की कोशिशों पर स्वाभाविक रोक लग सके।
भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इस सीमा के अधिकांश हिस्सों में बाड़ लगाई जा चुकी है, लेकिन लगभग 175 किलोमीटर क्षेत्र ऐसा है जहाँ नदियाँ, दलदल और जलभराव के कारण फेंसिंग लगाना संभव नहीं हो पाता। यही क्षेत्र सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। सीमा सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार घुसपैठिए अक्सर इन्हीं जलमार्गों और दलदली इलाकों का फायदा उठाकर सीमा पार करने की कोशिश करते हैं। रात के अंधेरे में छोटी नावों या तैरकर सीमा पार करने की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। इसी समस्या को देखते हुए अब इन इलाकों में प्राकृतिक अवरोध पैदा करने की रणनीति तैयार की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार योजना के तहत सीमा से लगे नदी और दलदली क्षेत्रों में मगरमच्छ और जहरीले सांपों की मौजूदगी बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है। माना जा रहा है कि अगर इन क्षेत्रों में खतरनाक जीवों की संख्या बढ़ेगी तो घुसपैठियों के लिए सीमा पार करना बेहद जोखिम भरा हो जाएगा। इस प्रस्ताव पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को अध्ययन और संभावित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियाँ यह भी देख रही हैं कि इस योजना को लागू करने से पर्यावरण और स्थानीय आबादी पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। इस योजना के साथ-साथ सीमा पर आधुनिक निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहाँ ड्रोन निगरानी, फ्लोटिंग बीओपी (Border Out Post), स्पीड बोट और सेंसर आधारित सिस्टम का इस्तेमाल पहले से किया जा रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक अवरोध का इस्तेमाल दुनिया के कई हिस्सों में किया गया है, लेकिन इसे लागू करने से पहले पर्यावरण, जैव विविधता और स्थानीय लोगों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना जरूरी होगा। फिलहाल यह प्रस्ताव प्रारंभिक विचार और अध्ययन के चरण में बताया जा रहा है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा विस्तृत समीक्षा के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
(वेब डेस्क)











